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खस की खेती और डिस्टिलेशन से सुगंधित तेल निकालने का चरणबद्ध तरीकाजीवनशैली
1 नव॰ 2026, 6:31 pm (1 घंटे पहले)· 0

खस की खेती और डिस्टिलेशन से सुगंधित तेल निकालने का चरणबद्ध तरीका

खस की फसल से तेल तैयार करने के लिए पौधों की कटाई, जड़ों की धुलाई और डिस्टिलेशन प्लांट की सटीक प्रक्रिया अपनाई जाती है।

सुगंधित फसलों की खेती में खस का उत्पादन एक बेहद व्यवस्थित और तकनीकी प्रक्रिया से होकर गुजरता है। इस फसल से अंतिम उत्पाद यानी सुगंधित तेल तैयार करने के लिए खेत की तैयारी से लेकर प्रसंस्करण इकाई तक कई चरणों में काम किया जाता है। खेत में जब खस की फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है, तब सबसे पहले मिट्टी की ऊपरी सतह पर मौजूद तनों और पत्तियों की कटाई की जाती है। तनों और ऊपरी हिस्से को काटकर खेत से पूरी तरह हटा दिया जाता है। इस कटाई के लगभग 10 से 15 दिनों के बाद जमीन के अंदर मौजूद जड़ों की खुदाई का मुख्य चरण आरंभ होता है। मजदूर या किसान बहुत ही सावधानी के साथ एक-एक पौधे की जड़ को जमीन से सुरक्षित बाहर निकालते हैं। इसके बाद पौधों के बाकी बचे हिस्से से जड़ों को पूरी तरह अलग कर लिया जाता है ताकि आगे की प्रोसेसिंग सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।

जड़ों की धुलाई, पानी में भिगोना और छोटे टुकड़ों में कतराई

जमीन से जड़ें बाहर निकालने के बाद उनकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। किसान और व्यवसायी सुनील कुमार के अनुसार, खेत की मिट्टी से निकलने के बाद जड़ों को अत्यंत बारीकी और गहनता के साथ धोया जाता है। इस धुलाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जड़ों की परतों में मिट्टी या रेत का कोई भी कण बाकी न रहे। पहली धुलाई पूरी हो जाने के बाद इन साफ जड़ों को करीब 24 से 48 घंटों की अवधि के लिए पानी से भरे कुंड या बर्तनों में डुबोकर फुलाया जाता है। पानी में अच्छी तरह भीगने के पश्चात जड़ों को एक बार फिर से धोया जाता है ताकि बची-खुची गंदगी भी निकल जाए। इसके बाद जड़ों को पानी से बाहर निकाला जाता है। प्रोसेसिंग यूनिट के छोटे ड्रमों अथवा बॉक्सों में जड़ों को ठीक तरह से भरने के लिए उन्हें छोटी कटर मशीनों की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया जाता है।

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डिस्टिलेशन प्लांट में वाष्पीकरण और 100 घंटे की लंबी प्रक्रिया

मशीन से बारीक कटे हुए जड़ों के टुकड़ों को डिस्टिलेशन प्लांट के बॉयलर या पात्र में व्यवस्थित रूप से भरा जाता है। डिस्टिलेशन तकनीक का प्राथमिक सिद्धांत वाष्पीकरण पर आधारित होता है। प्लांट के अंदर गर्मी के कारण जड़ों से निकलने वाली भाप ऊपर उठकर कंडेन्सर की ओर बढ़ती है। कंडेन्सर प्रणाली में लगातार ठंडा पानी प्रवाहित किया जाता है, जिससे यह गर्म भाप तेजी से ठंडी होकर संघनित होती है और पानी व तेल के तरल मिश्रण के रूप में नीचे लगे रिसीवर टैंक में एकत्रित होने लगती है। खस की जड़ों से तेल का केवल एक राउंड निकालने के लिए डिस्टिलेशन की यह भट्ठी लगभग 100 घंटे तक अनवरत चलती रहती है। लंबी हीटिंग और कंडेनसेशन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एकत्र तरल को लगभग 12 से 13 घंटे तक बिना हिलाए-डुलाए स्थिर रखा जाता है। इस विश्राम अवधि के बाद थीराना विधि यानी प्राकृतिक अलगाव की सहायता से पानी की परत के ऊपर तैर रहे शुद्ध खस के तेल को अलग कर लिया जाता है।

तेल की रिफ्रेशिंग और स्लीप्स से अगली बुवाई का चक्र

थीराना तकनीक से अलग किए गए खस के तेल को अंतिम रूप से रिफ्रेशिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है ताकि उसकी गुणवत्ता और खुशबू बाजार मानकों के अनुरूप हो सके। इसके बाद ही यह कीमती तेल बिक्री के लिए व्यावसायिक मंडियों में भेजा जाता है। इस पूरी कृषि व्यवस्था में पौधे का कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता। फसल की शुरुआत में काटे गए तनों और ऊपरी वानस्पतिक हिस्से से रोपाई योग्य स्लीप्स यानी वानस्पतिक कलम तैयार की जाती हैं। इन स्लीप्स को अलग-अलग छांटकर अगले कृषि सत्र की बुवाई के लिए दोबारा खेतों में रोप दिया जाता है। इस चक्र के माध्यम से किसान एक ही फसल से तेल की आय अर्जित करने के साथ-साथ अगली पैदावार के लिए जरूरी बीज सामग्री भी स्वतः सुरक्षित कर लेते हैं।

सवाल-जवाब

ऊपरी फसल काटने के कितने दिन बाद खस की जड़ें खोदी जाती हैं?
ऊपरी तने और फसल की कटाई करने के लगभग 10 से 15 दिनों के बाद खस की जड़ें खोदने का काम शुरू किया जाता है।
डिस्टिलेशन से पहले जड़ों को कितने समय तक पानी में भिगोया जाता है?
मिट्टी साफ करने के बाद जड़ों को लगभग 24 से 48 घंटों के लिए पानी में डुबोकर फुलाया जाता है।
खस की जड़ों से तेल निकालने में डिस्टिलेशन प्रक्रिया कितना समय लेती है?
खस की जड़ों से तेल का एक राउंड निकालने के लिए डिस्टिलेशन प्लांट की प्रक्रिया लगभग 100 घंटे तक चलती है।
भाप ठंडी होने के बाद तेल और पानी को कैसे अलग किया जाता है?
तरल मिश्रण को 12 से 13 घंटे तक स्थिर रखा जाता है, जिसके बाद थीराना विधि अपनाकर तेल को पानी से अलग कर लिया जाता है।
पौधे के ऊपरी हिस्से का उपयोग किस काम में किया जाता है?
पौधे के ऊपरी हिस्से से रोपण योग्य स्लीप्स तैयार की जाती हैं, जिन्हें अगली फसल के लिए खेतों में दोबारा लगाया जाता है।
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