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बिना प्रेशर कुकर के ऐसे बनाएं खिले-खिले चावल, अपनाएं दादी-नानी का यह पुराना नुस्खाजीवनशैली
23 अक्तू॰ 2026, 6:26 pm (6 दिन पहले)· 1

बिना प्रेशर कुकर के ऐसे बनाएं खिले-खिले चावल, अपनाएं दादी-नानी का यह पुराना नुस्खा

प्रेशर कुकर के बिना पतीले में चावल पकाने का पारंपरिक तरीका आज भी बेहद कारगर है। दादी चंद्रवती के बताए इस तरीके से चावल के दाने बिल्कुल अलग और खिले-खिले बनते हैं।

आज के दौर में अधिकांश घरों में चावल पकाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल सबसे आसान विकल्प बन गया है। इससे समय की बचत होती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है, लेकिन पानी का सही अनुपात न होने पर चावल या तो जरूरत से ज्यादा गल जाते हैं या फिर आपस में चिपक जाते हैं। इसके विपरीत, पुराने समय में रसोईघरों में पतीले या भगोने का उपयोग करके ही चावल बनाए जाते थे। इस पारंपरिक भारतीय तरीके से चावल का हर एक दाना बिल्कुल अलग और खिला-खिला तैयार होता था।

पुराने जमाने की पारंपरिक तैयारी

दादी चंद्रवती के अनुसार, पहले के समय में खुले बर्तनों में चावल पकाने का चलन आम था और यही सबसे सही तरीका माना जाता था। इस प्रक्रिया की शुरुआत चावल को अच्छी तरह साफ करने और उन्हें तीन से चार बार स्वच्छ पानी से धोने से होती थी। इसके बाद धुले हुए चावल को कुछ देर के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता था, जिससे वे बाद में पकते समय जल्दी और समान रूप से नरम हो जाएं।

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पकने की सही पहचान का तरीका

चंद्रवती बताती हैं कि खुले बर्तन में चावल के पकने की स्थिति का अंदाजा लगाना बहुत सीधा और आसान होता था। इसके लिए पतीले से एक या दो दाने बाहर निकालकर अपनी उंगलियों के बीच दबाकर जांचे जाते थे। यदि चावल का दाना आसानी से पूरी तरह दब जाए और अंदर से उसमें कोई कच्चापन महसूस न हो, तो यह इस बात का संकेत होता था कि चावल पककर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।

मांड निकालने और भाप देने की प्रक्रिया

चावल के पक जाने के बाद उसमें मौजूद अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का चरण आता है। पतीले को बेहद सावधानी के साथ पकड़कर उसका सारा फालतू पानी किसी अन्य बर्तन में अलग कर दिया जाता था। चावल से निकलने वाले इस अतिरिक्त पानी को मांड के रूप में जाना जाता है। खुले बर्तन में चावल उबालने का यह फायदा मिलता है कि अतिरिक्त पानी के साथ-साथ स्टार्च का एक हिस्सा भी आसानी से बाहर निकल जाता है।

दाने खिलाने का अंतिम चरण

मांड पूरी तरह अलग करने के बाद चावल के पतीले को तुरंत बंद करके नहीं रखा जाता था, बल्कि उसे एक से दो मिनट के लिए बिल्कुल धीमी आंच पर छोड़ दिया जाता था। ऐसा करने से चावल के भीतर मौजूद बची हुई अतिरिक्त नमी भाप बनकर पूरी तरह उड़ जाती है और दाने आपस में चिपकने के बजाय अच्छी तरह खिल जाते हैं। इसके बाद चूल्हा या गैस बंद करके पतीले को कुछ देर के लिए ढककर रख दिया जाता है।

क्यों खास है यह पारंपरिक तरीका

दादी चंद्रवती के मुताबिक, खुले पतीले में चावल पकाने में प्रेशर कुकर की तुलना में थोड़ा अधिक समय जरूर लगता है, लेकिन इसमें आप अपनी आंखों से चावल की स्थिति देखकर उसके पकने का सही अंदाजा लगा सकते हैं। यही वजह है कि पुराने लोग बिना किसी आधुनिक उपकरण के भी हमेशा खिले-खिले चावल तैयार कर लेते थे। आज के व्यस्त समय में लोग रफ्तार और सुविधा के कारण कुकर का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, लेकिन अगर कभी कुकर पास न हो या वह खराब हो जाए, तो पतीले में चावल पकाने की यह प्राचीन तकनीक बेहद काम आती है।

सवाल-जवाब

बिना कुकर के चावल पकाने के लिए सबसे पहले क्या करना चाहिए?
चावल को सबसे पहले अच्छी तरह साफ करके 3 से 4 बार पानी से धोना चाहिए और फिर कुछ देर भिगोकर रखना चाहिए।
खुले बर्तन में चावल पकने की पहचान कैसे की जाती है?
पतीले से एक-दो दाने निकालकर उंगलियों से दबाकर देखे जाते हैं कि वे अंदर से कच्चे हैं या नहीं।
चावल से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को क्या कहा जाता है?
चावल के इस अतिरिक्त पानी को मांड कहा जाता है।
मांड निकालने के बाद पतीले को कितनी देर धीमी आंच पर रखना चाहिए?
मांड निकालने के बाद पतीले को 1 से 2 मिनट तक बिल्कुल धीमी आंच पर रखा जाता है।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·5 दिन पहले

दादी का यह तरीका वाकई बढ़िया है। कुकर में कई बार चावल हलवा बन जाते हैं, पर पतीले में पकाओ तो एक-एक दाना अलग और खिला-खिला बनता है। समय जरूर थोड़ा ज्यादा लगता है, पर स्वाद और टेक्सचर एकदम सही आता है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·5 दिन पहले

मुझे नानी के हाथ के खुले पतीले वाले खिले-खिले चावल आज भी याद हैं। कुकर की जल्दी में वो मज़ा और स्वाद दोनों ही खो जाते हैं, इसलिए मैं भी अब फुर्सत में ऐसे ही बनाती हूँ।

Neha Verma@neha-verma·5 दिन पहले

न्यारा, तुम्हारी बात ठीक है पर सच कहूँ तो भगोने में पानी का अंदाज़ लगाना मेरे लिए हमेशा आफत बन जाता है, कुकर में कम से कम टेंशन तो नहीं रहती।

Meera Joshi@meera-joshi·5 दिन पहले

दादी के हाथ के खुले चावल की खुशबू आज भी याद है, कुकर की जल्दीबाज़ी में वो मज़ा कहाँ जो खुले पतीले की धीमी आँच और मांड निकालने में था।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·5 दिन पहले

मीरा जी, बिल्कुल सही कहा आपने! मुझे अपनी नानी के घर का वह पतीला और खुले चावल का स्वाद आज भी याद है।

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