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मानसून के बाद दीवारों पर क्यों जम जाता है सफेद पाउडर, जानें कारण और इसका सही समाधानट्रेंड्स
10 सित॰ 2026, 2:05 pm (53 मिनट पहले)· 2

मानसून के बाद दीवारों पर क्यों जम जाता है सफेद पाउडर, जानें कारण और इसका सही समाधान

बारिश के बाद दीवारों पर दिखने वाला सफेद पाउडर दरअसल एफ्लोरेसेंस प्रक्रिया का नतीजा होता है। केवल पेंट कराने से यह समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि इसके असली स्रोत का पता लगाना जरूरी है।

बारिश के मौसम के बाद अक्सर घरों की दीवारों पर एक अजीब सी सफेद रंग की परत या पाउडर जमा हुआ दिखाई देने लगता है। इसे देखकर ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि शायद घर का पेंट खराब हो गया है या फिर सीमेंट अंदर से उखड़ने लगा है। नई पुताई के तुरंत बाद ऐसा नजारा देखना homeowners को और ज्यादा परेशान कर देता है, लेकिन राहत की बात यह है कि हर बार यह दीवार के कमजोर होने की निशानी नहीं होती है।

इस पूरी प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में एफ्लोरेसेंस कहा जाता है। इसमें दीवार के भीतर छिपे हुए घुलनशील लवण नमी के साथ सफर तय करते हुए बाहरी सतह तक पहुंच जाते हैं। जब सूरज की गर्मी या हवा से वह पानी सूख जाता है, तो पीछे ये सफेद अवशेष अपनी छाप छोड़ जाते हैं। मानसून के दिनों में हवा और दीवारों में नमी की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिसकी वजह से यह सफेद परत और भी ज्यादा साफ और स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आने लगती है। हालांकि, इसे केवल एक मामूली कॉस्मेटिक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देना या सिर्फ ऊपर से साफ करके छोड़ देना बिल्कुल सही तरीका नहीं है, क्योंकि इसके पीछे अक्सर लगातार बनी रहने वाली सीलन, पानी का लीकेज या कमजोर वॉटरप्रूफिंग छिपी हो सकती है।

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दीवारों के भीतर से कैसे बाहर आता है यह सफेद पाउडर

देखने में ईंट, सीमेंट और प्लास्टर भले ही बेहद ठोस और मजबूत नजर आते हैं, लेकिन इनके सूक्ष्म ढांचे के भीतर बहुत बारीक और अनदेखे छिद्र मौजूद होते हैं। जब कभी बरसात का पानी, लगातार बनी सीलन या किसी क्षतिग्रस्त पाइप से होने वाला लीकेज इन रास्तों से होकर दीवार के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचता है, तो पानी अपने साथ भीतर मौजूद कुछ घुलनशील लवणों को घोल लेता है। यह नमी धीरे-धीरे कैपिलरी एक्शन के जरिए दीवार की अंदरूनी परतों से होते हुए बाहरी सतह की तरफ बढ़ने लगती है। जैसे ही यह नमी बाहर आकर खुली हवा के संपर्क में आकर सूखती है, उसमें घुले हुए लवण सतह पर ही छूट जाते हैं और सूखने के बाद एक सफेद पाउडर या पपड़ी का रूप ले लेते हैं।

क्या इस सफेद परत से दीवार सचमुच कमजोर हो जाती है

केवल सतह पर दिख रही सफेद परत को देखकर यह निष्कर्ष निकाल लेना पूरी तरह से गलत होगा कि मकान की दीवारें भीतर से कमजोर हो चुकी हैं। कई तमाम मामलों में एफ्लोरेसेंस केवल सतह तक ही सीमित रहने वाली एक प्रक्रिया है जिससे तुरंत कोई संरचनात्मक नुकसान नहीं होता है। लेकिन अगर यह सफेद पाउडर बार-बार लगातार लौटकर आ रहा है, दीवार का पेंट फूलने लगा है, प्लास्टर उखड़ने की स्थिति में आ गया है या फिर दीवार लंबे समय तक अंदर से गीली बनी रहती है, तो इसे बिल्कुल हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। समय के साथ यह लगातार बनी रहने वाली नमी निर्माण सामग्री की मजबूती को अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला कर सकती है।

बारिश के मौसम में यह समस्या क्यों अधिक उभरती है

मानसून के दौरान बाहरी दीवारें लगातार बारिश की बौछारों और उमस भरे वातावरण के संपर्क में रहती हैं। यदि दीवार में पहले से ही बाल जितनी बारीक दरारें मौजूद हैं, वॉटरप्रूफिंग ठीक से नहीं की गई है या फिर घर का ड्रेनेज सिस्टम खराब है, तो पानी के अंदर रिसने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यही मुख्य वजह है कि बारिश का दौर थमने के बाद बहुत से घरों में ये सफेद निशान अचानक बहुत ज्यादा मात्रा में दिखाई देने लगते हैं। पुराने मकानों में यह परेशानी अपेक्षाकृत काफी ज्यादा देखने को मिलती है, विशेषकर उन जगहों पर जहां बाहरी प्लास्टर या वॉटरप्रूफिंग की मरम्मत लंबे समय से नहीं कराई गई होती है।

केवल बारिश ही नहीं, इन वजहों से भी आ सकता है सफेद पाउडर

दीवार पर सफेद पाउडर या पपड़ी जमने की वजह केवल मानसून का होना ही नहीं है। इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे कि पानी के पाइपों में लीकेज होना, बाथरूम से लगातार सीलन आना, जमीन के नीचे से कैपिलरी एक्शन के जरिए ऊपर की तरफ चढ़ने वाली नमी, खराब जल निकासी व्यवस्था और खुद निर्माण सामग्री के अंदर पहले से मौजूद घुलनशील साल्ट्स। यही कारण है कि केवल दीवार पर बने इन सफेद निशानों को देखकर यह अंदाजा लगाना बहुत कठिन होता है कि असल में पानी भीतर कहां से आ रहा है। इसके लिए आसपास के पूरे हिस्से की नमी, पेंट की मौजूदा स्थिति और प्लास्टर की हालत को बारीकी से परखना बहुत जरूरी हो जाता है।

केवल सफाई करना और नया पेंट कराना क्यों नहीं है सही उपाय

अक्सर लोग जैसे ही दीवार पर यह सफेद परत देखते हैं, वे उसे किसी सख्त चीज से रगड़कर साफ कर देते हैं और उसके ऊपर नया पेंट लगवा देते हैं। ऐसा करने से दीवार कुछ ही दिनों के लिए साफ-सुथरी और सुंदर जरूर दिखने लगती है, लेकिन अगर नमी का असली स्रोत अंदर ही बना रहा, तो कुछ समय बाद वह सफेद परत फिर से लौट आएगी। इसका सबसे बेहतर और स्थाई तरीका यह है कि सबसे पहले पानी के आने के मूल स्रोत की सही से पहचान की जाए। यदि बाहरी दीवार से पानी अंदर आ रहा है, तो दीवारों की दरारों और वॉटरप्रूफिंग की तुरंत जांच कराई जानी चाहिए। यदि नमी बाथरूम या किसी पाइप से आ रही है, तो प्लंबिंग से जुड़ी गड़बड़ियों को ठीक करवाना जरूरी है। यदि सफेद परत के साथ-साथ पेंट बार-बार फूल रहा है, प्लास्टर नरम पड़ रहा है, दीवार लगातार सीलन से गीली रहती है या दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं, तो किसी पेशेवर विशेषज्ञ से पूरे ढांचे की जांच करवाना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।

सवाल-जवाब

दीवार पर दिखने वाले सफेद पाउडर को क्या कहा जाता है?
इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को एफ्लोरेसेंस कहा जाता है, जिसमें दीवार के भीतर के लवण नमी के साथ सतह पर आ जाते हैं।
क्या बारिश के बाद दीवार पर सफेद पाउडर दिखना खतरनाक है?
यह हर बार दीवार के कमजोर होने का संकेत नहीं होता, लेकिन बार-बार लौटने पर यह सीलन और लीकेज की बड़ी समस्या हो सकती है।
क्या केवल ऊपर से नया पेंट करा देने से यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाती है?
नहीं, जब तक नमी के असली स्रोत या लीकेज को ठीक नहीं किया जाता, तब तक सफेद परत दोबारा वापस आ जाती है।
बारिश के मौसम में यह समस्या क्यों बढ़ जाती है?
मानसून में लगातार नमी और बारिश के कारण दीवारें गीली रहती हैं, जिससे पानी और लवणों का सतह तक पहुंचना आसान हो जाता है।
दीवारों पर सफेद पाउडर आने के अन्य संभावित कारण क्या हैं?
पाइप में लीकेज, बाथरूम की सीलन, जमीन से ऊपर चढ़ने वाली नमी और निर्माण सामग्री के अपने साल्ट्स इसके अन्य कारण हैं।
विशेषज्ञ से कब संपर्क करना चाहिए?
पेंट के बार-बार फूलने, प्लास्टर नरम होने, दरारें बढ़ने या एक ही जगह पर सफेद निशान बार-बार लौटने पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
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