पारंपरिक उत्सवों, शादियों और मांगलिक कार्यक्रमों में दक्षिण भारतीय सिल्क साड़ियां अपनी भव्यता, महीन जरी वर्क और गहरे चमकदार बॉर्डर के कारण हमेशा खास आकर्षण का केंद्र रहती हैं। कांचीवरम, कसावु तथा मैसूर सिल्क जैसी साड़ियों का शाही ठाठ हर किसी का मन मोह लेता है। इन परिधानों का रेशमी कपड़ा आम साड़ियों के मुकाबले थोड़ा भारी, घना और सख्त बनावट वाला होता है। इसी वजह से अगर इन्हें सलीके से न पहना जाए, तो सिलवटें बिगड़ सकती हैं और पूरा लुक असंतुलित दिखाई देने लगता है। साड़ी की असली सुंदरता तभी खुलकर सामने आती है जब उसकी हर एक प्लेट करीने से सजी हो और पल्लू कंधे पर पूरी गरिमा के साथ टिके।
पल्लू का सही आकार और प्लेट्स तैयार करना
सिल्क साड़ी पहनते समय सबसे पहले पल्लू के हिस्से को व्यवस्थित करना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए पल्लू वाले छोर को एक साथ इकट्ठा करके 5 से 7 एक समान प्लेट्स तैयार करें। इन प्लेट्स की चौड़ाई लगभग 4 से 5 इंच के बीच रखनी चाहिए। इतनी चौड़ाई रखने से साड़ी का चौड़ा बॉर्डर और उस पर की गई बारीक जरी की कारीगरी स्पष्ट और आकर्षक नजर आती है। जब सभी प्लेट्स व्यवस्थित हो जाएं, तो उन्हें एक सेफ्टी पिन से सुरक्षित कर लें और फिर बाएं कंधे पर रख दें। इस तरह पहले से पल्लू तैयार रखने से आगे की ड्रेपिंग में संतुलन बनाना बहुत आसान हो जाता है।
कमर की फिटिंग और सामने की प्लेट्स का प्रबंधन
पल्लू तय करने के बाद साड़ी के ऊपरी हिस्से को अंदर की तरफ से घुमाते हुए दाईं ओर कमर के पास लाएं और फिर सामने की ओर खींचें। कमर के हिस्से पर साड़ी की पकड़ मजबूत और फिटिंग चुस्त रखने के लिए वहां एक छोटी सेफ्टी पिन लगाई जा सकती है। इसके बाद सामने की तरफ जो अतिरिक्त कपड़ा बचता है, उससे 6 से 8 साफ-सुथरी और बराबर प्लेट्स बनाएं। इन सभी प्लेट्स को एक सीध में रखते हुए नाभि के हल्का सा बाईं तरफ पेटीकोट के भीतर टक कर दें। नाभि के थोड़ा बाईं ओर प्लेट्स दबाने से शरीर का पोश्चर सुडौल और साड़ी का फॉल बेहद शानदार दिखता है।
परफेक्ट फिनिश के लिए जरूरी सावधानियां
सिल्क साड़ी को बांधने से पहले हमेशा उन जूतों या सैंडल को पहन लेना चाहिए जिन्हें उस दिन इस्तेमाल करना हो, ताकि साड़ी की ऊंचाई फर्श से एकदम सटीक रहे। पल्लू को ब्लाउज के कंधे वाले हिस्से से मजबूती से पिनअप करना चाहिए जिससे भारी पल्लू बार-बार नीचे न फिसले। प्लेट्स को बराबर दूरी पर रखना और उन्हें व्यवस्थित रखना सबसे जरूरी नियम है। इसके अलावा, अगर पूरी तरह से पारंपरिक और राजसी दक्षिण भारतीय अंदाज पाना हो, तो कमर पर ओडियानम यानी पारंपरिक गोल्डन वेस्ट बेल्ट भी पहनी जा सकती है, जो साड़ी को टिकाए रखने के साथ-साथ लुक को भव्य बना देती है।



















