अक्सर देखा जाता है कि कपड़े फटने या पूरी तरह खराब होने से पहले ही अपनी चमक खोने लगते हैं। बार-बार धुलाई और लगातार इस्तेमाल के चलते उनका मूल रंग फीका पड़ने लगता है, फैब्रिक ढीला पड़ जाता है और कपड़ा पूरी तरह बेजान दिखने लगता है। जब किसी पसंदीदा परिधान के साथ ऐसी स्थिति बनती है, तो उसे दोबारा पहनने का उत्साह खत्म हो जाता है। हालांकि, कपड़ों को लंबे समय तक नया बनाए रखने के लिए हर बार महंगे लाउंड्री उत्पादों पर पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं होती। आपकी रोजमर्रा की कुछ बुनियादी आदतें ही कपड़ों की उम्र बढ़ाने में बेहद मददगार साबित हो सकती हैं।
धुलाई का सही तरीका, धूप की तीव्रता, प्रेस करने का तापमान और वॉर्डरोब में रखने का सलीका सीधे तौर पर कपड़ों के आकर्षण और उनकी मजबूती को तय करता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके परिधान हमेशा साफ, चमकदार और परफेक्ट फिटिंग वाले बने रहें, तो देखभाल से जुड़े इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
फैब्रिक और लेबल के अनुसार ही तय करें धुलाई
कपड़ों की लंबी उम्र की शुरुआत सही धुलाई के चुनाव से होती है। हर बार इस्तेमाल के तुरंत बाद कपड़ों को सीधे वॉशिंग मशीन में डाल देना समझदारी नहीं है। कॉटन, सिल्क, ऊनी और सिंथेटिक कपड़ों की बनावट पूरी तरह अलग होती है, इसलिए उनकी देखभाल भी एक समान नहीं की जा सकती। किसी भी परिधान को साफ करने से पहले उस पर लगे वॉशिंग लेबल के दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और उसी के अनुरूप पानी का तापमान और चक्र चुनना चाहिए।
हर इस्तेमाल के बाद धोने की आदत से बचें
हर बार बाहर पहनकर जाने के बाद प्रत्येक कपड़े को पानी और डिटर्जेंट से धोना कतई अनिवार्य नहीं है। यदि परिधान पर कोई दाग नहीं लगा है, पसीने की गंध नहीं आ रही है और वह साफ दिख रहा है, तो उसे कुछ देर खुली हवा में सुखाकर दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। अत्यधिक धोने से कपड़ों के रेशों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और रंग तेजी से उड़ने लगता है। बेशक, मोजे, अंडरवियर और बहुत ज्यादा पसीना सोखने वाले कपड़ों को प्रत्येक उपयोग के बाद धोना आवश्यक है।
रंगों के आधार पर कपड़ों का विभाजन
नये अथवा गहरे रंग के कपड़े शुरुआती धुलाई में अपना रंग छोड़ सकते हैं। ऐसे में उन्हें कभी भी सफेद अथवा हल्के रंग के परिधानों के साथ मिलाकर नहीं धोना चाहिए। डार्क और लाइट कपड़ों को अलग करके धोने की सामान्य आदत कपड़ों के मूल रंग को बदरंग होने से बचाती है। इसके अलावा जीन्स और गहरे रंग की अन्य पोशाकों को हमेशा उल्टा करके वॉश करना चाहिए, ताकि बाहरी सतह घर्षण से बची रहे।
डिटर्जेंट की सही मात्रा का रखें ख्याल
बहुत से लोग मानते हैं कि ज्यादा गंदे कपड़ों के लिए अत्यधिक डिटर्जेंट डालना बेहतर रहेगा, लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है। आवश्यकता से अधिक डिटर्जेंट का इस्तेमाल करने से साबुन के कण कपड़ों के रेशों में फंसकर रह जाते हैं। इससे कपड़े की कोमलता नष्ट हो जाती है और वह खुरदुरा महसूस होने लगता है। हमेशा कपड़ों की संख्या और उत्पाद पर लिखे निर्देशों के अनुसार ही सीमित डिटर्जेंट का प्रयोग करें।
सीधी तेज धूप में सुखाने से बचें
धुलाई के बाद कपड़ों को घंटों तक चिलचिलाती धूप में छोड़े रखना उनके रंग के लिए नुकसानदेह साबित होता है। अत्यधिक धूप के संपर्क में रहने से गहरे रंग बहुत जल्दी फीके पड़ जाते हैं। ऐसे में रंगीन परिधानों को हमेशा उल्टा करके किसी ऐसी छायादार जगह पर सुखाना चाहिए, जहां हवा का प्रवाह अच्छा हो और सीधी तेज धूप न आती हो।
इस्त्री का तापमान और प्रेस करने का तरीका
कपड़ों को जरूरत से ज्यादा गर्म प्रेस से इस्त्री करने पर उनकी सतह जल सकती है या चमक खराब हो सकती है। विशेष रूप से सिंथेटिक और नाजुक फैब्रिक वाले कपड़ों के लिए प्रेस का तापमान हमेशा कम ही रखना चाहिए। इस्त्री करने से पहले लेबल पर दिए गए तापमान के निर्देशों को जरूर जांच लें। गहरे रंग के कपड़ों को उल्टा करके प्रेस करने से उन पर पड़ने वाली चमक और निशानों की समस्या से बचा जा सकता है।
वॉर्डरोब में रखने और दाग हटाने की सावधानी
अलमारी में कपड़ों को जबरन ठूंसकर रखने से उनमें सिलवटें पड़ जाती हैं और उनका आकार बिगड़ने लगता है। शर्ट, ब्लेजर और खास परिधानों को हमेशा मजबूत हैंगर पर लटकाना चाहिए। इसके विपरीत, निटेड और भारी कपड़ों को हैंगर पर लटकाने के बजाय करीने से मोड़कर रखना चाहिए, ताकि उनका खिंचाव न बढ़े। यदि कपड़े पर चाय, कॉफी, तेल अथवा मेकअप का दाग लग जाए, तो उसे तुरंत साफ करने का प्रयास करें। दाग जितना पुराना होगा, उसे निकालना उतना ही कठिन हो जाएगा। किसी भी नए घरेलू नुस्खे को आजमाने से पहले कपड़े के किसी छिपे हुए छोटे हिस्से पर जांच अवश्य कर लें।



















