त्योहारी सीजन में डांडिया और गरबा की तैयारियों के बीच पोशाक का चुनाव हमेशा चर्चा का विषय रहता है. हर साल ज्यादातर युवतियां पारंपरिक चनिया-चोली या भारी लहंगे को अपनी पहली प्राथमिकता बनाती हैं. उत्सव के इस माहौल में अगर आप पारंपरिक मर्यादा बनाए रखते हुए भीड़ से बिल्कुल जुदा नजर आना चाहती हैं, तो दक्षिण भारतीय हाफ साड़ी यानी लांगा वोनी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है. अभिनेत्री कंगना रनौत के एथनिक पहनावे से प्रेरणा लेकर इस बार के उत्सव में अपनी उपस्थिति को यादगार बनाया जा सकता है.
दक्षिण भारतीय परिधान लांगा वोनी की बनावट और पहचान
लांगा वोनी मूल रूप से दक्षिण भारत के समृद्ध पहनावे का हिस्सा है, जिसे आम बोलचाल में हाफ साड़ी भी कहा जाता है. इस पोशाक में तीन मुख्य हिस्से शामिल होते हैं, जिनमें एक घेरदार लंबी स्कर्ट, एक सिला हुआ ब्लाउज और साड़ी के पल्लू की तरह लपेटा जाने वाला लंबा दुपट्टा होता है. क्षेत्रीय भाषा में स्कर्ट को लांगा और कंधे से लपेटे जाने वाले कपड़े को वोनी कहा जाता है. दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में युवतियां और किशोरियां इसे त्योहारों, मांगलिक प्रसंगों तथा पारिवारिक समारोहों में बहुत गर्व से पहनती हैं. समय के साथ इसमें तरह-तरह के फैब्रिक, चटक रंगों और बारीकी से की गई कढ़ाई का खूबसूरत प्रयोग होने लगा है.
रंगों का खूबसूरत कंट्रास्ट और जरी की नक्काशी
पारंपरिक पहनावे की असली जान उसके रंगों के तालमेल में छिपी होती है. कंगना रनौत के इस दक्षिण भारतीय अंदाज में भी रंगों का अनूठा सामंजस्य देखने को मिलता है. इस शैली में सुनहरे या हल्के क्रीम शेड की प्लीटेड स्कर्ट के साथ सुर्ख लाल रंग का ब्लाउज और गहरे हरे रंग की वोनी का संयोजन बेहद आकर्षक दिखाई देता है. स्कर्ट के निचले हिस्से पर बना चौड़ा बॉर्डर और उस पर की गई पारंपरिक जरी की कारीगरी पूरे परिधान को राजसी ठाठ देती है. वहीं चटक और विपरीत रंगों का दुपट्टा उत्सव के उत्साह को बखूबी दर्शाता है. डांडिया के मौके पर ऐसा रंग संयोजन हर किसी का ध्यान खींचने में सक्षम है.
डांडिया और गरबा के लिए पहनते समय जरूरी सावधानियां
उत्सव की रात में डांडिया खेलते समय इस पोशाक को चुनते हुए कुछ व्यावहारिक बातों का ध्यान रखना आवश्यक है. स्कर्ट का घेराव इतना पर्याप्त होना चाहिए कि तेजी से घूमते और थिरकते समय पैरों की गति में किसी तरह की रुकावट न आए. इसके साथ ही ब्लाउज का कपड़ा और सिलाई आरामदायक होनी चाहिए, जिससे घंटों तक थकावट महसूस न हो. वोनी या दुपट्टे को कमर और कंधे पर इस तरह सुरक्षित पिन किया जाना चाहिए कि नृत्य की तेज गति के बीच उसे बार-बार संभालना न पड़े और दोनों हाथ डांडिया खेलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहें.
गहने, बाल और मेकअप का सही तालमेल
इस दक्षिण भारतीय परिधान की भव्यता को निखारने के लिए सही एक्सेसरीज का होना बेहद जरूरी है. अगर पोशाक पर जरी और गोटे का काम पहले से काफी भारी है, तो आभूषणों को संतुलित रखना चाहिए ताकि लुक अत्यधिक भरा हुआ न दिखे. इसके साथ सुनहरे झुमके, पारंपरिक चोकर या क्लासिक मंदिर ज्वेलरी खूब जंचती है. बालों को जूड़े में बांधकर ताजा मोगरे का गजरा लगाना इस पूरे रूप को दक्षिण भारतीय परंपरा की पूर्णता देता है. मेकअप के लिए हल्का बेस, आंखों में गहरा काजल और चेहरे से मेल खाती लिपस्टिक पर्याप्त रहती है. पैरों में ऐसे आरामदायक सैंडल या पारंपरिक जूतियां पहनें, जिनमें फर्श पर लगातार थिरकना और घूमना बेहद सहज बना रहे.



















