वैश्विक मुद्रा बाजारों में ब्रिटिश पाउंड ने जापानी येन के मुकाबले अपनी बढ़त दर्ज की है, जिसके पीछे ब्रिटेन के ताज़ा आर्थिक आंकड़े मुख्य वजह बने हैं। इन आंकड़ों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्टर्लिंग को मजबूत आधार दिया है। ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की बढ़ती संभावनाओं ने मुद्रा को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान के नीति निर्माताओं की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत मिलने के बावजूद जापानी येन को कोई खास राहत नहीं मिल सकी है, क्योंकि जापान की अर्थव्यवस्था से जुड़ी ढांचागत चुनौतियां उस पर लगातार दबाव बना रही हैं।
ब्रिटेन की विकास दर और उत्पादन में उम्मीद से बेहतर सुधार
ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अगस्त महीने के दौरान 0.1% की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के उस अनुमान से कहीं बेहतर रहा जिसमें 0.1% संकुचन की आशंका जताई जा रही थी। इससे पहले जुलाई के महीने में देश की आर्थिक वृद्धि दर 0.4% रही थी। आर्थिक गतिविधियों में यह निरंतरता इस बात का संकेत दे रही है कि मंदी की आशंकाओं के विपरीत ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लचीलापन दिखा रही है।
केवल जीडीपी ही नहीं, बल्कि उत्पादन क्षेत्र से आए आंकड़ों ने भी विश्लेषकों को चौंकाया है। देश के औद्योगिक उत्पादन में 0.8% का उछाल दर्ज किया गया, जबकि विनिर्माण उत्पादन 1.2% की दर से बढ़ा। दोनों ही आंकड़े बाजार के पूर्व अनुमानों से काफी आगे निकल गए। विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों में इस तेजी से संकेत मिलता है कि कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में मांग की स्थिति बेहतर बनी हुई है, जिससे समग्र आर्थिक सुधार को रफ्तार मिल रही है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की दर वृद्धि की संभावनाएं और महंगाई का परिदृश्य
अर्थव्यवस्था के इन मजबूत आंकड़ों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता खोल दिया है। देश में महंगाई उम्मीद के मुकाबले ज्यादा जिद्दी साबित हो रही है और तय लक्ष्यों से ऊपर बनी हुई है। मौद्रिक नीति समिति द्वारा अब तक दरों को अपरिवर्तित रखने के बाद अब इस बात की संभावना काफी बढ़ गई है कि केंद्रीय बैंक इसी वर्ष उधार लागत में वृद्धि कर सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि आर्थिक गतिविधियां इसी तरह मजबूत रहीं तो बैंक ऑफ इंग्लैंड को महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाने ही होंगे।
गुरुवार को प्रकाशित एक रॉयटर्स पोल के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 63 में से 54 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नवंबर में केंद्रीय बैंक 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर नीतिगत दर को 4.00% पर पहुंचा सकता है। मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक अनुमानों में भी तेजी देखी गई है। ताज़ा अनुमानों के तहत, 2026 की चौथी तिमाही में महंगाई दर औसतन 3.6% रहने का अनुमान है, जो सितंबर के 3.3% के अनुमान से अधिक है। इसी तरह, 2027 की पहली तिमाही के लिए महंगाई अनुमान को 3.2% से बढ़ाकर 3.8% और पूरे 2027 के लिए इसे 2.5% से बढ़ाकर 3.0% कर दिया गया है। महंगाई के ये ऊंचे अनुमान स्पष्ट करते हैं कि आने वाले वर्षों में भी मूल्य वृद्धि का दबाव बना रहेगा।
बैंक ऑफ जापान की सख्त टिप्पणियां और येन की ढांचागत कमजोरी
जापान की तरफ से मौद्रिक नीति को सख्त करने के संकेत लगातार मिल रहे हैं, लेकिन इसका जापानी येन (JPY) पर बहुत सीमित असर देखा जा रहा है। जापान में अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ब्याज दरें काफी निचले स्तर पर बनी हुई हैं, साथ ही देश पर सरकारी कर्ज का भारी बोझ है। इन ढांचागत बाधाओं के चलते वैश्विक निवेशक येन में बड़ी तेजी को लेकर संशय में हैं। बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक और बयानों से जो सहारा मुद्रा को मिलना चाहिए था, वह इन गहरी आर्थिक समस्याओं के कारण बेअसर साबित हो रहा है।
नीतिगत रुख को स्पष्ट करते हुए कोएदा ने कहा कि केंद्रीय बैंक को “आर्थिक और मूल्य स्थितियों पर विचार करते हुए अनुमानित तटस्थ दर के दायरे को ध्यान में रखकर नीतिगत दर को समय पर समायोजित करना चाहिए।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नीति निर्माताओं का ध्यान येन के मूल्यह्रास से पैदा होने वाले मूल्य जोखिमों और वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मजबूत मांग पर केंद्रित है। इसके अलावा मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति के प्रभावों पर भी बैंक की पैनी नजर बनी हुई है। इन तमाम कारकों के बावजूद बाजार में येन को लेकर सतर्कता का माहौल है।
मुद्रा बाजारों का व्यापक रुख और डॉलर की चाल
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ब्रिटिश पाउंड (GBP) प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में देखा गया, जहां ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले स्टर्लिंग ने सबसे ज्यादा मजबूती हासिल की। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई रोजगार के कमजोर आंकड़ों के कारण AUD/USD जोड़ी दबाव में रही और गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान 0.6950 के करीब आ गई। इस गिरावट ने मुद्रा को अपने मासिक उच्च स्तर से नीचे धकेलते हुए एक नए साप्ताहिक निचले स्तर पर ला खड़ा किया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को बुधवार के उच्च स्तर से नीचे खींचा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में बड़ी गिरावट सीमित रही।
इसी तरह, USD/JPY जोड़ी ने भी अपने तीन सप्ताह के उच्च स्तर से शुरू हुई गिरावट को आगे बढ़ाया। गुरुवार के एशियाई कारोबार में बिकवाली के चलते यह जोड़ी फिसलकर 158.00 के नीचे आ गई। बाजार के कारोबारी इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी गिरते येन को सहारा देने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। दूसरी ओर, चीन द्वारा बॉन्ड खरीद की चर्चाओं के चलते अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में गिरावट आई, जिससे बुधवार को जारी गर्म सीपीआई आंकड़ों के दम पर अप्रैल 2025 के उच्च स्तर पर पहुंचे अमेरिकी डॉलर को अपनी बढ़त गंवानी पड़ी और जोड़ी पर नीचे की ओर दबाव बढ़ गया।
सोना, क्रिप्टोकरेंसी और ब्रिटेन के बजट का माहौल
कमोडिटी बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में ताजा लिवाली देखने को मिली। वैश्विक शेयर बाजारों में एआई से जुड़े निवेशों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आई कमजोरी ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज गिरावट पैदा कर दी। इससे अमेरिकी डॉलर अपने साल के उच्चतम स्तर से नीचे आ गया। इस दौरान XAU/USD लगभग $4,155 पर कारोबार करता दिखा, जिसमें दिन के दौरान 1.21% की बढ़त दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी से सीधा लाभ मिला।
डिजिटल एसेट बाजार की बात करें तो क्रिप्टोक्वांट के अनुसार, बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना, बीएनबी और एक्सआरपी को लेकर विश्लेषकों का रुख जुलाई से ही तेजी का बना हुआ है। शीर्ष पांच क्रिप्टोकरेंसी ने 2022-2023 के बाजार चक्र की तुलना में इस बार काफी तेजी से और अधिक मजबूती के साथ रिकवरी दिखाई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
ब्रिटेन के घरेलू मोर्चे पर चांसलर द्वारा अपना पहला बजट पेश करने में अब 2 सप्ताह से भी कम समय बचा हुआ है। आमतौर पर ब्रिटेन के बजट से पहले की स्थिति अनिश्चितता भरी होती है, लेकिन इस बार आर्थिक और वित्तीय पृष्ठभूमि काफी सकारात्मक नजर आ रही है। यूके बॉन्ड बाजार में हाल के दिनों में तेजी आई है, एफटीएसई 100 इस सप्ताह प्रमुख शेयर सूचकांकों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बना हुआ है, और ब्रिटिश पाउंड भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता हासिल कर चुका है। यह अनुकूल माहौल आगामी वित्तीय घोषणाओं से पहले ब्रिटिश परिसंपत्तियों को सहारा दे रहा है।



















