हर महीने बैंक खाते में वेतन आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग यह इरादा करते हैं कि इस बार पैसों को सोच समझकर खर्च करेंगे और अच्छी खासी रकम बचाएंगे। इसके बावजूद महीना शुरू होते ही कुछ दिनों के भीतर अधिकांश पैसा हाथ से निकल जाता है। घर के राशन, बिजली और पानी के बिल, बच्चों की जरूरतों, अचानक होने वाली ऑनलाइन शॉपिंग तथा बाहर खान-पान जैसी छोटी-छोटी मदों में रकम कब खत्म हो जाती है, इसका अंदाजा भी नहीं लग पाता। यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक खर्च करने की आदत से परेशान है और महीने के आखिरी दिनों में तंगी महसूस करता है, तो रोजमर्रा की आदतों में कुछ व्यावहारिक बदलाव कर अपनी वित्तीय स्थिति को काफी मजबूत बना सकता है। बजट तैयार करना, गैर-जरूरी खर्चों को पहचानकर उन पर अंकुश लगाना और हर माह एक निश्चित राशि अलग रखना आर्थिक स्थिरता की नींव साबित हो सकता है।
वेतन मिलते ही सबसे पहले तैयार करें मासिक बजट
सुल्तानपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) मनमोहित सिंह के अनुसार, वेतन आते ही सबसे पहला काम पूरे महीने का व्यवस्थित बजट बनाना होना चाहिए। इस बजट में अनिवार्य प्राथमिकताओं को सबसे आगे रखें, जिनमें घर की रसोई का राशन, बिजली व पानी के बिल, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, मकान का किराया, नियमित दवाएं तथा रोजाना आने-जाने के यात्रा खर्च शामिल हैं। इन अनिवार्य खर्चों का सटीक आकलन करने के बाद अपनी कुल आय का एक हिस्सा बचत के तौर पर निर्धारित कर लें।
सीए मनमोहित सिंह यह अहम सलाह देते हैं कि महीने भर के खर्चे पूरे होने के बाद बची हुई रकम को बचाने की कोशिश करने के बजाय, वेतन आते ही बचत की तय रकम सीधे किसी दूसरे खाते में भेज देनी चाहिए। जब यह पैसा मुख्य खाते से अलग हो जाता है, तो उसे बेवजह खर्च करने का अवसर अपने आप कम हो जाता है। यदि किसी की आमदनी सीमित भी है, तो भी उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। शुरुआत भले ही बहुत छोटी रकम से की जाए, लेकिन हर महीने बचत करने का नियम लगातार बना रहना चाहिए।
छोटे-छोटे गैर-जरूरी खर्च बजट को पहुंचाते हैं सबसे बड़ा नुकसान
दैनिक जीवन में होने वाले मामूली खर्च कई बार किसी बड़ी खरीदारी की तुलना में जेब पर ज्यादा भारी पड़ते हैं। दफ्तर या बाहर के चाय-नाश्ते, बार-बार ऑनलाइन खाना मंगवाने, छोटी दूरी के लिए भी कैब बुक करने, बिना सोचे-समझे की जाने वाली ऑनलाइन शॉपिंग और ऐसे डिजिटल सब्सक्रिप्शन जिनका कोई उपयोग नहीं हो रहा, महीने का हिसाब लगाते समय एक बहुत बड़ी रकम बन जाते हैं। इस वित्तीय नुकसान से बचने के लिए दिनभर के प्रत्येक खर्च को डायरी या फोन में दर्ज करने की आदत डालनी चाहिए।
ऑनलाइन खरीदारी के दौरान कोई भी सामान कार्ट में डालते समय खुद से यह सवाल जरूर पूछें कि क्या वह चीज वाकई में बेहद जरूरी है। यदि मन से साफ जवाब नहीं मिलता है, तो उस खरीदारी को कुछ दिनों के लिए टाल देना चाहिए। कई बार खरीदारी कुछ समय के लिए टाल देने पर उस वस्तु को हासिल करने की तीव्र इच्छा अपने आप समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड और आसान मासिक किश्तों (ईएमआई) का प्रयोग बेहद सावधानीपूर्वक करना चाहिए, क्योंकि दिखने में छोटी लगने वाली ये किश्तें लंबे समय तक मासिक बजट पर निरंतर दबाव बनाए रखती हैं।
इमरजेंसी फंड का निर्माण और महीने के अंत में खर्चों की समीक्षा
आर्थिक रूप से सुरक्षित और मजबूत बनने के लिए केवल अपनी कमाई बढ़ाते जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जो पैसा कमाया जा रहा है, उसका सही प्रबंधन करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रयास करना चाहिए कि हर महीने एक निर्धारित राशि बचत खाते में पहुंचे या किसी सुरक्षित निवेश विकल्प में जमा होती रहे। इसके अलावा कम से कम कुछ महीनों के अनिवार्य जीवन-यापन खर्चों के बराबर एक मजबूत इमरजेंसी फंड तैयार करना बेहद जरूरी कदम है।
यदि किसी के पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड मौजूद रहता है, तो अचानक परिवार में किसी बीमारी, नौकरी में अस्थाई रुकावट या किसी अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय दूसरों के सामने हाथ फैलाने या भारी ब्याज पर कर्ज लेने की नौबत नहीं आती। इसके साथ ही महीने के समापन पर बैठकर यह देखने की आदत बनाएं कि पूरी अवधि में पैसा कहां और कितना खर्च हुआ। जब पूरे महीने के खर्चों का साफ ब्योरा सामने होता है, तो बेकार के खर्चों की तुरंत पहचान हो जाती है और अगले महीने उन्हें आसानी से रोका जा सकता है। बचत की यात्रा शुरू करने के लिए कभी भी बड़ी कमाई का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि छोटी शुरुआत से ही वित्तीय मजबूती हासिल की जा सकती है।
















