भारतीय रसोई में दाल-रोटी और सब्जी सबसे बुनियादी व संतोषजनक भोजन माना जाता है। दावतों और भारी पकवानों के बाद भी लोग अक्सर सादे और सुपाच्य दाल-चावल पर लौट आते हैं। दालों में सबसे अधिक पसंद की जाने वाली अरहर यानी तुअर दाल को अगर सही विधि और संतुलित खड़े मसालों के साथ पकाया जाए, तो इसका जायका किसी ढाबे की दाल तड़का से कम नहीं लगता। बिना दाल भिगोए भी प्रेशर कुकर में इसे बेहद कम समय में बिल्कुल खिला-खिला और सुगंधित तैयार किया जा सकता है।
सब्जियों और खड़े मसालों की सही तैयारी
इस विधि से पकाने के लिए सबसे पहले कुछ ताजी सामग्री काट कर अलग रख लें। चार से पांच लहसुन की कलियों को छीलकर एकदम महीन काटें। इसके साथ ही प्याज की एक बड़ी गांठ, दो हरी मिर्च और एक पके टमाटर को भी बारीक टुकड़ों में काट लें। अब एक कटोरे में अरहर दाल लेकर उसे नल के ताजे पानी में हाथों से रगड़ते हुए चार से पांच मर्तबा अच्छी तरह धो लें ताकि उसकी ऊपरी धूल और स्टार्च पूरी तरह निकल जाए। धोने के तुरंत बाद पानी को पूरी तरह निथार दें, क्योंकि इस रेसिपी में दाल को पहले से पानी में डुबोकर रखने की जरूरत नहीं होती।
कुकर में दाल भूनने और पकाने की विधि
अब प्रेशर कुकर को गैस चूल्हे पर रखकर आंच धीमी कर दें। इसमें दो चम्मच देसी घी डालें, हालांकि अपनी पसंद के अनुसार रिफाइंड तेल का प्रयोग भी किया जा सकता है। जब घी गुनगुना हो जाए, तब इसमें सुगंध के लिए एक बड़ी काली इलायची और तीन से चार साबुत काली मिर्च डाल दें। खड़े मसालों से भीनी महक उठते ही कटी प्याज और टमाटर को कुकर में डालकर चलाएं।
टमाटर डालने के फौरन बाद स्वादानुसार नमक, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच तीखा लाल मिर्च पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाएं। इसके बाद धुली हुई अरहर दाल डालकर सभी मसालों के साथ अच्छी तरह करछुल से चला लें ताकि दाल के दानों पर मसालों और घी की परत चढ़ जाए।
पानी की मात्रा और सीटी लगाने का नियम
दाल जब मसालों के साथ मिल जाए, तब इसमें पानी मिलाने की बारी आती है। पानी का अनुपात इस बात पर निर्भर करता है कि दाल गाढ़ी चाहिए या पतली। सामान्य गाढ़ेपन के लिए तीन से चार कप पानी पर्याप्त रहता है। यदि आपको पतली दाल पसंद है तो चार से पांच कप पानी डालें, वहीं काफी गाढ़ी दाल खाने के शौकीन केवल तीन कप पानी मिलाएं। ढक्कन बंद करके मध्यम आंच पर कुकर में ठीक दो सीटी आने दें। दो सीटी में दाल पूरी तरह गल जाती है और उसके दाने भी आपस में घुलकर चिपचिपे नहीं बनते।
करछुल में तैयार करें सुगंधित देसी तड़का
दाल की असली जान उसका अंतिम बघार या छौंक होता है। इसके लिए एक बड़ी गहरी करछुल लें और उसमें दो बड़े चम्मच शुद्ध घी गर्म करें। घी जब अच्छी आंच पकड़ ले, तब उसमें जीरा डालें और उसे अच्छी तरह चटकने दें। जीरे का रंग बदलते ही दो साबुत सूखी लाल मिर्च डाल दें। मिर्च से रंग छूटते ही बारीक कटा लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।
लहसुन सिकने के तुरंत बाद इसमें दो कटी हरी मिर्च, सुगंधित हींग और थोड़ा सा बारीक कटा हरा धनिया डालकर तड़का पूरा करें। इस खौलते हुए छौंक को सीधे कुकर की पकी दाल में पलटें और तुरंत ढक्कन से ढक दें। तड़का लगाते ही कुकर बंद रखने से घी, हींग और लहसुन की पूरी भाप और सुगंध दाल के भीतर ही समा जाती है।
परोसने का सही अंदाज
कुछ मिनट बाद ढक्कन हटाएं और ऊपर से बाकी बचा बारीक हरा धनिया डालकर मिला लें। परोसते वक्त कटोरे में ऊपर से आधा चम्मच अतिरिक्त घी डालें। यह गरमागरम तड़के वाली दाल सादे उबले चावल के साथ बेहतरीन तालमेल बनाती है। साथ में प्याज और खीरे का ताजा सलाद तथा थोड़ा सा चटपटा अचार रख देने से पूरा भोजन संपूर्ण और बेहद तृप्त करने वाला बन जाता है।



















