भारतीय खानपान की थाली बिना दाल के अधूरी मानी जाती है। रोजाना के भोजन में शामिल दाल न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि शरीर को जरूरी प्रोटीन और पोषक तत्व भी प्रदान करती है। रोजमर्रा की कुकिंग के दौरान कई बार पानी का अंदाजा गलत हो जाता है, जिससे दाल जरूरत से ज्यादा पतली बन जाती है। दाल में पानी अधिक हो जाने पर उसका गाढ़ापन और वास्तविक स्वाद दोनों बिगड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में दाल को फेंकने या बेमन से खाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि रसोई के कुछ बेहद सरल तरीकों से इसका गाढ़ापन बिल्कुल सही किया जा सकता है।
धीमी आंच पर दाल को खुला रखकर पकाएं
अगर दाल में पानी की मात्रा बहुत अधिक हो गई है, तो सबसे स्वाभाविक और आसान तरीका उसे थोड़ी देर अतिरिक्त पकाना है। बर्तन या कड़ाही से ढक्कन हटा दें और दाल को मध्यम से धीमी आंच पर पकने दें। खुला रखकर उबालने से अतिरिक्त पानी भाप बनकर उड़ने लगता है और दाल धीरे-धीरे अपने प्राकृतिक रूप में गाढ़ी होने लगती है। इस दौरान दाल को बीच-बीच में करछी से चलाते रहना जरूरी है, ताकि वह बर्तन की तली में चिपककर जले नहीं।
दाल के कुछ हिस्से को करछी से मैश करें
दाल की बनावट को गाढ़ा करने का एक और असरदार तरीका उसके दानों को मैश करना है। इसके लिए आप करछी या पोटैटो मैशर का इस्तेमाल कर सकते हैं। पकी हुई दाल के कुछ हिस्से को बर्तन के किनारे पर दबाकर अच्छी तरह घोंट दें। जब दाल के पके दाने टूटकर रसे में घुलते हैं, तो दाल तुरंत गाढ़ी दिखने लगती है। अरहर, मूंग और मसूर की दाल में यह नुस्खा बहुत तेजी से असर दिखाता है और स्वाद पर भी कोई विपरीत असर नहीं पड़ता।
बेसन का हल्का घोल मिलाकर पकाएं
दाल को तुरंत मनचाहा टेक्सचर देने के लिए बेसन का प्रयोग किया जा सकता है। एक कटोरी में एक से दो चम्मच बेसन लें और उसमें थोड़ा सा सादा पानी मिलाकर गांठ रहित घोल तैयार करें। इस पतले घोल को उबलती हुई दाल में धीरे-धीरे डालें और करछी से मिलाते रहें। इसके बाद दाल को कुछ मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें ताकि बेसन का कच्चापन पूरी तरह खत्म हो जाए। इससे दाल बिना स्वाद बदले तुरंत गाढ़ी हो जाती है।
उबले आलू का इस्तेमाल
दाल का गाढ़ापन सुधारने के साथ-साथ उसकी बनावट को मखमली बनाने के लिए उबला आलू एक बेहतरीन विकल्प है। एक छोटे उबले आलू को अच्छी तरह मैश कर लें ताकि उसमें कोई बड़ी गांठ न रहे। इस मैश किए हुए आलू को पतली दाल में डालकर अच्छी तरह मिला दें। आलू दाल के अतिरिक्त पानी को सोखकर उसे प्राकृतिक गाढ़ापन देता है और इससे दाल का टेक्सचर काफी स्मूद हो जाता है।
पहले से बची पकी दाल का मिश्रण
यदि आपके फ्रिज में पहले से रखी कोई पकी हुई गाढ़ी दाल मौजूद है, तो वह पतली दाल को ठीक करने में काम आ सकती है। बची हुई दाल को थोड़ा मैश कर लें या हल्का सा चलाकर पतली दाल में मिला दें। इसके बाद दोनों को साथ में एक उबाल दे दें। इस उपाय से दाल का पारंपरिक स्वाद बना रहता है और बिना किसी बाहरी सामग्री के गाढ़ापन वापस आ जाता है।
चावल के आटे का घोल
चावल का आटा भी तरल व्यंजनों को गाढ़ा करने का एक बढ़िया जरिया है। एक चम्मच चावल के आटे को थोड़े से ठंडे पानी में घोल लें। इस मिश्रण को दाल में डालकर अच्छी तरह मिलाएं और 4 से 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। सांभर या रसम जैसी दक्षिण भारतीय दालों में यह उपाय सबसे ज्यादा मुफीद साबित होता है, क्योंकि यह उनके टेक्सचर को बिना भारी किए संतुलित कर देता है।
मसालों और प्याज-टमाटर का भारी तड़का
घी या तेल में तैयार किया गया गाढ़ा तड़का भी पतली दाल को सुधारने में बेहद काम आता है। तड़का पैन में बारीक कटा प्याज, टमाटर और पसंदीदा मसाले डालकर अच्छी तरह भून लें। जब यह मसाला गाढ़ा पेस्ट जैसा बन जाए, तो इसे दाल में डालकर मिला दें। इससे दाल की बनावट में गाढ़ापन तो जुड़ता ही है, साथ ही उसका स्वाद और महक भी काफी बढ़ जाती है।
मात्रा का ध्यान रखना है जरूरी
दाल को गाढ़ा करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि बेसन या चावल का आटा एकदम से ज्यादा मात्रा में न डालें। अधिक आटा या बेसन डालने से दाल का मूल स्वाद बदल सकता है और वह भारी हो सकती है। शुरुआत हमेशा एक छोटे चम्मच से करें और जरूरत महसूस होने पर ही धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं।



















