पंजाब नेशनल बैंक के निष्क्रिय खातों पर बड़ी कार्रवाई, 10 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी न करने पर बंद होंगे खातेखेल उपकरण निर्माण को पंख देने के लिए मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 1856.67 करोड़ रुपये की नई योजना स्वीकृतएशियाई टेक मंच पर सोनी और सैमसंग को टक्कर देने की तैयारी में जियो, जानिए बाजार विश्लेषकों का आकलननिजीकरण के विरोध में हरियाणा में बिजली संकट गहराया, सरकार ने कर्मचारियों को वार्ता की मेज पर बुलायाइंटरनेट और कृत्रिम मेधा के बीच सुरक्षित नहीं बच्चों की निजी जानकारी, अभिभावक इन अहम कदमों से करें बचावअमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.75 से 4.00 प्रतिशत पर रोका, मुद्रास्फीति पर दी सख्त चेतावनीऐपल के पहले फोल्डेबल फोन की अंदरूनी डिस्प्ले में आई खराबी, कंपनी बदलेगी प्रभावित डिवाइसबड़े प्रकाशकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दखल से लेखकों में आक्रोश, बंद हुआ नोआ चैटबॉटभोजपुरी सिनेमा में सिंगर्स के दबदबे के बीच रवि किशन के शुरुआती संघर्ष पर मनोज तिवारी का खुलासाजॉर्जिया के चेरोकी हाई स्कूल में गोलीबारी की साजिश नाकाम, तीन गिरफ्तार
रोटीदान में तेजपत्ता रखने से क्या होता है? जानिए यह पारंपरिक किचन ट्रिक क्यों है इतनी फायदेमंदजीवनशैली
23 अक्तू॰ 2026, 7:59 pm (5 दिन पहले)· 0

रोटीदान में तेजपत्ता रखने से क्या होता है? जानिए यह पारंपरिक किचन ट्रिक क्यों है इतनी फायदेमंद

कैसरोल में तेजपत्ता डालने का यह पुराना नुस्खा रोटियों को घंटों तक नरम, खुशबूदार और सीलन से मुक्त रखता है।

रसोई घर में काम करना केवल भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पकी हुई चीज़ों को लंबे समय तक सुरक्षित, महकदार और खाने योग्य बनाए रखना भी एक कला है। घरों में अक्सर देखा जाता है कि सुबह के वक्त तैयार की गई रोटियां दोपहर ढलते-ढलते या शाम तक रोटीदान के अंदर पसीने जैसी नमी के कारण गीली हो जाती हैं। कई बार नीचे की परत वाली रोटियां ज्यादा सीलन की वजह से गल जाती हैं या उनमें एक अजीब सी बासी गंध पैदा हो जाती है। इस आम परेशानी से पार पाने के लिए पुरानी पीढ़ियों के पास कई घरेलू उपाय हुआ करते थे, जो आज के समय में भी उतने ही असरदार साबित होते हैं। ऐसा ही एक बेहद आसान और अनोखा तरीका रोटीदान के अंदर एक खास मसाला रखना है!

नमी और सीलन से राहत पाने का तरीका

जब भी कोई व्यक्ति गरमागरम रोटियां सीधे बर्तन के अंदर रखता है, तो अंदर उठने वाली भाप ढक्कन और बर्तन की तली पर पानी की बूंदों के रूप में जम जाती है। इसी अतिरिक्त नमी के कारण सबसे नीचे और सबसे ऊपर रखी रोटियां खराब होने लगती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बर्तन के अंदर सूखी पत्तियां रखने का चलन है। इन पत्तियों में प्राकृतिक रूप से हवा की नमी को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। जब कोई व्यक्ति रोटीदान के निचले हिस्से में या रोटियों की परतों के बीच एक या दो सूखी पत्तियां रख देता है, तो वह सामग्री भाप से पैदा होने वाले अतिरिक्त पानी को अपने अंदर खींच लेती है।

ये भी पढ़ें

बासी गंध दूर भगाकर महक बनाए रखना

लंबे समय तक बंद रहने वाले बर्तनों में रखी रोटियों से कई बार एक तरह की घुटन भरी या बासी हवा की महक आने लगती है। इस प्रकार की गंध के कारण अक्सर घर के सदस्य ऐसी रोटियां खाने से मुंह मोड़ने लगते हैं। इस मसालेदार पौधे में प्राकृतिक रूप से सुगंधित तत्व पाए जाते हैं। इसकी हल्की और भीनी खुशबू बर्तन के भीतर किसी भी तरह की अप्रिय गंध को टिकने नहीं देती। इसकी मौजूदगी की वजह से जब भी कोई बर्तन का ढक्कन उठाता है, तो भोजन में से एक बेहद सोंधी और तरोताजा महक आती है।

कीटाणुओं और फंगस से बचाव

बरसात या उमस भरे मौसम के दौरान पके हुए भोजन में बैक्टीरिया या फफूंद पनपने का खतरा काफी तेजी से बढ़ जाता है। विशेष रूप से यदि रोटी में जरा सी भी नमी रह जाए, तो उसके खराब होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इस पौधे की पत्तियों में कुछ खास प्राकृतिक तत्व और तेल पाए जाते हैं। विभिन्न अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि ये घटक सूक्ष्म जीवों और फंगस के विकास को रोकने में पूरी तरह सक्षम होते हैं। इसके अलावा इसकी तीखी गंध चींटियों और छोटे जीवों को भी प्राकृतिक रूप से दूर रखती है, जिससे भोजन सुरक्षित बना रहता है।

इस्तेमाल करने का सही तरीका

इस घरेलू उपाय का पूरा लाभ उठाने के लिए इसे सही तरीके से आजमाना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले हमेशा साफ, सूखे और साबुत पत्तों का चुनाव करना चाहिए। बर्तन के सबसे निचले हिस्से में एक सूती कपड़ा या साफ नेपकिन बिछाया जाना चाहिए। उस कपड़े के ऊपर या बर्तन की तली में एक से दो पत्तियां व्यवस्थित कर दी जाती हैं। इसके बाद इसके ऊपर अपनी सेकी हुई रोटियां रखकर बर्तन का ढक्कन कसकर बंद कर दिया जाता है। इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए कि एक ही पत्ती को हफ्तों तक लगातार इस्तेमाल न किया जाए, बल्कि हर दो से तीन दिन में या जब पत्ती ज्यादा नमी सोख ले, तब उसे बदल देना चाहिए। रसोई घर के ये छोटे-छोटे तरीके रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने के साथ खाने की बर्बादी को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

सवाल-जवाब

रोटीदान में तेजपत्ता रखने से क्या फायदा होता है?
यह रोटियों को सीलन, गीलेपन, बासी गंध और बैक्टीरिया से बचाता है।
क्या तेजपत्ता रोटियों की नमी सोख सकता है?
हाँ, तेजपत्ते में प्राकृतिक रूप से नमी को सोखने का गुण होता है।
कैसरोल में तेजपत्ता कितनी बार बदलना चाहिए?
हर दो से तीन दिन में या पत्ता ज्यादा नमी सोख लेने पर उसे बदल देना चाहिए।
क्या इस नुस्खे के लिए कोई खास पत्ता चाहिए?
हमेशा साफ, सूखे और साबुत तेजपत्ते का इस्तेमाल करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

तेजपत्ते से रोटी की नमी और महक ठीक हो जाती है, यह तो मान लिया। पर क्या सच में इससे छोटे कीड़े या चींटियाँ भी दूर रहती हैं? मुझे थोड़ा शक है।

Neha Verma@neha-verma·5 दिन पहले

रोटीदान में तेजपत्ता रखने से सच में बासी गंध गायब हो जाती है, मैंने खुद ट्राय किया है।

Meera Joshi@meera-joshi·5 दिन पहले

अरे नेहा जी, सच में? मुझे तो लगा था यह सिर्फ दादी-नानी के नुस्खे हैं जो आज के दौर में काम नहीं आएंगे। कल ही आज़माकर देखती हूँ कि मूड फ्रेश होता है या नहीं।

Nyra Kaif@nyra-kaif·5 दिन पहले

दादी हमेशा हॉटपैक में तेजपत्ता रखती थीं ताकि रोटियां सीलन से गीली न हों। नुस्खा एकदम पुराना है और सच में काम करता है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·5 दिन पहले

अरे नायरा, दादी के नुस्खे सच में कमाल होते हैं! तेजपत्ते की खुशबू से रोटियां महकती भी अच्छी हैं और फंगस का डर भी नहीं रहता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp