गणेश उत्सव के दौरान घरों और पंडालों में भगवान गणेश को मोदक का भोग अर्पित करने की प्रथा बेहद लोकप्रिय है। हालांकि, महाराष्ट्र की समृद्ध पाक परंपरा में ऐसे कई प्रामाणिक पकवान शामिल हैं, जिन्हें त्योहारों के अवसर पर विशेष रूप से तैयार किया जाता है। यदि इस बार पूजा की थाली में मोदक के अतिरिक्त कुछ नया और पारंपरिक शामिल करने की योजना है, तो महाराष्ट्र के इन 8 प्रसिद्ध व्यंजनों को प्रसाद के रूप में आसानी से बनाया जा सकता है।
पुरन पोली और श्रीखंड की मिठास
पुरन पोली महाराष्ट्र का एक बेहद प्रतिष्ठित मीठा व्यंजन है, जिसे विशेष अवसरों और पर्वों पर प्रसाद की थाली में प्रमुखता से सजाया जाता है। इसे पकाने के लिए चने की दाल और गुड़ का मीठा मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसमें सुगंध के लिए इलायची मिलाई जाती है और फिर इसे आटे की लोई में भरकर बेला व सेका जाता है। दूसरी तरफ, गाढ़े दही के चक्के से तैयार होने वाला श्रीखंड अपने लाजवाब स्वाद के लिए जाना जाता है। इसमें चीनी, इलायची और केसर का महीन मिश्रण मिलाकर इसे अच्छी तरह फेंटा जाता है, जिसके बाद इसे बादाम और पिस्ता की कतरन से सजाकर ठंडा परोसा जाता है।
बासुंदी और करंजी का पारंपरिक स्वाद
दूध से बनने वाले मिष्ठानों में बासुंदी का स्थान काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इसे बनाने के लिए दूध को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि वह गाढ़ा न हो जाए, फिर उसमें चीनी, केसर के धागे और पिसी हुई इलायची का स्वाद घोला जाता है। इसके अलावा करंजी एक पारंपरिक पेस्ट्री शैली का पकवान है, जिसकी बाहरी परत बेहद कुरकुरी होती है। इसके भीतर नारियल और गुड़ का मीठा मिश्रण भरा जाता है, जिसे त्योहारों के दौरान महाराष्ट्र के परिवारों में विशेष चाव से तैयार किया जाता है।
चावल से बनने वाले दो अनोखे व्यंजन
चावल से तैयार होने वाले पारंपरिक पकवानों में मसाला भात और नारली भात प्रमुख हैं। मसाला भात को चावल और चुनिंदा पारंपरिक मसालों के अनोखे मेल से पकाया जाता है, जो उत्सव के भोज का एक जरूरी हिस्सा बनता है। वहीं दूसरी ओर, नारली भात नारियल वाले मीठे चावल की एक खास रेसिपी है, जिसे पारंपरिक रूप से नारली पूर्णिमा जैसे खास मौकों पर पकाने की परंपरा है। चावल, कद्दूकस किए हुए नारियल और गुड़ के मेल से बनने वाला यह मीठा भात भोग के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है।
थालीपीठ और साबूदाना का नमकीन विकल्प
फलाहार और नमकीन व्यंजनों में साबूदाने से बनी डिश महाराष्ट्र में बेहद लोकप्रिय मानी जाती है। साबूदाना, भुनी मूंगफली, आलू और बारीक कटी हरी मिर्च के साथ तैयार यह स्वादिष्ट व्यंजन व्रत और उपवास के नियमों के अनुकूल रहता है। इसके साथ ही, थालीपीठ एक पारंपरिक चपटी रोटी है, जिसे कई अलग-अलग प्रकार के अनाजों के मिश्रित आटे से तैयार किया जाता है। पूजा और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए इस पौष्टिक थालीपीठ को बिना प्याज और लहसुन के भी बेहद सरलता से बनाया जा सकता है।


















