छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में अपने चटपटे और विशिष्ट स्वाद के लिए पहचानी जाने वाली खट्टा भाजी अब सीधे घरेलू बगीचों और बाड़ियों में उगाई जा सकती है। स्थानीय हाट-बाजारों में साल भर बेहद लोकप्रिय रहने वाली इस पारंपरिक पत्तेदार सब्जी को लोग अक्सर दाल और कई तरह के व्यंजनों के साथ मिलाकर पकाना पसंद करते हैं। बागवानी के सामान्य तरीकों को अपनाकर इस लोकप्रिय साग को घर के आंगन, गमलों या बैकयार्ड में तैयार करना बेहद सहज हो गया है।
बुआई की विधि और मिट्टी तैयार करने का तरीका
बस्तर के स्थानीय निवासी चैतन कश्यप ने अपने घरेलू किचन गार्डन में इस पारंपरिक भाजी को उगाने का व्यावहारिक तरीका साझा किया है। उनके अनुसार खट्टा भाजी को विकसित करना किसी भी सामान्य गृहवाटिका में संभव है। इसे लगाने की शुरुआत जमीन को फावड़े से अच्छी तरह गोड़कर और भुरभुरा बनाकर की जाती है, जिससे बीजों के अंकुरण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकें।
जमीन व्यवस्थित हो जाने के बाद उसमें बीजों का छिड़काव किया जाता है। बीज बोने के तुरंत बाद उस पर गोबर की खाद डाली जाती है, जो पोषण देने के साथ नमी बनाए रखती है। अगर मिट्टी में पर्याप्त नमी और नियमित देखभाल मिले, तो बुआई के लगभग एक सप्ताह के भीतर बीज फूटकर अंकुरित होने लगते हैं।
न्यूनतम खर्च और विशुद्ध जैविक खेती
इस भाजी को उगाने का सबसे बड़ा पहलू इसकी बेहद किफायती लागत है। पूरी प्रक्रिया में लगभग 100 से 150 रुपये का मामूली खर्च आता है। रासायनिक खादों के बिना, पूरी तरह प्राकृतिक गोबर की खाद की मदद से इसे तैयार किया जाता है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी पूरी तरह शुद्ध और रसायनमुक्त रहती है।
पौधों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की बात करें तो खट्टा भाजी पर कीटों या रोगों का हमला आमतौर पर बहुत कम देखा जाता है। इस वजह से इसकी नियमित देखरेख में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती। अगर कभी कीटों के प्रभाव से पत्तियों में महीन छेद दिखने लगें, तो जरूरत के मुताबिक कीटनाशक या उपयुक्त दवा का हल्का छिड़काव करके पौधों को बचाया जा सकता है।
कटाई का समय और लंबी फसल अवधि
बीज डालने के ठीक 30 दिनों, यानी लगभग एक महीने के भीतर पौधे इतने विकसित हो जाते हैं कि उनकी ताजी पत्तियां खाने के लिए तोड़ी जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका उत्पादन चक्र है। एक बार फसल तैयार हो जाने पर यह लगातार चार से पांच महीने तक ताजी पत्तियां देती रहती है। कम लागत, सरल प्रबंधन और लंबी समयावधि तक मिलने वाली उपज के चलते यह घरेलू किचन गार्डन के लिए एक आदर्श विकल्प साबित होती है।


















