अपना पक्का आशियाना खड़ा करने की योजना बना रहे लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्माण की कुल लागत का सही आकलन करना होता है। बिहार के अलग-अलग जिलों में माप की क्षेत्रीय इकाइयों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है, लेकिन अमूमन एक कट्ठा जमीन का क्षेत्रफल लगभग 1,361 वर्गफुट आंका जाता है। जब कोई परिवार इस आकार के भूखंड पर ग्राउंड फ्लोर के साथ एक अतिरिक्त मंजिल यानी जी+1 फ्रेम स्ट्रक्चर तैयार करने का फैसला लेता है, तो योजना की शुरुआत से लेकर गृह प्रवेश तक एक व्यवस्थित वित्तीय तैयारी बेहद जरूरी हो जाती है। कुल लागत हमेशा इस बात पर टिकी होती है कि निर्माण का वास्तविक बिल्ट-अप क्षेत्र कितना है, उसमें लगने वाली निर्माण सामग्री किस दर्जे की है और अंदरूनी फिनिशिंग पर कितना ध्यान दिया जा रहा है।
चरणबद्ध निर्माण पर आने वाली लागत का पूरा ब्योरा
गया शहर में पिछले 17 वर्षों से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग का काम देख रहे वसीम रजा ने एक कट्ठा भूखंड पर बनने वाले दो मंजिला मकान के खर्च का विस्तृत खाका सामने रखा है। उनके आकलन के मुताबिक, फिनिशिंग का पूरा काम समेटते हुए ऐसे मकान को तैयार करने में लगभग 27 से 28 लाख रुपये का कुल खर्च बैठता है। निर्माण कार्य शुरू होते ही सबसे पहला और भारी खर्च जमीन के नीचे मजबूत नींव डालने पर होता है। शुरुआती खुदाई और फाउंडेशन तैयार करने के काम में करीब 5 लाख रुपये की लागत आती है। इसके बाद फाउंडेशन से लेकर प्लिंथ बीम के स्तर तक ढांचा खड़ा करने में 5 से 6 लाख रुपये की राशि लग जाती है।
प्लिंथ बीम से आगे बढ़ते हुए छत की ढलाई, दीवारों की ईंट जुड़ाई और पूरे ढांचे के प्लास्टर कार्य को पूरा करने में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की जरूरत पड़ती है। जब ग्राउंड फ्लोर का ढांचा व्यवस्थित रूप ले लेता है, तब पहले तल्ले के निर्माण का काम आगे बढ़ता है जिसमें 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आता है। निर्माण के अंतिम चरण में मकान को रहने लायक बनाने के लिए टाइल्स, पेंट, दरवाजे, खिड़कियां और सैनिटरी जैसे फिनिशिंग कार्यों में 5 से 7 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता है। इन सभी अलग-अलग चरणों की लागत को जोड़ने पर फ्रेम स्ट्रक्चर वाले जी+1 घर का कुल वित्तीय बजट लगभग 28 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
स्ट्रक्चरल मजबूती और तकनीकी सलाह का महत्व
मकान बनाते समय कई लोग शुरुआती लागत कम करने के चक्कर में पेशेवर इंजीनियर की फीस बचाने की कोशिश करते हैं, मगर आगे चलकर यह फैसला काफी भारी साबित हो सकता है। किसी भी भूखंड की जरूरत और भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए केवल एक योग्य इंजीनियर ही सही स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार कर सकता है। यदि मकान मालिक आगे चलकर दो या तीन अतिरिक्त मंजिलें खड़ी करने का विचार रखते हैं, तो शुरुआती दौर में ही नींव की गहराई और पिलर की मोटाई उसी भार वहन क्षमता के अनुसार तय की जानी चाहिए। खासकर ऐसी नई जमीन पर जहां पहले कभी कोई निर्माण नहीं हुआ हो, वहां मिट्टी की जांच कराना संरचनात्मक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी कदम होता है।
काम शुरू करने से पहले इन बातों की करें पड़ताल
यदि भूखंड की मिट्टी कमजोर या भुरभुरी पाई जाती है, तो वहां पारंपरिक सामान्य नींव मकान के भारी वजन को संभालने के लिए नाकाफी साबित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में इंजीनियर जमीन की वास्तविक क्षमता के अनुरूप विशेष फाउंडेशन का डिजाइन तैयार करता है। इसलिए भविष्य में ऊपरी मंजिलों के निर्माण की संभावना को देखते हुए पहली ईंट रखने से पहले ही संपूर्ण स्ट्रक्चरल ड्राइंग बनवा लेना बुद्धिमानी है। निर्माण स्थल पर काम शुरू करने से पूर्व जमीन की वास्तविक नापजोख, मिट्टी की स्थिति, नींव का प्रारूप, सड़क के मुकाबले प्लिंथ की पर्याप्त ऊंचाई, बारिश और गंदे पानी की समुचित निकासी व्यवस्था तथा स्थानीय भवन निर्माण नियमों की गहन जांच जरूर कर लेनी चाहिए।



















