रसोई में खाना बनाते वक्त कई बार चावल पूरी तरह गलकर हलवे जैसे चिपचिपे बन जाते हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि ऐसा केवल चावल की खराब क्वालिटी के कारण होता है, जबकि सच्चाई यह है कि पकाने के दौरान होने वाली छोटी-छोटी चूक इसका असली कारण होती हैं। सही विधि, उचित माप और सही तापमान का तालमेल बिठाकर किसी भी किस्म के चावल को एकदम खिला-खिला और अलग-अलग दानों वाला बनाया जा सकता है।
चावल की सही किस्म का चुनाव करना जरूरी
बाजार में मिलने वाले हर चावल का स्वभाव, उसमें मौजूद स्टार्च की मात्रा और पकने का समय अलग होता है। उदाहरण के तौर पर, बासमती चावल लंबे दानों वाला होता है और पकने के बाद स्वाभाविक रूप से कम चिपकता है, जबकि कई स्थानीय या छोटे दानों वाली किस्मों में स्टार्च अधिक होता है। यदि आपकी प्राथमिकता दानेदार और खिले हुए चावल बनाना है, तो कम स्टार्च वाले या अच्छी गुणवत्ता वाले बासमती चावल का चयन करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
स्टार्च हटाने के लिए सही तरीके से धोना
चावल के दानों की बाहरी सतह पर काफी मात्रा में सूखा स्टार्च चिपका होता है। यदि चावल को बिना ठीक से धोए सीधे उबलने के लिए रख दिया जाए, तो वही स्टार्च पानी में घुलकर दानों को आपस में चिपका देता है। इस समस्या से बचने के लिए चावल को हमेशा हल्के हाथों से 2 से 3 बार साफ पानी से तब तक धोना चाहिए, जब तक कि निकलने वाला पानी मटमैला दिखना बंद होकर काफी हद तक साफ न हो जाए। इससे अतिरिक्त स्टार्च बाहर निकल जाता है और चावल का चिपचिपापन खत्म हो जाता है।
पकाने से पहले भिगोने का सही समय
धोने के बाद चावल को पकाने से ठीक पहले 20 से 30 मिनट के लिए सामान्य पानी में भिगोकर रखना चाहिए। भिगोने से दाने अंदर तक पर्याप्त नमी सोख लेते हैं, जिससे पकते समय वे एक समान रूप से फूलते हैं। इससे न केवल कुकिंग का समय काफी घट जाता है, बल्कि तेज आंच पर दानों के बीच से टूटने या बिखरने का खतरा भी खत्म हो जाता है और उनका आकार एकदम सही बना रहता है।
पानी और चावल का सटीक अनुपात
चावल के ज्यादा गलने और गीले होने का सबसे प्रमुख कारण बर्तन में जरूरत से ज्यादा पानी डालना होता है। एक सामान्य और संतुलित नियम के अनुसार, 1 कप बासमती चावल पकाने के लिए 1.5 से 2 कप पानी पूरी तरह पर्याप्त होता है। अलग-अलग किस्मों या नई-पुरानी फसलों के आधार पर पानी की इस जरूरत में थोड़ा अंतर आ सकता है, इसलिए पैकेजिंग पर दिए गए निर्देशों को भी ध्यान में रखना समझदारी होती है।
आंच का नियंत्रण और चम्मच चलाने से परहेज
पकाते समय तापमान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। शुरुआत में पानी में उबाल आने तक आंच को तेज रखना चाहिए, लेकिन जैसे ही पानी उबलने लगे, गैस को तुरंत धीमा कर दें और बर्तन को ढक्कन से अच्छी तरह ढक दें। धीमी आंच पर भाप के दबाव से दाने भीतर तक समान रूप से पकते हैं। इसके अलावा, पकते समय बर्तन में बार-बार करछुल या चम्मच बिल्कुल न चलाएं, क्योंकि बार-बार हिलाने से नाजुक दाने टूट जाते हैं और उनसे दोबारा स्टार्च निकलकर पूरे बर्तन को लसदार बना देता है।
गैस बंद करने के बाद का जरूरी आराम
चावल का पानी सूख जाने और गैस बंद कर देने के तुरंत बाद उन्हें परोसने की जल्दबाजी न करें। बर्तन को 5 से 10 मिनट तक ढका ही रहने दें ताकि अंदर बची हुई भाप में दाने पूरी तरह सेट हो जाएं। इसके बाद किसी कांटेदार चम्मच यानी फोर्क की मदद से हल्के हाथों से दानों को ऊपर-नीचे करते हुए अलग करें। इस अंतिम प्रक्रिया से चावल के दाने आपस में जुड़े बिना एकदम खिले-खिले और फूले हुए नजर आते हैं।


















