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मानसून में इन 5 पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देना है खतरनाक, जड़ें सड़ने से बचाने के तरीकेजीवनशैली
14 जुल॰ 2026, 7:04 am (107 दिन पहले)· 1

मानसून में इन 5 पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देना है खतरनाक, जड़ें सड़ने से बचाने के तरीके

मानसून के दौरान कुछ खास पौधों को बहुत अधिक पानी देने से वे खराब हो सकते हैं। गार्डनर राम सागर ने बताया है कि इन पौधों को ओवरवॉटरिंग से बचाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

ऋषिकेश में बारिश का आगमन अपने साथ ढेर सारी हरियाली लेकर आता है। मौसम का मिजाज बदलते ही पौधों की विकास दर में तेजी आती है, जिसके कारण अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि इन पौधों को प्रतिदिन बहुत ज्यादा पानी पिलाने की आवश्यकता है। हालांकि, यह आम धारणा कई बार पौधों के लिए घातक साबित होती है। विशेष रूप से वे पौधे जिन्हें बहुत कम जल की आवश्यकता होती है, मानसून की अधिक नमी का शिकार बनकर दम तोड़ सकते हैं। यदि इन पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी मिल जाए, तो इनकी जड़ों में सड़न पैदा हो जाती है, जिससे अंततः पूरा पौधा नष्ट हो सकता है। इसलिए मानसून के दौरान केवल पानी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही मात्रा और सही अंतराल का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

कम देखभाल वाले पौधों की पहचान

गार्डनर राम सागर के अनुसार, ऐसे कई पौधे मौजूद हैं जिन्हें बहुत कम रखरखाव की जरूरत होती है। इनमें स्नेक प्लांट, एलोवेरा, जेड प्लांट, कैक्टस और ZZ प्लांट मुख्य रूप से शामिल हैं। इन पौधों की विशेषता यह है कि ये अपनी पत्तियों और जड़ों में नमी को लंबे समय तक संजोकर रखने में सक्षम होते हैं। इस कारण इन्हें बार-बार पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है। यदि बरसात के दिनों में भी इनमें लगातार पानी डाला जाए, तो गमले की मिट्टी सदैव गीली बनी रहती है, जिससे जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में जड़ें गलने लगती हैं और पौधा धीरे-धीरे निर्बल होकर सूखने लगता है।

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रूट रॉट के लक्षण और समाधान

जड़ों का सड़ना, जिसे रूट रॉट कहा जाता है, इन पौधों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसका शुरुआती संकेत पत्तियों का पीला पड़ना है। धीरे-धीरे पत्तियां नरम होकर झड़ने लगती हैं और कई मामलों में तना भी आधार से गलने लगता है। अक्सर माली यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि पौधा सूख रहा है, और उसे बचाने के चक्कर में और पानी डाल देते हैं। यह प्रक्रिया समस्या को और अधिक जटिल बना देती है। मानसून में पानी डालने से पहले हमेशा मिट्टी की जांच करना अनिवार्य है। अपनी उंगली को मिट्टी में एक से दो इंच तक गहराई में डालें; यदि मिट्टी में नमी महसूस हो रही है, तो उस दिन पानी देना टाल दें। मिट्टी पूरी तरह सूखी होने पर ही जल का उपयोग करें। यह एक सरल लेकिन प्रभावी तकनीक पौधों को अतिरिक्त जल के दुष्प्रभाव से बचाती है।

गमले की सही बनावट का महत्व

पौधों की सेहत के लिए गमले का चयन और उसके ड्रेनेज सिस्टम पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। हमेशा उन्हीं गमलों का चुनाव करें जिनके नीचे अतिरिक्त पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद हो। यदि गमले में जल जमा रहेगा, तो जड़ें हर समय गीली बनी रहेंगी, जिससे सड़न का खतरा बढ़ जाएगा। पानी देने के बाद यह सुनिश्चित करें कि गमले के नीचे लगी प्लेट या ट्रे में जमा अतिरिक्त पानी बाहर फेंक दिया जाए। बहुत से लोग इस छोटे से कदम को अनदेखा कर देते हैं, जिससे पौधे का नुकसान हो जाता है। यदि आपके पौधे खुले स्थान पर रखे हैं, तो तेज बारिश के दौरान उन्हें सुरक्षित स्थानों जैसे बालकनी, किसी शेड के नीचे या छत के ढके हुए हिस्से में स्थानांतरित कर दें। इससे मिट्टी में जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी और पौधे मानसून के दौरान भी स्वस्थ रहेंगे।

सवाल-जवाब

मानसून में किन पौधों को सबसे ज्यादा खतरा होता है?
स्नेक प्लांट, एलोवेरा, जेड प्लांट, कैक्टस और ZZ प्लांट जैसे पौधों को मानसून में ज्यादा पानी देने से खतरा होता है क्योंकि ये नमी को स्टोर करके रखते हैं।
रूट रॉट के लक्षण क्या हैं?
इसके मुख्य लक्षणों में पत्तियों का पीला पड़ना, पत्तियों का नरम होकर गिरना और तने का नीचे से गलना शामिल है।
पौधे को पानी देने से पहले मिट्टी की जांच कैसे करें?
अपनी उंगली को मिट्टी में एक से दो इंच अंदर डालकर देखें, अगर मिट्टी सूखी लगे तभी पानी डालें।
गमलों में पानी जमा होने से कैसे रोकें?
हमेशा छेदों वाले गमलों का उपयोग करें और पानी देने के बाद गमले के नीचे की प्लेट में जमा अतिरिक्त पानी को खाली कर दें।
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