सर्दियों के मौसम में गरमागरम नाश्ते के रूप में मूली के पराठे बेहद लोकप्रिय रहते हैं। मक्खन, गाढ़े दही या तीखे अचार के साथ परोसे जाने पर इनका स्वाद और भी बेहतरीन हो जाता है। इसके बावजूद घरों में मूली का पराठा बनाते समय एक बड़ी दिक्कत अक्सर सामने आती है। चकले पर बेलते ही पराठा बीच से या किनारों से फटने लगता है और अंदर भरी सामग्री बाहर निकल आती है। इससे न केवल पराठे का गोल आकार बिगड़ जाता है, बल्कि गीली भरावन की वजह से उसे तवे पर ठीक से सेंकना भी काफी कठिन हो जाता है। इस परेशानी की मुख्य वजह मूली में मौजूद प्राकृतिक पानी है। यदि आटा तैयार करने से लेकर तवे पर पकाने तक कुछ बुनियादी बातों पर अमल किया जाए, तो बिना फटे एकदम खस्ता पराठे तैयार किए जा सकते हैं।
कद्दूकस की गई मूली से अतिरिक्त पानी अलग करें
मूली एक ऐसी सब्जी है जिसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। यदि कद्दूकस करने के तुरंत बाद बिना पानी निकाले मसाले मिलाकर भर दिया जाए, तो भरावन पूरी तरह गीली हो जाती है। जब गीली सामग्री को आटे की लोई में बंद करके बेला जाता है, तो नमी आटे को कमजोर कर देती है और पराठा तुरंत फट जाता है। इस दिक्कत से बचने का सबसे कारगर उपाय यह है कि कद्दूकस की हुई मूली में थोड़ा सा नमक मिला दें और उसे करीब 10 मिनट के लिए एक बर्तन में छोड़ दें। नमक के संपर्क में आते ही मूली अपना सारा अतिरिक्त पानी छोड़ देती है। इसके बाद दोनों हथेलियों के बीच दबाकर मूली का सारा पानी अच्छी तरह निचोड़ लें। पानी पूरी तरह निकल जाने के बाद भरावन सूखी हो जाती है और उसे लोई में संभालना बेहद आसान हो जाता है।
आटे को जरूरत से ज्यादा नरम न गूंथें
मूली के पराठे की सफलता में गूंथे हुए आटे का लचीलापन बहुत अहम भूमिका निभाता है। कई लोग सामान्य रोटियों की तरह बेहद मुलायम आटा तैयार करते हैं। भरावन में मौजूद बची हुई हल्की सी नमी भी मुलायम आटे को और अधिक चिपचिपा बना देती है, जिससे बेलन चलाते ही आटा खिंचकर फट जाता है। इसलिए मूली का पराठा बनाते समय पानी की मात्रा का खास ध्यान रखें और आटा थोड़ा सख्त गूंथें। थोड़ा कड़ा आटा बेलते समय भरावन के दबाव को आसानी से संभाल लेता है और किनारों को मजबूती से बांधे रखता है।
नमी सोखने के लिए मिलाएं थोड़ा बेसन
हाथों से पानी निचोड़ने के बाद भी यदि भरावन में हल्की सी सीलन महसूस हो रही हो, तो उसमें थोड़ा सा बेसन या भुना हुआ सूखा आटा मिलाया जा सकता है। बेसन भरावन की अतिरिक्त नमी को तुरंत सोख लेता है और मिश्रण को बांधने में मदद करता है। हालांकि इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि बेसन बहुत सीमित मात्रा में ही डालें। यदि बहुत ज्यादा बेसन डाल दिया जाए, तो मूली का असली तीखा और ताजा स्वाद दब सकता है। बेसन को मसाले और मूली के साथ अच्छी तरह एकसार मिलाने के बाद ही भरावन को आटे की लोई में भरना चाहिए।
लोई के आकार के अनुसार ही भरें सामग्री
अधिक स्वाद पाने के चक्कर में कई बार लोग लोई के आकार से ज्यादा मात्रा में मूली भर देते हैं। आवश्यकता से अधिक भरावन भरने पर लोई के किनारे ठीक से आपस में चिपक नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि बेलन का हल्का सा दबाव पड़ते ही जोड़ खुल जाते हैं और मूली बाहर बिखरने लगती है। इसलिए हमेशा आटे की लोई के आकार को ध्यान में रखकर ही संतुलित मात्रा में भरावन रखें। भरने के बाद किनारों को ऊपर खींचकर आपस में पूरी मजबूती के साथ सील करें, ताकि चकले पर घुमाते समय जोड़ बिल्कुल न खुलें।
हल्के हाथों से बेलने की तकनीक
मूली का पराठा बेलते समय ताकत या तेज दबाव का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। लोई को सूखे आटे में लपेटकर पहले हथेलियों या उंगलियों से थोड़ा चपटा कर लें। इसके बाद बेलन से बहुत हल्के हाथों से धीरे-धीरे चारों दिशाओं में समान दबाव डालते हुए पराठे का आकार बढ़ाएं। यदि बेलते समय आटा चकले या बेलन से चिपकने लगे, तो हल्का सा सूखा आटा छिड़क लें। संतुलित दबाव से भरावन अंदर समान रूप से फैलती है और पराठा फटने का जोखिम खत्म हो जाता है।
मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक सेंकें
पराठे को पकाने के लिए सबसे पहले तवे को अच्छी तरह गर्म कर लें। ठंडे तवे पर डालने से पराठा कड़ा हो सकता है। पराठे को गर्म तवे पर डालें और दोनों तरफ हल्का सा सिकने दें। जब दोनों सतहों पर हल्के चित्ते दिखने लगें, तब थोड़ा सा घी या तेल लगाएं और आंच को मध्यम कर दें। पराठे को मध्यम आंच पर दोनों तरफ से पलट-पलटकर सुनहरा और करारा होने तक पकाएं। बहुत तेज आंच पर पकाने से बाहरी परत तो जल्दी जल जाएगी, लेकिन अंदर की भरावन ठीक से नहीं पक पाएगी और पराठा कच्चा रह जाएगा।



















