घर की पूरी साफ-सफाई करने के बाद जब फर्श बिल्कुल साफ, चमकदार और चलने पर एकदम चिकना महसूस होता है, तभी मेहनत सफल मानी जाती है। हालांकि कई बार देखने में आता है कि घंटों पसीना बहाने और पोंछा लगाने के बावजूद फर्श पर कदम रखते ही अजीब सी चिपचिपाहट महसूस होने लगती है। इतना ही नहीं, सतह के सूखते ही उस पर वातावरण की धूल और मैल तेजी से चिपकने लगती है। बार-बार पानी बदलकर पोंछा लगाने के बाद भी जब यह चिपचिपापन नहीं जाता, तो लोग समझ नहीं पाते कि आखिर कमी कहाँ रह गई। असल में फर्श का चिपचिपा होना हमेशा सामान्य गंदगी के कारण नहीं होता। कई मर्तबा अत्यधिक मात्रा में फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल, बाल्टी का गंदा पानी या सफाई करने का गलत तरीका सतह पर एक अदृश्य रासायनिक परत छोड़ देता है। अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ बुनियादी सुधार करके इस समस्या से आसानी से निजात पाई जा सकती है।
क्लीनिंग लिक्विड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल छोड़ता है अवशेष
फर्श पर बार-बार महसूस होने वाले चिपचिपेपन का सबसे आम और प्रमुख कारण क्लीनिंग केमिकल का अवशेष होता है। बाजार में मिलने वाले कई फ्लोर क्लीनर में ऐसे सक्रिय घटक और सर्फेक्टेंट होते हैं, जिन्हें यदि अनुशंसित मात्रा से ज्यादा मिला दिया जाए तो वे पानी सूखने के बाद भी सतह पर जमे रह जाते हैं। जब गीलापन उड़ जाता है, तो वही रासायनिक परत पैरों के नीचे चिपचिपी लगने लगती है। इस रासायनिक परत का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह वातावरण में मौजूद बारीक धूलकणों और सूक्ष्म गंदगी को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचती है। इसी वजह से मॉपिंग के महज कुछ ही देर बाद फर्श दोबारा भारी, गंदा और मटमैला दिखने लगता है।
एक ही बाल्टी के गंदे पानी से पूरे घर में पोंछा लगाने की भूल
अक्सर देखा जाता है कि लोग पूरे घर का पोंछा लगाने के लिए एक या दो बाल्टी पानी का ही उपयोग करते हैं। जब कमरे दर कमरे सफाई आगे बढ़ती है, तो मॉप के रेशों में फंसी मिट्टी, चिकनाई और मैल उसी बाल्टी के पानी में घुलती जाती है। यदि पानी का रंग पूरी तरह मटमैला और काला होने के बावजूद उसे न बदला जाए, तो वही घुली हुई गंदगी दोबारा पूरे फर्श पर एक पतली परत के रूप में बिछ जाती है। सफाई करते वक्त पानी के हद से ज्यादा गंदा होने का इंतजार कभी न करें। जैसे ही पानी का रंग बदलने लगे, तुरंत ताजा पानी लें और साथ ही मॉप को भी नल के साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोते रहें ताकि मैल दोबारा सतह पर न फैले।
हार्ड वॉटर और मिनरल्स की सतह पर जमने वाली परत
सफाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता भी इस समस्या की एक बड़ी वजह बन सकती है। देश के कई इलाकों में पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की अत्यधिक मात्रा होती है, जिसे हार्ड वॉटर यानी कठोर पानी कहा जाता है। जब कठोर पानी से पोंछा लगाया जाता है, तो पानी भाप बनकर उड़ जाता है लेकिन उसमें घुले हुए मिनरल्स फर्श पर सफेद लकीरों, निशानों या एक अजीब सी खुरदरी परत के रूप में जम जाते हैं। यदि ऐसे पानी के साथ फ्लोर क्लीनर की मात्रा भी ज्यादा कर दी जाए, तो यह समस्या दोगुनी गंभीर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप फर्श पर अजीब सा धुंधलापन, सफेद धब्बे और मैलापन नजर आने लगता है।
हर तरह के फर्श के लिए एक जैसा क्लीनर चुनना नुकसानदेह
घरों में अलग-अलग कमरों में भिन्न प्रकार की सतहें होती हैं, जैसे टाइल्स, मार्बल, ग्रेनाइट, प्राकृतिक पत्थर, लकड़ी या लैमिनेट फ्लोरिंग। इन सभी सतहों की संरचना और उनकी रासायनिक संवेदनशीलता पूरी तरह अलग होती है। घर के सभी कमरों में एक ही तरह का तेज केमिकल या सामान्य क्लीनर इस्तेमाल करना समझदारी नहीं है। किसी भी क्लीनर का उपयोग करने से पहले उसकी बोतल या पैकेट पर लिखे निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। विशेष रूप से यदि आपके घर में संगमरमर, प्राकृतिक पत्थर या लकड़ी का फर्श है, तो हमेशा उन्हीं के अनुकूल बनाए गए सौम्य और विशिष्ट उत्पादों का चयन करना चाहिए ताकि सतह की प्राकृतिक चमक सुरक्षित रहे।
चिपचिपेपन को हटाने और सही तरीके से पोंछा लगाने के जरूरी नियम
यदि फर्श पर पहले से ही क्लीनर की चिपचिपी परत जम चुकी है, तो अगली सफाई में केवल सादे पानी से रिंस मॉपिंग करके देखें। सबसे पहले तय अनुपात में फ्लोर क्लीनर मिलाकर सामान्य सफाई करें। इसके तुरंत बाद एक दूसरा बिल्कुल साफ मॉप लें, उसे गुनगुने या सादे पानी में डुबोकर अच्छी तरह निचोड़ें और पूरे फर्श पर दोबारा पोंछा लगाएं। यह दोहराव सतह पर बचे हुए अतिरिक्त केमिकल और साबुन के अंश को पूरी तरह खींच लेता है। इसके साथ ही मॉप की स्वच्छता का ध्यान रखना भी अनिवार्य है, क्योंकि गंदा मॉप साफ फर्श को भी मैला कर देता है।
अधिक क्लीनर डालने से ज्यादा सफाई होगी, यह सोचना पूरी तरह गलत है। हमेशा उत्पाद के लेबल पर सुझाई गई माप के अनुसार ही पानी में घोल तैयार करें। इसके अलावा, गीला पोंछा लगाने से ठीक पहले फर्श से सूखी धूल, बाल और मिट्टी को झाड़ू या वैक्यूम क्लीनर की मदद से पूरी तरह साफ कर लें। यदि सूखी मिट्टी पहले ही हटा ली जाएगी, तो गीले मॉप के साथ कीचड़ या मैल के फैलने का जोखिम नहीं रहेगा। सफाई पूरी होने के बाद कमरे में पंखे चलाकर फर्श को अच्छी तरह सूखने दें और जरूरत पड़ने पर सूखे सूती कपड़े या सूखे मॉप से अतिरिक्त नमी पोंछ लें। यदि किसी निश्चित स्थान पर फिर भी चिपचिपाहट बनी रहे, तो इस्तेमाल किए जा रहे क्लीनर और फर्श की सामग्री दोनों की जांच जरूर करें।



















