झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में आधुनिक दुकानों और बड़े बाजारों की कोई कमी नहीं है, लेकिन शहर की चकाचौंध से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिर्जाडीह का पारंपरिक साप्ताहिक हाट आज भी अपनी अनोखी पहचान कायम रखे हुए है। सुपरमार्केट्स और आधुनिक मॉल्स के इस युग में भी यह हाट अपनी पुरानी ग्रामीण संस्कृति और सादगी को संजोए हुए है। सप्ताह में दो बार लगने वाले इस बाजार में न केवल नजदीकी देहाती इलाकों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आते हैं, बल्कि ताजी उपज और देशी खान-पान के शौकीन शहरवासी भी अच्छी खासी तादाद में खरीदारी करने पहुंचते हैं।
सप्ताह में दो दिन सजता है पारंपरिक बाजार
मिर्जाडीह के इस खुले मैदान में साप्ताहिक हाट हर मंगलवार और शुक्रवार को लगाया जाता है। दोपहर ढलने के बाद शाम करीब 4 बजे से ग्रामीण दुकानदार और किसान अपनी दुकानें सजाना शुरू कर देते हैं। जैसे-जैसे शाम गहराती है, पूरा परिसर खरीदारों की चहल-पहल से भर जाता है। स्थानीय निवासियों के लिए यह हाट घरेलू सामान जुटाने का सबसे सुलभ जरिया है, तो वहीं आसपास के तमाम देहाती इलाकों के ग्रामीणों के लिए यह अपनी स्थानीय उपज को सीधे बेचने और आमदनी कमाने का सबसे भरोसेमंद केंद्र भी है।
सीधे किसानों से बिना पॉलिश वाले अनाज की मांग
इस बाजार का सबसे प्रमुख आकर्षण यहां मिलने वाला ग्रामीण अनाज और दलहन है। कई शहरी परिवार विशेष तौर पर बिना पॉलिश वाली दाल और चावल खरीदने के लिए मिर्जाडीह का रुख करते हैं। क्षेत्र के किसान अपने खेतों और खलिहानों में तैयार की गई उपज को बिना किसी बिचौलिए के सीधे इस हाट में लेकर आते हैं। रासायनिक पॉलिश और मिलावट से दूर, शुद्ध और प्राकृतिक अनाज मिलने के कारण शहरी ग्राहकों के बीच इसकी मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को भी अपनी मेहनत का सीधा फायदा मिलता है।
खेती के औजारों से लेकर रोजमर्रा का हर जरूरी सामान
मिर्जाडीह के इस हाट में जीवनयापन से जुड़ी लगभग हर बुनियादी वस्तु आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यहां लगने वाली दुकानों पर कपड़े, घरेलू राशन, मनिहारी और सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं, पारंपरिक खेती-किसानी में काम आने वाले औजार और कई अन्य आवश्यक उत्पाद बेचे जाते हैं। ग्रामीण परिवेश की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ यह बाजार कारीगरों और छोटे विक्रेताओं को अपना सामान खपाने का बेहतर मंच देता है।
ताजी हरी सब्जियां और शाम का लजीज जायका
अनाज और राशन के अतिरिक्त इस हाट में ताजी सब्जियों की भी कतारबद्ध दुकानें लगती हैं। ग्रामीण किसान अपने खेतों से तोड़ी गई हरी-भरी सब्जियां टोकरियों में भरकर लाते हैं, जो ताजगी और स्वाद के मामले में शहरी मंडियों से कहीं बेहतर होती हैं। सूरज ढलते ही हाट का माहौल और जीवंत हो उठता है, जब यहां मिष्ठान, चाट-पकौड़ी और पारंपरिक खान-पान के छोटे स्टॉल पूरी तरह सज जाते हैं। खरीदारी के साथ गरमा-गरम नाश्ते का लुत्फ उठाना इस बाजार की जीवंतता को और बढ़ा देता है, जिसके कारण आधुनिक दौर में भी मिर्जाडीह हाट की लोकप्रियता जस की तस बनी हुई है।



















