गर्मी के मौसम में जब छत पर तीखी धूप पड़ने लगती है, तो अधिकांश लोगों को लगता है कि ऐसे खुले वातावरण में कोई भी हरियाली बचा पाना नामुमकिन है। खासकर दिल्ली जैसे महानगरों में, जहां तापमान बहुत ऊपर चला जाता है, टेरेस गार्डनिंग को एक मुश्किल चुनौती माना जाता है। हालांकि हकीकत इससे अलग है। अगर वातावरण के अनुकूल किस्मों का सही तालमेल बिठाया जाए, तो बेहद कम पानी की खपत में भी कड़कती धूप के बीच शानदार बगीचा लहलहा सकता है। इतना ही नहीं, यह हरा-भरा कोना शहरी कंक्रीट के बीच तितलियों और नन्हे पक्षियों के लिए एक सुरक्षित बसेरा भी बन जाता है।
शहरी माहौल में छत को एक मिनी जंगल का रूप देने की कोशिश कर रहे अमन पिछले कई सालों से इस तरह के प्रयोग कर रहे हैं। उनके अपने टेरेस गार्डन में पौधों का ऐसा समृद्ध संसार है, जहां दिनभर तरह-तरह की तितलियां और परिंदे डेरा जमाए रहते हैं। अमन बताते हैं कि दिल्ली के भीषण तापमान और तीखी धूप को ध्यान में रखते हुए केवल वही पौधे चुने जाने चाहिए जो इस कठोर मौसम का डटकर मुकाबला कर सकें। उनका मानना है कि सभी पौधों की प्रकृति और जरूरतें बिल्कुल भिन्न होती हैं, इसलिए सबको एक ही ढर्रे पर सींचना या संभालना ठीक नहीं होता।
तेज धूप में रंग बिखेरने वाला बोगनविलिया
खुली छत के लिए अमन सबसे पहला और बेहतरीन विकल्प बोगनविलिया को मानते हैं। यह बेलदार पौधा प्रचंड गर्मी और तपती धूप को बिना मुरझाए झेलने की अनोखी क्षमता रखता है। उनके पूरे बगीचे में बोगनविलिया की बेलें बड़े करीने से फैली हुई हैं। जब इस पर रंग-बिरंगे फूल आते हैं, तो यह नजारा पक्षियों और तितलियों को अपनी ओर खींच लाता है। जिन घरों की छतों पर सुबह से शाम तक सीधी धूप रहती है और छांव की कोई व्यवस्था नहीं होती, वहां बोगनविलिया लगाना सबसे सुरक्षित और टिकाऊ फैसला साबित होता है।
टेकोमा के आकर्षक नारंगी और पीले फूल
कम नमी और तेज रोशनी में पनपने वाला दूसरा प्रमुख पौधा टेकोमा है। इस पौधे की टहनियों पर खिलने वाले चटक पीले और नारंगी फूल पूरे परिवेश को एक जीवंत रंगत दे देते हैं। अमन के अनुसार टेकोमा की बाजार में कई आकर्षक किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें गमलों या क्यारियों में बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। इस पौधे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बार-बार सींचने की दरकार नहीं होती। अपने बगीचे में उन्होंने बोगनविलिया और टेकोमा को एक साथ सजाया है, जिससे दोनों का संयुक्त प्रभाव छत को एक प्राकृतिक बगीचे का रूप देता है।
गर्मी में ठंडक का अहसास कराता प्लंबागो
अक्सर गर्मियों के चरम पर ज्यादातर मौसमी पौधों से फूल गायब हो जाते हैं, लेकिन प्लंबागो ऐसे ही मुश्किल दौर में अपनी छटा बिखेरता है। इसके नीले और हल्के बैंगनी रंग के फूल आंखों को बेहद सुकून देते हैं। प्लंबागो को भी जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ती। दिल्ली की शुष्क और तपती हवाओं के बीच यह पौधा टेरेस गार्डन को एक अलग तरह की रंगीन पहचान देने में पूरी तरह सक्षम है।
कम देखभाल में चलने वाला मजबूत जेट्रोफा
जेट्रोफा उन चुनिंदा झाड़ीदार पौधों में आता है जो पानी की भारी कमी को भी सरलता से बर्दाश्त कर लेते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास रोज-रोज पानी देने या देखभाल करने का पर्याप्त समय नहीं रहता, तो जेट्रोफा उसके लिए आदर्श विकल्प है। यह पौधा कम संसाधनों में भी अपनी पत्तियां हरी रखता है और छत पर हरियाली का दायरा बनाए रखने में मदद करता है।
गुच्छेदार फूलों वाला इक्सोरा
अमन का सबसे पसंदीदा पौधा इक्सोरा है, जिसकी शाखाओं पर घने गुच्छों के रूप में सुंदर फूल खिलते हैं। वैसे तो यह वनस्पति मूल रूप से दक्षिण भारत की जलवायु में बहुत तेजी से पनपती है, लेकिन थोड़ा ध्यान दिया जाए तो इसे दिल्ली के मौसम में भी सफलतापूर्वक बड़ा किया जा सकता है। बाकी हार्डी किस्मों की तुलना में इक्सोरा को नियमित नमी और थोड़ी अतिरिक्त देखरेख की आवश्यकता जरूर होती है, लेकिन इसके आकर्षक गुच्छे मेहनत का पूरा फल दे देते हैं।
बच्चों की तरह समझें पौधों का स्वभाव
अमन का कहना है कि किसी भी इंसान को अपने गार्डन के पौधों को नन्हे बच्चों की तरह समझना चाहिए। जिस प्रकार हर बच्चे की शारीरिक और मानसिक जरूरतें अलग होती हैं, ठीक उसी तरह हर पौधे का मिजाज भी जुदा होता है। किसी को दिनभर की कड़ी धूप भाती है, तो कोई हल्की छांव में पनपता है। किसी किस्म को बहुत कम पानी से ही तृप्ति मिल जाती है, जबकि किसी को नियमित सींचना पड़ता है। पौधों के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर जैविक खाद और वर्मीकंपोस्ट डालते रहना चाहिए, ताकि गमलों की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी न हो।


















