शहद को सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है और लोग रोजाना के खान-पान, आयुर्वेदिक नुस्खों और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका भरपूर इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, आजकल बाजार में असली शहद के साथ-साथ नकली और मिलावटी शहद भी धड़ल्ले से बेचा जा रहा है, जिससे आम ग्राहकों के लिए शुद्ध शहद की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। मिलावटी शहद का सेवन सेहत को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए खरीदारी करते समय बेहद सावधान रहना जरूरी है।
12 साल का अनुभव और मधुमक्खी पालक के नुस्खे
इस समस्या का समाधान करने के लिए गोंडा के एक अनुभवी मधुमक्खी पालक राम शंकर तिवारी, जो पिछले लगभग 12 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, ने असली और नकली शहद के बीच का अंतर समझाने के लिए कुछ बहुत ही आसान और व्यावहारिक तरीके बताए हैं। इन तरीकों की मदद से कोई भी व्यक्ति घर बैठे ही शहद की शुद्धता की जांच कर सकता है और बाजार में बिकने वाले नकली उत्पादों के धोखे से खुद को बचा सकता है।
पहला तरीका: पानी से करें शुद्धता की जांच
राम शंकर तिवारी के अनुसार, शहद की जांच करने का सबसे आसान और सटीक तरीका 'वॉटर टेस्ट' यानी पानी की जांच है। इसके लिए आपको कांच के एक साफ गिलास में सामान्य पानी लेना होगा और उसमें शहद की कुछ बूंदें डालनी होंगी। यदि शहद पूरी तरह से असली है, तो वह पानी में घुले बिना सीधे गिलास की तली में जाकर बैठ जाएगा। इसके विपरीत, अगर शहद में चीनी या किसी अन्य चीज की मिलावट की गई है, तो वह पानी में गिरते ही तुरंत घुलने लगेगा या फैल जाएगा। शुद्ध शहद तब तक गिलास की तली में एक जगह जमा रहता है जब तक कि उसे चम्मच से अच्छी तरह हिलाया या मिलाया न जाए।
दूसरा तरीका: अंगूठे पर रखकर देखें
शुद्धता जांचने का दूसरा तरीका भी बेहद सरल है, जिसे 'थंब टेस्ट' कहा जाता है। इसके लिए अपने अंगूठे पर शहद की एक बूंद टपकाएं। अगर शहद असली और प्राकृतिक है, तो वह गाढ़ा होने के कारण एक ही जगह पर टिका रहेगा और बहेगा नहीं। वहीं दूसरी ओर, अगर शहद में मिलावट है तो वह पतला होने के कारण तुरंत आपके अंगूठे पर फैलने लगेगा और त्वचा पर बह जाएगा। प्राकृतिक रूप से शुद्ध शहद में बहने की प्रवृत्ति बहुत धीमी होती है।
प्राकृतिक महक और गाढ़ापन ही असली पहचान
राम शंकर तिवारी ने बताया कि असली शहद प्राकृतिक रूप से गाढ़ा होता है और उसमें से एक भीनी-भीनी प्राकृतिक खुशबू आती है। अगर आपको बाजार से लाया गया शहद बहुत ज्यादा पतला लगता है या उसमें केवल चीनी जैसी तेज मिठास महसूस होती है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि उसमें मिलावट की गई है। प्राकृतिक शहद की मिठास कभी भी गले में जलन पैदा करने वाली या कृत्रिम नहीं लगती।
फूलों के आधार पर बदलता है रंग और स्वाद
मधुमक्खी पालक का कहना है कि लोगों को केवल रंग देखकर शहद की शुद्धता का फैसला नहीं करना चाहिए। दरअसल, शहद का रंग, स्वाद और उसकी महक इस बात पर निर्भर करती है कि मधुमक्खियों ने किस तरह के फूलों का रस चूसा है। उदाहरण के लिए, जामुन, सरसों, तुलसी और करंज के फूलों से तैयार होने वाले शहद का रंग, स्वाद और उसकी सुगंध एक-दूसरे से काफी अलग होती है। इसलिए अलग-अलग रंग के शहद भी पूरी तरह से शुद्ध हो सकते हैं और रंग में भिन्नता होना स्वाभाविक है।
शहद खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
मिलावट से बचने के लिए राम शंकर तिवारी ने लोगों को सलाह दी है कि शहद हमेशा किसी भरोसेमंद ब्रांड या सीधे किसी विश्वसनीय मधुमक्खी पालक से ही खरीदें। इसके अलावा, पैकेट या शीशी पर लिखी गई मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और क्वालिटी से जुड़ी जानकारियों को ध्यान से पढ़ें। बहुत ज्यादा सस्ते दामों पर मिलने वाले शहद को खरीदने से भी बचना चाहिए, क्योंकि कम कीमत वाले उत्पादों में मिलावट की आशंका सबसे ज्यादा होती है। हमेशा गुणवत्ता को प्राथमिकता दें ताकि आपके स्वास्थ्य को पूरा लाभ मिल सके।



















