बरसात के मौसम के बाद चीकू के बागों की सही देखभाल करना किसानों और बागवानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। मानसून की भारी फुहारों और लगातार नमी के कारण बगीचों में कई ऐसी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं जो पौधों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का वैज्ञानिक तरीके से समाधान न किया जाए, तो पेड़ों की बढ़वार रुक सकती है और आने वाले दिनों में फलों के उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात का दौर थमते ही बगीचे में कुछ बुनियादी लेकिन अत्यंत आवश्यक कृषि कार्य शुरू कर देने चाहिए, जिससे पौधों को नई ऊर्जा मिल सके।
जलभराव से जड़ों को बचाना सबसे पहली प्राथमिकता
जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, बारिश खत्म होने के बाद खेत में ज्यादा समय तक पानी जमा रहने से पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं। जब मिट्टी में लगातार अत्यधिक नमी बनी रहती है, तो जड़ों को हवा नहीं मिल पाती और सड़न पैदा करने वाले फफूंद सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए बागवानों को सबसे पहला काम यह करना चाहिए कि तने के आसपास जमा हुए अतिरिक्त पानी को बिना देर किए बाहर निकाल दें। इसके लिए पूरे खेत में छोटी-छोटी जल निकासी नालियां तैयार करनी चाहिए, ताकि सारा फालतू पानी सुगमता से बाहर बह जाए। सूखी और हवादार मिट्टी ही चीकू के पौधे की सेहत को तेजी से सुधारने का काम करती है।
हल्की गुड़ाई से लौटाइए मिट्टी में ऑक्सीजन का संचार
बरसात की लगातार बूंदों के दबाव और कीचड़ के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बहुत सख्त और ठोस बन जाती है। इस कठोर परत के बन जाने से जड़ों तक वायुमंडलीय हवा और ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए पौधे के मुख्य तने से थोड़ी सुरक्षित दूरी बनाकर खुरपी की मदद से बहुत हल्की गुड़ाई करनी चाहिए। इस प्रक्रिया से मिट्टी ढीली हो जाती है, उसमें ऑक्सीजन का बहाव बेहतर बनता है और पौधों की जड़ें सामान्य रूप से सांस ले पाती हैं। हालांकि गुड़ाई करते वक्त इस सावधानी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि पौधे की मुख्य जड़ों अथवा बारीक रेशेदार जड़ों को किसी प्रकार की चोट या नुकसान न पहुंचे।
हानिकारक खरपतवार और अनचाही घास का तुरंत करें सफाया
बारिश के दिनों में पौधे के आसपास बहुत सारी अनचाही घास और तरह-तरह के खरपतवार तेजी से उग आते हैं। ये जंगली पौधे मिट्टी में मौजूद सभी आवश्यक पोषक तत्वों, खाद और नमी को खुद ही सोख लेते हैं। नतीजा यह होता है कि मुख्य चीकू का पौधा कमजोर होने लगता है और उसकी वृद्धि पर असर पड़ता है। बागवानों को चाहिए कि गुड़ाई के दौरान ही तने के चारों ओर उगी समूची घास को जड़ से उखाड़कर बगीचे से दूर फेंक दें। जब चीकू के तने के आसपास की मिट्टी पूरी तरह साफ-सुथरी और खरपतवार मुक्त होगी, तभी पौधे को तेजी से फैलने के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी खुराक मिल सकेगी।
गोबर की खाद और पोटाश से तैयार करें संतुलित पोषण चक्र
पौधे को नई ताकत और ताजगी देने के लिए इस समय सही पोषण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। गुड़ाई की प्रक्रिया पूरी करने के तुरंत बाद पौधे के जड़ क्षेत्र में अच्छी तरह से सड़ी हुई देसी गोबर की खाद अथवा वर्मीकंपोस्ट की खुराक देनी चाहिए। जैविक खाद मिट्टी की संरचना और उसकी उर्वरा शक्ति को मजबूत करती है तथा पौधे को लंबे समय तक धीरे-धीरे आवश्यक पोषण देती रहती है। खाद डालने के बाद उसे ऊपर की मिट्टी में भली-भांति मिला देना चाहिए, ताकि खाद के पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंच सकें।
यदि बागवान चाहते हैं कि चीकू का पौधा तगड़ा बने और टहनियों पर भरपूर फल लगें, तो गोबर की खाद के साथ पोटाश का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। थोड़ी मात्रा में पोटाश को जैविक खाद के साथ मिलाकर मिट्टी में डालें। पोटाश पौधों में फल बनने की गति को तेज करता है, फलों के आकार को बड़ा करता है और पौधे की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी मजबूत बना देता है, जिससे पेड़ जल्दी किसी बीमारी की चपेट में नहीं आता। पोटाश और जैविक खाद का यह संतुलित मेल चीकू को अत्यधिक रसीला, ठोस और स्वाद में बेहद मीठा बना देता है। इसके अलावा, सही पोषण मिलने से फल पकने के दौरान उनका असमय डालियों से गिरना भी रुक जाता है, जिससे बागवानों को अधिकतम और उम्दा पैदावार हासिल होती है।
भरपूर धूप और नियमित छंटाई से रखें पौधों को निरोगी
खाद और आवश्यक कृषि उपाय अपनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करें कि पौधे को दिनभर में पर्याप्त धूप मिल रही हो। चीकू के पौधे को दैनिक रूप से कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी और अच्छी धूप मिलना बेहद जरूरी होता है। यदि पौधे के पास किसी बड़े पेड़ की शाखाओं के कारण लगातार छांव बनी रहती है, तो उस छांव को हटाने की व्यवस्था करें। इसके अतिरिक्त, बागवानों को हर दो से तीन दिन में पेड़ों की पत्तियों और तनों का सूक्ष्म निरीक्षण करते रहना चाहिए। निरीक्षण के दौरान यदि कोई सूखी, पीली अथवा रोगग्रस्त पत्ती या टहनी दिखाई दे, तो उसे तुरंत काट कर अलग कर दें ताकि पूरा पौधा हमेशा हरा-भरा, स्वस्थ और बीमारियों से सुरक्षित बना रहे।



















