रक्षाबंधन का पर्व बहनों और भाइयों के बीच पवित्र प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन झारखंड के पलामू जिले में इस साल यह त्यौहार केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। पर्व के नजदीक आते ही बाजारों में तरह-तरह की राखियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। इस माहौल का लाभ उठाते हुए पलामू में सखी मंडल से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर के बल पर रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। रंग-बिरंगे रेशमी धागों से भाई की कलाई सजाने के साथ-साथ ये दीदियां आर्थिक स्वावलंबन की एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों में तैयार की जा रही इन आकर्षक राखियों की मांग अब स्थानीय बाजारों से निकलकर अन्य इलाकों तक भी पहुंचने लगी है।
तीन प्रखंडों में जोर-शोर से चल रहा निर्माण कार्य
पलामू जिले के तीन अलग-अलग प्रखंडों में सखी मंडल की सदस्य महिलाएं इन दिनों दिन-रात राखी बनाने के काम में जुटी हुई हैं। समूह की महिलाओं ने इस बार कुल मिलाकर 40 हजार राखियां तैयार करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। अगर पांडव प्रखंड की बात करें, तो वहां की 10 महिलाएं आपस में मिलकर करीब 10 हजार राखियां तैयार करने में लगी हैं। ये सभी महिलाएं पिछले लगभग एक महीने से लगातार इस शिल्प कार्य में व्यस्त हैं। राखियों को सुंदर और आकर्षक रूप देने के लिए रेशम के धागे, चमकीले मोती, स्वस्तिक चिह्न और अन्य सजावटी सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। अलग-अलग डिजाइनों और शैलियों में बनाई जा रही ये राखियां ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
कम लागत और बेहतरीन मुनाफे का गणित
सखी मंडल से जुड़ी सुनीता देवी ने इस काम के आर्थिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उनके अनुसार राखी निर्माण का कार्य ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे आत्मनिर्भर बनाने का एक अत्यंत सुलभ जरिया बन गया है। एक साधारण या आकर्षक राखी बनाने में अमूमन दो से तीन मिनट का समय लगता है। इसे तैयार करने में प्रति राखी लगभग चार से पांच रुपये की लागत आती है। जब इन राखियों को थोक बाजार में बेचा जाता है, तो उनकी कीमत करीब 10 रुपये तय होती है, जबकि खुदरा बाजार में ग्राहक इन्हें 15 से 20 रुपये तक की कीमत पर खुशी-खुशी खरीद रहे हैं।
स्टॉल के जरिये बिक्री और परिवार को आर्थिक मजबूती
सुनीता देवी ने बताया कि महिलाओं की टीम अब तक लगभग 10 से 15 हजार राखियां बनाकर पूरी तरह तैयार कर चुकी है। इन तैयार राखियों की सुगम बिक्री सुनिश्चित करने के लिए पलामू जिले के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर विशेष स्टॉल भी लगाए जा रहे हैं। त्यौहारों के समय बाजारों में राखियों की मांग कई गुना बढ़ जाती है, जिससे सखी मंडल की महिलाओं को इस सीजन में बेहतरीन आय होने की उम्मीद है। इस पूरे व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी भारी पूंजी या बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ती। महिलाएं अपने घरों में या समूह स्तर पर बैठकर इसे आसानी से बना सकती हैं। स्थानीय संसाधनों और अपने हुनर का सही इस्तेमाल कर पलामू की महिलाएं न केवल अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि त्योहार के मौके पर स्वावलंबन का एक प्रेरक संदेश भी दे रही हैं।





















