सहारनपुर की पहचान देश और दुनिया में लकड़ी पर बारीक नक्काशी और बेहतरीन काष्ठ कला के प्रमुख केंद्र के रूप में है। यहां के कारीगर विभिन्न प्रकार की कीमती और टिकाऊ इमारती लकड़ियों पर तराशी करके ऐसा फर्नीचर तैयार करते हैं जो पीढ़ियों तक अपनी खूबसूरती बनाए रखता है। जब भी घर या दफ्तर के लिए नए फर्नीचर की योजना बनती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि कौन सी लकड़ी चमक, मजबूती और उम्र के पैमाने पर सबसे खरी उतरेगी। अक्सर लोग गलत लकड़ी का चुनाव कर लेते हैं, जिससे कुछ ही वर्षों में दीमक, नमी या मौसम के असर से ढांचा खराब होने लगता है। लंबे समय तक बेदाग चमक और मजबूती बरकरार रखने के लिए चार प्रमुख लकड़ियां सबसे आगे मानी जाती हैं, जिनमें आबनूस, महोगनी, शीशम और सागौन शामिल हैं।
आबनूस: अत्यधिक घनत्व और शीशे जैसी चमक वाली बेशकीमती लकड़ी
काष्ठ निर्माता और निर्यातक अनस इमाम के अनुसार आबनूस अपनी अत्यधिक सघनता, गहरे काले रंग और असाधारण मजबूती के चलते दुनिया भर में मशहूर है। यह दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों की श्रेणी में गिनी जाती है। इसकी सघनता और भार इतना अधिक होता है कि यह पानी में तैरने के बजाय सीधे डूब जाती है। आबनूस का अंदरूनी हिस्सा गहरा काला या गहरा भूरा नजर आता है। अपनी बेजोड़ कठोरता के कारण इस पर सामान्य तौर पर कोई खरोंच या डेंट नहीं पड़ता। कारीगर जब इस पर पॉलिश का काम पूरा करते हैं, तो इसकी बाहरी सतह बिल्कुल शीशे जैसी चमकदार और चिकनी दिखाई देने लगती है। प्रीमियम और विशिष्ट फर्नीचर के शौकीनों के लिए यह बेहतरीन मानी जाती है।
महोगनी: जल प्रतिरोधी क्षमता और बारीक नक्काशी के लिए मुफीद
महोगनी की लकड़ी अपने खूबसूरत लाल-भूरे रंग, मजबूती और पानी से बचाव के कुदरती गुणों के लिए जानी जाती है। इसका रंग हल्के गुलाबी-भूरे से शुरू होकर गहरे लाल-भूरे रंग तक का हो सकता है। समय बीतने के साथ यह रंग और भी गहरा तथा अधिक आकर्षक रूप ले लेता है। इसमें अपनी एक स्वाभाविक चमक भी पाई जाती है। सड़न, नमी, दीमक और अन्य नुकसानदेह कीड़ों के हमले से यह स्वाभाविक रूप से सुरक्षित बनी रहती है। महोगनी के रेशे बहुत सीधे और एकसमान होते हैं, जिसके कारण इस पर बेहद बारीक और नफीस नक्काशी का काम आसानी से किया जा सकता है। बदलते मौसम के तापमान या आर्द्रता में यह लकड़ी सिकुड़ती या मुड़ती नहीं है, जिससे इससे तैयार सामान का मूल आकार वर्षों तक स्थिर रहता है।
शीशम: भारतीय घरों की पहली पसंद और प्राकृतिक तेलों की ढाल
भारतीय परिवेश और घरों में शीशम को मजबूती तथा लंबे टिकाऊपन के लिए सबसे अधिक भरोसा हासिल है। यह एक भारी और कठोर लकड़ी होती है, जिस पर दबाव पड़ने पर भी यह आसानी से चटकती या मुड़ती नहीं है। शीशम का रंग सुनहरे भूरे से लेकर गहरे लाल-भूरे रंग के बीच होता है, और पॉलिश के बाद इसका रूप अत्यंत आकर्षक दिखता है। इस लकड़ी के भीतर कुदरती तेल मौजूद होते हैं, जो इसे दीमक और फंगस के संक्रमण से प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। यह लकड़ी दैनिक और नियमित उपयोग का भारी दबाव भी आसानी से झेल लेती है, यही वजह है कि घरेलू उपयोग के फर्नीचर के लिए इसे प्राथमिकता दी जाती है।
सागौन: मौसम की मार से अप्रभावित रहने वाली राजा लकड़ी
सागौन की गिनती दुनिया की सबसे बेहतरीन और कीमती इमारती लकड़ियों में की जाती है। इसकी ताकत, प्राकृतिक तेल और विशिष्ट रेशे इसे खास बनाते हैं। सागौन की लकड़ी के भीतर कुदरती तेल और गोंद की मात्रा काफी अधिक होती है, जो इसे सड़ने, फफूंद लगने और सीलन से पूरी तरह सुरक्षित रखती है। मौसम में अचानक आने वाले बदलावों, जैसे भारी बारिश या भीषण गर्मी में भी सागौन आसानी से सिकुड़ती या फैलती नहीं है। इसी खूबी के कारण सागौन से बने दरवाजे और खिड़कियां अपने चौखट में जाम नहीं होते और उनका आकार हमेशा संतुलित बना रहता है। इसका प्राकृतिक रंग शहद जैसा सुनहरा-भूरा होता है, जो देखने में बेहद सुरुचिपूर्ण लगता है।
घर और कार्यालय के लिए क्या-क्या फर्नीचर बनवाया जा सकता है
आबनूस, महोगनी, शीशम और सागौन जैसी प्रीमियम और मजबूत लकड़ियों का उपयोग करके घर तथा दफ्तर की विभिन्न जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। इनसे सोफा सेट, काउच, सेंटर टेबल, कॉफी टेबल, टेलीविजन कंसोल, अलमारियां, कैबिनेट, बेड, वॉर्डरोब, डाइनिंग टेबल और कुर्सियों तक हर तरह का शानदार ढांचा तैयार कराया जा सकता है। सहारनपुर के कारीगर इन चारों लकड़ियों की खासियतों को ध्यान में रखकर ही उनकी नक्काशी और डिजाइनिंग तय करते हैं। लंबे समय तक चलने वाला मजबूत फर्नीचर तैयार करने के लिए सही लकड़ी का चयन ही सबसे जरूरी कदम है।


















