देश की राजधानी दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर के बाहर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग ज्योतिषी अपनी साधारण सी व्यवस्था के साथ बैठते हैं। पहली नजर में उन्हें देखकर किसी को भी ऐसा लग सकता है कि दिन भर में वे शायद 100 रुपये भी मुश्किल से जुटा पाते होंगे, मगर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बेहद सादे लिबास और पारंपरिक अंदाज में दिखने वाले यह ज्योतिषी सालाना 8 से 10 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। इतनी आमदनी आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत कॉरपोरेट अधिकारी या पेशेवर इंजीनियर को मिलती है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी इसी कमाई के बूते दिल्ली के एक बेहद पॉश रिहायशी इलाके में अपना निजी मकान भी बना रखा है।
राजस्थान से दिल्ली तक का सफर और पांच दशकों की साधना
इस ज्योतिषी का नाम पंडित विशंभर दयाल शर्मा है, जिनकी वर्तमान आयु 75 वर्ष हो चुकी है। वे मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं और उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा राजस्थान में ही पूरी की, जहां उन्होंने संस्कृत और हिंदी साहित्य की विधिवत पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ज्योतिष विद्या का गहरा अध्ययन किया और इस पारंपरिक ज्ञान में महारत हासिल की। पंडित विशंभर दयाल शर्मा पिछले 50 वर्षों से लगातार दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के निकट अपनी छोटी सी जगह में बैठकर लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आधी सदी के इस लंबे अरसे में उन्होंने अनगिनत लोगों की तकदीर और उनके जीवन के उतार-चढ़ाव को देखा और समझा है।
हाथ की रेखाएं, जन्म कुंडली और जीवन की उलझनें
पंडित विशंभर दयाल शर्मा का मुख्य कार्य लोगों की जन्म कुंडली का बारीकी से अध्ययन करना और उनके हाथों की लकीरें देखकर भूत, भविष्य और वर्तमान की परिस्थितियों की जानकारी देना है। उनके पास आने वाले लोग जीवन के अलग-अलग मोर्चों पर समस्याओं से घिरे होते हैं। कई बार ऐसे दंपति पहुंचते हैं जिनके बीच अलगाव या तलाक की नौबत आ चुकी होती है, लेकिन वे रिश्ते को बचाना चाहते हैं। ऐसे मामलों में वे विशेष उपाय बताकर टूटने की कगार पर पहुंचे विवाह को बचाने की कोशिश करते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी आते हैं जो लंबे समय से कानूनी या पारिवारिक उलझनों के कारण तलाक चाहते हैं लेकिन मामला अटक जाता है, तो वे भी समाधान के लिए इनसे संपर्क करते हैं।
विवाह संस्कार से लेकर यूपीएससी और करियर से जुड़ी समस्याएं
पंडित विशंभर दयाल शर्मा केवल भविष्य बताने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह संस्कार भी संपन्न कराते हैं, जहां से उन्हें यजमानों से अच्छी दक्षिणा प्राप्त होती है। शादीशुदा जीवन में रोजमर्रा के झगड़ों और कलह से परेशान लोग भी उनके पास शांति और समाधान की तलाश में पहुंचते हैं। इसके अलावा युवा पीढ़ी भी बड़ी संख्या में इनके पास परामर्श लेने आती है। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी, जिनका चयन नहीं हो पा रहा होता, वे भी सफलता के ज्योतिषीय उपाय पूछने आते हैं। साथ ही नौकरीपेशा लोग, जो अपने करियर या काम के माहौल से नाखुश हैं और पदोन्नति की संभावना तलाश रहे हैं, वे अपनी तरक्की के रास्ते खोलने के उपाय जानने के लिए इनके पास बैठते हैं।
हल्दी गांठ की विशेष पूजा क्यों है सबसे ज्यादा मशहूर
पंडित विशंभर दयाल शर्मा के पास समस्याओं के निवारण के लिए एक विशेष अनुष्ठान है, जिसे हल्दी गांठ की पूजा कहा जाता है। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। पंडित शर्मा के अनुसार यह पूजा उन युवक-युवतियों के लिए विशेष रूप से करवाई जाती है जिनके विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों या रिश्ते तय न हो पा रहे हों। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को अपने गुप्त या प्रत्यक्ष शत्रुओं से लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा हो, तो शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए भी यह अनुष्ठान किया जाता है। यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तलाक की नौबत आ गई हो और दोनों आपसी रजामंदी से दोबारा प्रेमपूर्वक साथ रहना चाहते हों, तो उनके बीच आपसी प्रेम संबंधों को मजबूत करने के लिए भी हल्दी गांठ की यह पूजा करवाई जाती है।
महज 200 रुपये की फीस और 10 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पंडित विशंभर दयाल शर्मा का शुल्क मॉडल बेहद सामान्य है। वे किसी भी व्यक्ति से परामर्श देने और कुंडली देखने के लिए सिर्फ 200 रुपये की अपॉइंटमेंट फीस लेते हैं। कोई भी सामान्य नागरिक केवल 200 रुपये देकर उनसे मिलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकता है। हालांकि, पूरे साल भर नियमित परामर्श, कुंडली विश्लेषण और विवाह संस्कार आदि कराने से मिलने वाली दक्षिणा को मिलाकर उनकी कुल वार्षिक कमाई 8 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। आज के दौर में जहां कई उच्च शिक्षित अफसर या निजी कंपनियों के इंजीनियर भी इस स्तर का पैकेज पाने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं एक साधारण पेड़ के नीचे बैठकर पंडित शर्मा अपनी पारंपरिक विद्या के दम पर यह मुकाम हासिल किए हुए हैं।
















