घर की बालकनी, छत या खिड़की के कोनों को प्राकृतिक रूप से सजाने के लिए गमलों में फूलों की बागवानी एक बेहतरीन जरिया है। कंक्रीट के घरों में हरियाली और चटख रंगों की मौजूदगी न केवल आंखों को सुकून देती है, बल्कि दिनभर की मानसिक थकान भी दूर करती है। कई बार लोगों को लगता है कि खूबसूरत फूलों वाले पौधे केवल बड़े बगीचों या खेतों में ही पनप सकते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि सही किस्मों के चुनाव से सामान्य आकार के गमले भी कुछ ही हफ्तों में गुलजार हो सकते हैं। पौधों को उनकी जरूरत के मुताबिक रोशनी, पानी और उचित जल निकासी वाली मिट्टी मिले, तो वे तेजी से विकसित होकर ढेरों कलियां देने लगते हैं।
गेंदा और पेटूनिया से लाएं चटख रंगों की बहार
अगर कोई शुरुआती बागवान है और उसे ऐसे पौधे की तलाश है जो कम मेहनत में जल्दी नतीजे दे, तो गेंदा सबसे मुफीद विकल्प साबित होता है। गेंदे को सामान्य खाद-मिट्टी के मिश्रण में बहुत आसानी से लगाया जा सकता है। नियमित देखभाल और अनुकूल मौसम में बीज बोने या पौध लगाने के लगभग 45 से 60 दिनों के भीतर इसमें बड़े आकार के पीले और नारंगी फूल खिलने लगते हैं। गेंदे की मौजूदगी से गमले बेहद जीवंत दिखते हैं और इनकी महक भी वातावरण को तरोताजा बनाए रखती है।
वहीं दूसरी ओर, पेटूनिया गमलों और हैंगिंग बास्केट दोनों के लिए एक बेहद दिलकश चुनाव है। पेटूनिया का पौधा हल्की धूप और अपेक्षाकृत ठंडे मौसम में बहुत अच्छी तरह फलता-फूलता है। जब इसका अनुकूल मौसम चलता है, तब यह लंबे समय तक लगातार नए-नए फूल पैदा करता रहता है। बैंगनी, गुलाबी, सफेद और दोहरे रंगों में खिलने वाले पेटूनिया के फूल बालकनी की रेलिंग या खिड़की की चौखट पर रखे गमलों की शोभा में अप्रत्याशित निखार ला देते हैं। थोड़ी सी नियमित निगरानी और सूखी पत्तियों की सफाई इसे हफ्तों तक फूलों से लदा रखती है।
सर्दियों की रानी गुलदाउदी और सदाबहार गुलाब
सर्दियों के मौसम में जब वातावरण में ठंडक घुलने लगती है, तब गुलदाउदी यानी क्राइसेन्थेमम गमलों को फूलों से पूरी तरह भर देने के लिए सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। यदि इसकी पौध अक्टूबर या नवंबर के आसपास गमलों में रोप दी जाए, तो अनुकूल माहौल मिलने पर दिसंबर और जनवरी के महीनों में इसमें फूलों का शानदार सैलाब आ जाता है। गुलदाउदी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके एक ही पौधे पर दर्जनों अलग-अलग रंगों के फूल एक साथ खिलते हैं, जिसके कारण ठंड के दिनों में इस पौधे की मांग हर नर्सरी में सबसे ऊपर रहती है।
फूलों की दुनिया में गुलाब का अपना एक अनूठा और शाही मुकाम है। श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के कृषि एक्सपर्ट प्रो. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि फूलों में गुलाब का कोई सानी नहीं है और इसे गमले में भी बेहद आसानी से उगाया जा सकता है। नर्सरी से लाई गई उम्दा किस्म की पौध या स्वस्थ कलम की मदद से गुलाब की शुरुआत की जा सकती है। गमले में गुलाब उगाने के लिए भरपूर धूप का होना सबसे जरूरी शर्त है। इसके साथ ही संतुलित नमी और समय-समय पर टहनियों की हल्की छंटाई करने से पौधा कई महीनों तक नए अंकुर और महकते हुए गुलाब पैदा करता रहता है।
सूरजमुखी की बौनी किस्में और नाजुक कोसमॉस
आमतौर पर सूरजमुखी का नाम सुनते ही खेतों में खड़े विशालकाय पौधों का ख्याल आता है, लेकिन शहरी बागवानी के लिए इसकी छोटी यानी ड्वार्फ किस्में बाजार में उपलब्ध हैं। सूरजमुखी की इन छोटी किस्मों को मध्यम आकार के गमलों में सरलता से रोपा जा सकता है। इस पौधे को सीधी और पर्याप्त धूप चाहिए होती है, जिसके प्रभाव से यह बेहद तेज रफ्तार से बढ़ता है। सही देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में लगभग डेढ़ से दो महीने के भीतर इसमें सुनहरे पीले रंग के फूल खिलने लगते हैं, जो बालकनी को दूर से ही एक चमकदार और ऊर्जावान स्वरूप प्रदान करते हैं।
इसी क्रम में कोसमॉस भी घर की बागवानी को नाजुक और सुरुचिपूर्ण बनाने वाला एक लाजवाब पौधा है। कोसमॉस की कई किस्में गमलों की सीमित मिट्टी में भी बहुत तेजी से शाखाएं फैलाती हैं। अनुकूल तापमान, पर्याप्त धूप और संतुलित पानी मिलने पर यह पौधा कुछ ही हफ्तों में तैयार होकर हल्के पंखुड़ियों वाले खूबसूरत फूल देने लगता है। इसके हल्के-फुल्के फूल हवा के झोंकों के साथ झूमते हुए गमलों को मनमोहक रूप देते हैं। पहली बार गार्डनिंग की शुरुआत कर रहे लोगों के लिए यह पौधा बिना किसी झंझट के सफलता दिलाता है।
शुरुआती बागवानों के लिए जरूरी देखरेख
पहली बार बागवानी शुरू करने वाले लोगों को जटिल तकनीकों में उलझने के बजाय शुरुआत में गेंदा, पेटूनिया और गुलदाउदी जैसे मजबूत पौधों का ही चयन करना चाहिए। गमले में लगे किसी भी पौधे की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी, मौसम के अनुसार जरूरी धूप और आवश्यकतानुसार ही पानी दिया जाए। गमले की तली में छेद होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी जमा होकर जड़ों को न सड़ाए। मौसम के हिसाब से चुने गए ये पौधे न केवल आपके घर को प्राकृतिक सौंदर्य से भरते हैं, बल्कि प्रकृति के करीब रहकर पौधों की देखभाल करने का एक सुखद अनुभव भी प्रदान करते हैं।



















