भारतीय रसोई में लौंग का उपयोग स्वाद, सुगंध और औषधीय गुणों के कारण बेहद आम है। चाय का जायका बढ़ाना हो या फिर किसी खास पकवान में तड़का लगाना हो, थोड़ी सी लौंग पूरे व्यंजन का स्वाद बदल देती है। हालांकि, बाज़ार में खरीदारी करते समय केवल कम कीमत या दिखने में ठीक लगने वाली सामग्री चुनना नुकसानदेह हो सकता है। कई बार दुकानों पर पुरानी, सीली हुई या प्राकृतिक तेल निकाली जा चुकी लौंग भी बेची जाती है। इस प्रकार की खराब गुणवत्ता वाली सामग्री से बचने के लिए खरीदारी के दौरान लौंग का रंग, उसकी महक, बनावट और ताजगी की ठीक से जांच करना बहुत आवश्यक है।
हाथ से मसलकर सुगंध की जांच करना
लौंग की असली पहचान उसकी तीव्र सुगंध में छिपी होती है। अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग में प्राकृतिक तेल भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो उसे तीखा और मसालेदार गुण प्रदान करते हैं। जब भी बाज़ार से लौंग खरीदें, तो एक-दो दाने हाथ में लेकर हल्का सा मसलकर देखें। यदि मसलते ही तुरंत तेज़, तीखी और मनमोहक सुगंध वातावरण में फैल जाए, तो यह उसकी ताजगी का स्पष्ट प्रमाण है। इसके विपरीत, यदि मसलने के बाद भी सुगंध बेहद हल्की आए या बिल्कुल महक महसूस न हो, तो समझ जाएं कि लौंग काफी पुरानी हो चुकी है या उसमें से आवश्यक तेल पहले ही निकाला जा चुका है।
रंग और रंगत से पहचानें ताजगी
लौंग की ऊपरी रंगत को ध्यान से देखकर भी उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। ताज़ी और उच्च गुणवत्ता वाली लौंग का रंग प्राकृतिक रूप से गहरा भूरा होता है। इसकी कलियां सूखी, चमकदार और साफ सुथरी दिखाई देती हैं। खरीदारी करते समय यदि लौंग का रंग बहुत अधिक फीका पड़े, उस पर धूल जमी महसूस हो, या वह नमी के कारण सीली हुई दिखे, तो ऐसी लौंग लेने से बचना चाहिए। असामान्य रंगत इस बात का संकेत है कि मसाला लंबे समय से खुले में रखा गया था या फिर उसे सही तरीके से संचित नहीं किया गया था।
बनावट और मजबूती पर दें विशेष ध्यान
लौंग की शारीरिक बनावट भी उसकी गुणवत्ता का एक प्रमुख मापदंड है। अच्छी लौंग छूने में सूखी, सख्त और पूरी तरह मजबूत महसूस होती है। उसकी ऊपर की कली टूटी हुई या अत्यधिक सिकुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए। अगर लौंग को उंगलियों के बीच दबाते ही वह कमज़ोर महसूस हो, आसानी से टूट जाए या उसमें सीलन का अहसास हो, तो उसे न खरीदें। पैकेट में बंद लौंग खरीदते समय भी पारदर्शी हिस्से से अंदर की बनावट को गौर से देखें। खराब या सिकुड़ी हुई लौंग घर लाकर मसाले का जायका बिगाड़ने से बेहतर है कि सही बनावट वाले दानों का ही चयन करें।
घर पर करें पानी का आसान टेस्ट
लौंग की गुणवत्ता और उसमें मौजूद प्राकृतिक तेल की जांच के लिए पानी का टेस्ट एक बेहद आसान और सटीक घरेलू तरीका है। इसके लिए एक कांच के गिलास में सादा पानी लें और उसमें दो से तीन लौंग डाल दें। यदि लौंग भारी होकर तुरंत पानी के पेंदे में बैठ जाती है, तो इसका अर्थ है कि वह तेल से भरपूर और उत्तम गुणवत्ता वाली ताज़ी लौंग है। दूसरी ओर, यदि लौंग पानी की सतह पर तैरती रहती है, तो उसकी गुणवत्ता संदिग्ध हो सकती है। तैरने वाली लौंग में अक्सर तेल की कमी होती है और वह अंदर से खोखली या पुरानी हो सकती है।
कली और डंठल के जुड़ाव की जांच
लौंग की कली की बनावट पर बारीक नज़र डालना भी खरीदारी का एक अहम हिस्सा है। एक अच्छी और ताज़ी लौंग के सिर पर बनी कली ठीक से बंद और भरी हुई नज़र आती है। यदि कली पूरी तरह से खिली हुई, बिखरी हुई या अत्यधिक सिकुड़ी हुई दिखे, तो यह लौंग के पुराना होने की निशानी है। इसके अलावा, डंठल के साथ कली का जुड़ाव भी मजबूत होना चाहिए। यदि डंठल और कली का जोड़ ढीला दिखाई दे या लौंग बिना फूल वाली हो, तो उसे खरीदने से परहेज करें। दो-चार दाने अलग से देखकर ही खरीदारी का फैसला करें।
लौंग को सही तरीके से सुरक्षित रखने के नियम
बाज़ार से अच्छी लौंग खरीद लाने के बाद उसे सही ढंग से स्टोर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि लौंग को हवा में खुला छोड़ दिया जाए या नमी वाले स्थान पर रखा जाए, तो उसकी सुगंध और स्वाद समय के साथ नष्ट हो जाते हैं। लौंग को हमेशा एक साफ, सूखे और पूरी तरह एयरटाइट डिब्बे में ही रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इस डिब्बे को रसोई के सिंक या गैस स्टोव के निकट रखने से बचें, क्योंकि इन स्थानों पर गर्मी और वाष्प अधिक होती है। सही स्थान पर सुरक्षित रखी गई लौंग लंबे समय तक अपनी सुगंध और तीखापन बनाए रखती है।



















