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दुर्गा पूजा से पहले घर पर तैयार करें फूलों का बगीचा, गमलों में तुरंत लगाएं ये छह खास किस्मेंजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 11:52 pm (17 मिनट पहले)· 0

दुर्गा पूजा से पहले घर पर तैयार करें फूलों का बगीचा, गमलों में तुरंत लगाएं ये छह खास किस्में

त्योहारी सीजन में पूजा के ताजे फूलों की किल्लत दूर करने के लिए घर की छत या बालकनी में खास पौधे लगाकर तीन हफ्ते में कलियां पाई जा सकती हैं।

दुर्गा पूजा और उसके बाद आने वाले त्योहारी उत्सवों के दौरान पूजा और सजावट के लिए ताजे फूलों की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। अक्सर बाजार में समय पर ताजे फूल नहीं मिल पाते हैं या फिर घरों में रखे गमलों में समय पर फूल नहीं खिलते। इस परेशानी से निपटने के लिए सही किस्म के मौसमी पौधे चुनकर घर पर ही लगातार तीन महीने तक ताजे फूलों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।

त्योहारी सीजन के लिए बेहतरीन मौसमी फूलों के विकल्प

पूर्णिया स्थित ग्रोमर फूड नर्सरी से जुड़े विशेषज्ञ माली विजय कुमार के अनुसार, मौसमी फूलों की सही प्रजाति का चुनाव करने से गमलों में फूलों की कमी पूरी तरह दूर हो जाती है। अगर उपयुक्त किस्मों के पौधे अभी रोपे जाएं, तो सिर्फ तीन सप्ताह के भीतर उनमें फलन शुरू हो जाता है और आने वाले तीन माह तक लगातार फूल खिलते रहते हैं।

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घर के आंगन, बालकनी या छत पर गमलों में रोपने के लिए प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं

  • गेंदा: धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा और घर की सजावट में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक फूल।
  • अड़हुल (गुड़हल): देवी उपासना और तांत्रिक व वैदिक पूजा में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाने वाला फूल।
  • अपराजिता: इसके नीले और सफेद रंग के पुष्प विशेष रूप से दैनिक और विशिष्ट पूजा में प्रयुक्त होते हैं।
  • बालासन (चीरा मीरा): यह किस्म बेहद तेजी से विकसित होती है और भारी तादाद में पुष्प देती है।
  • गुलदाउदी और सदाबहार: ये दोनों ऐसी प्रजातियां हैं जो बहुत कम देखभाल के बावजूद लंबे अरसे तक खिली रहती हैं।

ये सभी पौधे स्थानीय पौधों की दुकानों और बाजारों में आसानी से मिल जाते हैं, जिन्हें किसी भी उपयुक्त आकार के गमले में लगाया जा सकता है।

गमले की मिट्टी तैयार करने और रोपाई का सही तरीका

पौधों के तेजी से विकास और भरपूर कलियां पाने के लिए मिट्टी का मिश्रण सही अनुपात में तैयार करना अनिवार्य है। रोपाई शुरू करने से पहले सूखी और भुरभुरी मिट्टी का चयन करें। इस मिट्टी में जैविक खाद के रूप में वर्मी कंपोस्ट और नमी संतुलन के लिए कोकोपीट को अच्छी तरह मिला लें। जब यह उपजाऊ मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसे गमले में भरकर चुने हुए पौधे को सावधानी से रोपें।

सिंचाई और जड़ों की देखरेख के जरूरी नियम

पौधा लगाने के फौरन बाद गमले में केवल आवश्यकतानुसार ही पानी डालें। गमले में अत्यधिक जलभराव करने से पौधे की जड़ें सड़ने का जोखिम रहता है, इसलिए मिट्टी में केवल हल्की नमी बरकरार रखनी चाहिए। संतुलित नमी और सही पोषण मिलने पर महज तीन हफ्ते में पौधों पर नई कलियां फूटने लगती हैं, जिससे गमले पूरी तरह फूलों से भर जाते हैं और पूरे त्योहारी मौसम में फूलों का अभाव नहीं रहता।

सवाल-जवाब

गमले में लगाए गए इन पौधों में कितने दिनों में फूल आने लगते हैं?
विशेषज्ञ के अनुसार सही किस्म के पौधे लगाने और उचित देखभाल करने पर तीन हफ्ते में कलियां आने लगती हैं।
पूजा और त्योहारी सीजन के लिए कौन से फूल सबसे उपयुक्त हैं?
गेंदा, अड़हुल (गुड़हल), अपराजिता, बालासन (चीरा मीरा), गुलदाउदी और सदाबहार पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माने गए हैं।
गमले के लिए मिट्टी का मिश्रण कैसे तैयार करना चाहिए?
सूखी और भुरभुरी मिट्टी में जैविक खाद के रूप में वर्मी कंपोस्ट और कोकोपीट को अच्छी तरह मिलाकर गमले में भरना चाहिए।
पौधे लगाने के बाद पानी देने में क्या सावधानी रखनी चाहिए?
पौधे में केवल जरूरत के अनुसार पानी दें, क्योंकि अत्यधिक पानी जमा होने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं।
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