जब दो लोग एक रिश्ते में बंधते हैं, तो आमतौर पर उम्मीद की जाती है कि समय के साथ विश्वास और अपनापन गहरा होगा। कई बार परिस्थितियां बिल्कुल अनुकूल होती हैं, पार्टनर पूरा ध्यान रखता है, बातचीत सामान्य रहती है और प्रत्यक्ष रूप से कोई टकराव भी नहीं दिखता। इसके बाद भी मन के किसी कोने में एक अनजाना सा संशय घर किए रहता है कि क्या सामने वाला वाकई दिल से जुड़ा है अथवा यह साथ कब तक टिक पाएगा। किसी संदेश का तुरंत उत्तर न मिलने पर यह मान लेना कि लगाव खत्म हो रहा है, या हर छोटी बात में अलगाव की आशंका तलाशना एक ऐसी मानसिक स्थिति की ओर संकेत करता है जिसे विशेषज्ञ रिलेशनशिप एंग्जायटी कहते हैं। यह समस्या आज के दौर में बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है, लेकिन थोड़ी सी सजगता और व्यवहार में बदलाव से इससे पार पाना संभव है।
रिलेशनशिप एंग्जायटी क्या है और यह कैसे असर डालती है
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो रिलेशनशिप एंग्जायटी ऐसी आंतरिक असुरक्षाओं और संदेहों का ताना-बाना है, जो किसी संबंध के बाहरी तौर पर सुखद दिखने पर भी भीतर ही भीतर पनपती रहती हैं। यह स्थिति सिर्फ नए अथवा हाल ही में बने संबंधों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वर्षों पुराने परिपक्व और प्रतिबद्ध रिश्तों में भी सिर उठा सकती है। जब यह बेचैनी अनियंत्रित रूप ले लेती है, तो यह केवल मन को ही नहीं थकाती, बल्कि दैनिक जीवन के कामकाज को भी प्रभावित करती है। अत्यधिक सोचने और हर पल किसी अनहोनी की आशंका में जीने से व्यक्ति शारीरिक रूप से भी अस्वस्थ महसूस करने लगता है, जिसमें तनाव, अत्यधिक थकान और पेट से जुड़ी गड़बड़ियां जैसे लक्षण शामिल हैं।
इस मानसिक खिंचाव के प्रमुख लक्षण
इस उलझन से जूझ रहे व्यक्ति के व्यवहार और सोच में कुछ खास तरह के बदलाव लगातार देखे जा सकते हैं। सबसे आम लक्षण यह है कि व्यक्ति बार-बार अपने महत्व को लेकर आशंकित रहता है। मन में यह विचार बार-बार उभरता है कि क्या अपनी अनुपस्थिति में भी पार्टनर को कोई फर्क पड़ेगा। इस प्रकार की सोच धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कमजोर करने लगती है।
दूसरा प्रमुख लक्षण पार्टनर द्वारा स्नेह प्रकट करने के बाद भी आंतरिक रूप से उसे स्वीकार न कर पाना है। यदि साथी ने किसी कारणवश फोन नहीं उठाया या संदेश का उत्तर देने में थोड़ी देर कर दी, तो तुरंत यह निष्कर्ष निकाल लिया जाता है कि अब रिश्ते में पहले जैसा आकर्षण नहीं रहा। इसके अतिरिक्त, हमेशा अकेले छूट जाने का भय बना रहता है। इस डर के चलते कई बार इंसान अपनी बुनियादी इच्छाओं, प्राथमिकताओं और खुशियों से केवल इसलिए समझौता करने लगता है ताकि दूसरा व्यक्ति किसी बात पर नाराज होकर दूर न चला जाए। कई बार यही घबराहट अनजाने में आत्मघाती व्यवहार का रूप ले लेती है, जहां छोटी-छोटी बातों पर बेवजह वाद-विवाद शुरू कर दिया जाता है या पार्टनर की वफादारी की बार-बार अनावश्यक परीक्षा ली जाने लगती है।
किन कारणों से पनपती है यह असुरक्षा
इस तरह की बेचैनी किसी एक रात में पैदा नहीं होती और न ही इसके पीछे कोई अकेला कारण जिम्मेदार होता है। अधिकांश मामलों में इसके तार व्यक्ति के अतीत से जुड़े होते हैं। यदि किसी पुराने रिश्ते में विश्वासघात का सामना करना पड़ा हो या किसी ने बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक साथ छोड़ दिया हो, तो वह पुराना दर्द वर्तमान के स्वस्थ रिश्ते में भी अविश्वास की छाया बनकर साथ चलता रहता है।
इसके अलावा स्वयं के प्रति कम आदर अथवा आत्मविश्वास का अभाव भी इसका बड़ा कारण बनता है। जब कोई व्यक्ति अपने गुणों पर भरोसा नहीं कर पाता, तो उसे सहज ही यह लगने लगता है कि सामने वाला भी उसमें कमियां ही देखता होगा और जल्द ही उससे दूर हो जाएगा। बाल्यकाल की परिस्थितियां और परवरिश का तरीका भी रिश्तों के प्रति हमारी सोच को आकार देता है। बचपन में अपने माता-पिता या अभिभावकों से सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव का जैसा अनुभव मिला होता है, वयस्क होने पर व्यक्ति संबंधों में उसी तरह का सुरक्षा दायरा तलाशता है।
इस उलझन से बाहर निकलने के पांच व्यावहारिक तरीके
यद्यपि यह स्थिति भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण महसूस हो सकती है, लेकिन कुछ ठोस आदतों और समझदारी भरे कदमों से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
1. अपनी निजी पहचान को खोने न दें
रिश्ते में आने के बाद अक्सर लोग अपनी दुनिया को पूरी तरह अपने पार्टनर तक सीमित कर लेते हैं। अपने पुराने मित्रों से संपर्क कम कर देना, अपने शौक को छोड़ देना और केवल साथी की दिनचर्या के अनुसार जीना धीरे-धीरे आत्मसम्मान को चोट पहुंचाता है। यह समझना आवश्यक है कि आपकी अपनी स्वतंत्र पसंद और रुचियां ही आपकी पहचान हैं। अपने व्यक्तिगत विकास, रचनात्मक कार्यों और सामाजिक दायरे के लिए नियमित समय निकालें, क्योंकि आपके इसी मूल व्यक्तित्व ने आरंभ में साथी को आकर्षित किया था।
2. माइंडफुलनेस और वर्तमान में जीने का अभ्यास
जब भी मस्तिष्क नकारात्मक परिदृश्यों की रचना करने लगे, तो खुद को वर्तमान क्षण में वापस लाने का प्रयास करें। कल क्या होगा या रिश्ता आगे चलकर कैसा रहेगा, इस प्रकार की व्यर्थ चिंताओं में आज के सुखद पलों को नष्ट न होने दें। जब मन बहुत अशांत हो, तो शांत बैठकर गहरी सांस लेने का अभ्यास करें या कुछ मिनट ध्यान लगाएं। यह शारीरिक और मानसिक उत्तेजना को तुरंत शांत करने में मददगार साबित होता है।
3. संवाद का सही और सम्मानजनक तरीका चुनें
अधिकांश मामलों में यह बेचैनी व्यक्ति के अपने भीतर की कल्पना होती है, जिसका साथी के वास्तविक आचरण से कोई संबंध नहीं होता। फिर भी, यदि मन में कोई बात चुभ रही है, तो उसे दबाकर रखने के बजाय शांत भाव से साझा करें। बातचीत के दौरान आरोप लगाने वाली भाषा से बचें। उदाहरण के तौर पर यह कहने की जगह कि तुम अब पहले की तरह वक्त नहीं देते, बात को अपने नजरिए से रखें कि बीते कुछ दिनों से संवाद कम होने के कारण आपको मन में थोड़ी बेचैनी महसूस हो रही है। इस प्रकार की ईमानदार बातचीत आपसी विश्वास को सुदृढ़ बनाती है।
4. तात्कालिक आवेग में कोई प्रतिक्रिया न दें
घबराहट के क्षणों में व्यक्ति कई बार बहुत जल्दबाजी में प्रतिक्रिया दे बैठता है, जैसे थोड़ी-थोड़ी देर में लगातार संदेश भेजना या सामने वाले से बार-बार प्यार का प्रमाण मांगना। जब भी ऐसा तीव्र आवेग महसूस हो, तो खुद को तुरंत रोकें। उस समय फोन को एक तरफ रख दें, खुली हवा में टहलने निकल जाएं, किसी अच्छे मित्र से सामान्य बात करें या कुछ देर तक गहरी सांसें लें। ऐसा करने से मस्तिष्क को सोचने का संतुलित समय मिल जाता है।
5. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ का परामर्श लें
यदि तमाम कोशिशों के बावजूद मन की यह उलझन कम नहीं हो रही है और यह आपके रिश्ते की खुशियों को लगातार निगल रही है, तो पेशेवर काउंसलर अथवा रिलेशनशिप थेरेपिस्ट से संपर्क करने में झिझक न दिखाएं। एक प्रशिक्षित विशेषज्ञ दोनों पक्षों की भावनाओं और चिंताओं को निष्पक्ष रूप से समझकर स्थिति को संभालने के सही मनोवैज्ञानिक रास्ते सुझा सकता है।
जीवन में कोई भी रिश्ता पूरी तरह से अनिश्चितताओं से मुक्त नहीं होता। हर संबंध में उतार-चढ़ाव आते हैं और इस वास्तविकता को स्वीकार करना ही परिपक्वता है। हर समय खोने के डर में जीने के बजाय यदि अपने विचारों को संतुलित रखा जाए और स्वयं पर विश्वास बनाए रखा जाए, तो रिश्ते के हर खूबसूरत पल का भरपूर आनंद उठाया जा सकता है।



















