घर की रसोई में ताजे पुदीने की खुशबू और स्वाद का कोई मुकाबला नहीं होता। चाहे गर्मी के मौसम में ताजगी भरा ठंडा शरबत तैयार करना हो, चटपटी चटनी पीसनी हो या सलाद की प्लेट को सजाना हो, गमले से सीधे तोड़ी गई पुदीने की हरी पत्तियां तुरंत स्वाद बदल देती हैं। अनेक लोग अपने घर में पुदीने का पौधा बड़े शौक से लगाते हैं, परंतु कुछ ही हफ्तों में पौधा कमजोर पड़ने लगता है। नई पत्तियां निकलना बंद हो जाती हैं, टहनियां लंबी होकर सूखने लगती हैं और पौधा घना होने के बजाय मुरझाया नजर आने लगता है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि केवल नियमित पानी देने से पौधा पनप जाएगा, जबकि असल में गमले के चुनाव, मिट्टी की बनावट, धूप की तीव्रता और टहनियों की कटाई का तालमेल ही पौधे को स्वस्थ रख पाता है। गार्डनिंग एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा ने पुदीने को गमले में लगाने और उसकी सही देखभाल से जुड़ी बेहद व्यावहारिक बातें साझा की हैं, जिनकी मदद से पुदीने की झाड़ी को लगातार हरा-भरा और घना बनाया जा सकता है।
गहरे के बजाय चौड़े गमले का करें चुनाव
पुदीने के पौधे की जड़ प्रणाली अन्य पौधों की तुलना में काफी अलग होती है। इसकी जड़ें मिट्टी में बहुत नीचे गहराई में जाने के बजाय सतह के ठीक नीचे चारों तरफ क्षैतिज रूप से फैलती हैं। इसी वजह से पुदीने को गहरे गमले की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। इसके लिए लगभग 10 से 12 इंच चौड़ाई वाला गमला सबसे उपयुक्त माना जाता है। गमला जितना चौड़ा होगा, पुदीने की रनर शाखाओं को फैलने और नई टहनियां पैदा करने के लिए उतनी ही अधिक जगह मिलेगी।
गमले के चयन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसका जल निकासी छिद्र होता है। गमले की तली में अतिरिक्त पानी निकलने के लिए पर्याप्त ड्रेनेज होल होने बेहद जरूरी हैं। यदि गमले में पानी जमा रहेगा, तो मिट्टी लगातार कीचड़ की तरह गीली रहेगी। लंबे समय तक अत्यधिक गीलापन रहने से पुदीने की नाजुक जड़ों में सड़न की समस्या पैदा हो जाती है और पौधा सूखने लगता है। इसलिए हमेशा ऐसा कंटेनर या गमला चुनें जिससे फालतू पानी बिना किसी रुकावट के बाहर निकल सके।
कटिंग से नया पौधा तैयार करने की आसान विधि
पुदीने को बीज के मुकाबले टहनी की कटिंग से उगाना सबसे सरल और सफल तरीका है। इसके लिए किसी भी स्वस्थ पुदीने की ताजी टहनी लें और उसके निचले हिस्से की कुछ पत्तियों को सावधानी से हटा दें, जिससे तने के नोड्स खुल जाएं। इसके बाद टहनी के इस निचले हिस्से को मिट्टी में हल्के हाथ से दबा दें। जिस भाग को मिट्टी के संपर्क में रखा जाता है, वहां के नोड्स से धीरे-धीरे नई जड़ें फूटने लगती हैं।
यदि किसी को मिट्टी में सीधे कटिंग लगाने में परेशानी महसूस हो, तो टहनी को पहले सामान्य पानी से भरे कांच के गिलास में भी रखा जा सकता है। पानी में रखने के लगभग 10 से 15 दिनों के भीतर सफेद रंग की स्वस्थ जड़ें विकसित हो जाती हैं। जब जड़ें अच्छी तरह निकल आएं, तब इसे गमले की तैयार मिट्टी में स्थानांतरित किया जा सकता है। कटिंग लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिट्टी को जड़ों के आसपास बहुत ज्यादा जोर से न दबाएं, ताकि जड़ें आसानी से सांस ले सकें और फैल सकें।
मिट्टी का सही अनुपात और पोषक तत्वों का मिश्रण
पुदीने के लिए ऐसी भुरभुरी और हवादार मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसमें नमी तो बनी रहे लेकिन पानी ठहरकर दलदल न बने। एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा के अनुसार, एक संतुलित पोटिंग मिक्स तैयार करने के लिए गार्डन की सामान्य मिट्टी, कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट, नीम की खाद और एप्सम साल्ट का सटीक मिश्रण इस्तेमाल करना चाहिए।
इस मिश्रण के तहत 30 प्रतिशत सामान्य गार्डन मिट्टी लें, 20 प्रतिशत कोकोपीट मिलाएं ताकि नमी संतुलित रहे, 30 प्रतिशत जैविक वर्मी कंपोस्ट शामिल करें, 10 प्रतिशत नीम की खाद डालें जो कीड़ों से बचाव करती है, और 10 प्रतिशत एप्सम साल्ट मिलाएं। इसके अलावा गमले की मिट्टी को फंगस जनित रोगों से सुरक्षित रखने के लिए अलग से एंटीफंगल पाउडर डालने की सलाह भी दी गई है। किसी भी खाद या उत्पाद की मात्रा का निर्धारण करने से पहले उसके पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों का अध्ययन करना हमेशा बेहतर रहता है।
धूप और सिंचाई का सही संतुलन
पुदीने के पौधे को स्वाभाविक रूप से नमी काफी पसंद होती है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि गमले की मिट्टी में हर वक्त पानी भरा रहे। जब मौसम गर्म हो और धूप तेज हो, तब मिट्टी की ऊपरी परत तेजी से सूखने लगती है, ऐसे समय में पौधे को तुरंत पानी की आवश्यकता होती है। पानी देते समय इस तरह सिंचाई करें कि पूरी मिट्टी भीतर तक नम हो जाए और अतिरिक्त पानी गमले के नीचे दिए गए छेदों से बाहर निकल जाए।
सूरज की रोशनी के मामले में भी संतुलन बहुत आवश्यक है। अत्यधिक गर्म दिनों में दोपहर की झुलसाने वाली सीधी धूप पौधे की नाजुक पत्तियों को जला सकती है। इसलिए पुदीने के गमले को ऐसे स्थान पर रखें जहां उसे सुबह के समय की हल्की और ताजी धूप मिले, जबकि दोपहर के समय उसे थोड़ी छाया या छनी हुई रोशनी मिल सके। यह वातावरण पुदीने के विकास के लिए सबसे आदर्श साबित होता है।
घना पौधा पाने के लिए प्रूनिंग और हार्वेस्टिंग की तकनीक
यदि पुदीने के पौधे को गोल और घना बनाना है, तो उसकी पत्तियों और टहनियों की समय-समय पर छंटाई करते रहना सबसे जरूरी नियम है। रसोई के लिए आवश्यकतानुसार पत्तियों और ऊपरी टहनियों को तोड़ते रहने से पौधा निरंतर इस्तेमाल में भी बना रहता है और नई शाखाओं के फूटने के लिए अनुकूल परिस्थिति बनती है। जब किसी टहनी के शीर्ष भाग की कटिंग की जाती है, तो उसके ठीक नीचे मौजूद गांठों से दो या उससे अधिक नई शाखाएं फूटती हैं, जिससे पौधा स्वतः ही घना होता चला जाता है।
पुदीने को केवल लंबा बढ़ने देने के बजाय समय-समय पर उसकी हार्वेस्टिंग करते रहना चाहिए। कुछ समय बाद जब पौधे में छोटे-छोटे फूल आने लगें, तो यदि बीज तैयार करने का इरादा हो तो एक-दो डंडियों को छोड़कर बाकी सभी पुष्पित हिस्सों की कटिंग कर देनी चाहिए। यदि बीज की आवश्यकता नहीं है, तो सभी फूलों को तुरंत काट दें ताकि पौधे की ऊर्जा बीज बनाने के बजाय नई हरी पत्तियों के विकास में लगे और पौधा नियंत्रित आकार में बना रहे।
खाद देने का सही तरीका और मात्रा
पुदीना बहुत ज्यादा भारी मात्रा में खाद मांगने वाला पौधा नहीं है। इसमें रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से पत्तियों का प्राकृतिक स्वाद और सुगंध खराब हो सकती है। सामान्य दिनों में केवल जरूरत महसूस होने पर ही गमले की मिट्टी की ऊपरी परत में लगभग 100 ग्राम वर्मी कंपोस्ट मिलाना पर्याप्त होता है। खाद डालने के बाद ऊपरी मिट्टी को हल्के हाथों से मिला दें और फिर आवश्यकतानुसार हल्का पानी दे दें, जिससे पोषक तत्व जड़ों तक धीरे-धीरे पहुंच सकें।



















