गिफ्ट निफ्टी के कारोबारी समय में बड़ा बदलाव, सुबह 5:15 बजे से खुलेगा सत्र और 23.5 घंटे होगी ट्रेडिंगत्योहारी सफाई में चमकेंगे गंदे बिजली के स्विच बोर्ड, रसोई की 5 चीजों से मिनटों में साफ होगी मैलझारखंड में व्यापारियों से रंगदारी मांगने वाले राहुल सिंह और राहुल दुबे पर इंटरपोल का शिकंजा, जारी हुआ रेड कॉर्नर नोटिसलक्ष्मी पूजन की थाली में नया बदलाव, उदयपुर के बाजारों में कौड़ियों और काली हल्दी की मांग में भारी उछालटनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में रुकावट के बाद भारत ने उठाया घरेलू विनिर्माण का कदम, पीयूष गोयल ने दी जानकारीतुला, धनु, मकर और कुंभ पर रहती है शनि देव की विशेष कृपा, कर्म और अनुशासन से खुलते हैं तरक्की के रास्तेगोवर्धन पूजा पर छप्पन भोग का रहस्य, जानिए सात दिन और आठ पहर से जुड़ा यह धार्मिक गणितवेनेजुएला में बाकी 322 राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कराकस के साथ की बातचीतठंड बढ़ते ही आगरा के जूता उद्योग में विंटर बूट्स और क्लोज्ड-टो फुटवियर का उत्पादन तेजउत्तराखंड की पारंपरिक रसोई से सीखें जाखिया के तड़के वाला पहाड़ी भुटवा बनाने का तरीका
मेघालय में पारंपरिक कला और दस्तकारी को बढ़ावा देने के लिए चुने गए 11 गांवमेघालय
3 नव॰ 2026, 7:04 pm (14 मिनट पहले)· 0

मेघालय में पारंपरिक कला और दस्तकारी को बढ़ावा देने के लिए चुने गए 11 गांव

मेघालय सरकार ने राज्य के 11 गांवों को कला एवं शिल्प गांव के तौर पर विकसित करने का फैसला किया है ताकि पारंपरिक हुनर सुरक्षित रहे और कारीगरों को स्थायी रोजगार मिल सके।

मेघालय सरकार ने राज्य की समृद्ध पारंपरिक कलाओं, शिल्पकला और पैतृक हुनर को सहेजने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत राज्य भर में 11 गांवों की पहचान की गई है, जिन्हें पारंपरिक कला और दस्तकारी के केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय दस्तकारों के पारंपरिक कौशल को जीवित रखते हुए उनके लिए टिकाऊ आजीविका के साधन तैयार करना है।

शिलॉन्ग में आयोजित राज्य स्तरीय महोत्सव में घोषणा

मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने शिलॉन्ग स्थित यू सोसो थाम ऑडिटोरियम में आयोजित स्टेट लेवल लिविंग हेरिटेज आर्ट्स एंड क्राफ्ट विलेज फेस्टिवल में भाग लेने के बाद मंगलवार को इस योजना की घोषणा की। यह विशेष उत्सव जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि चिन्हित किए गए ये गांव पारंपरिक प्रथाओं को बचाने और आदिवासी ज्ञान व शिल्पकला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत मंच की भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने X पर लिखा कि सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए निरंतर प्रयासों और सरकारी मदद की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इन 11 कला एवं शिल्प गांवों के माध्यम से सरकार पारंपरिक तौर-तरीकों के संरक्षण के साथ-साथ कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर खड़े कर रही है।

विरासत संरक्षण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर

बदलते सामाजिक और आर्थिक माहौल में पारंपरिक कौशल को जिंदा रखने के लिए संस्थागत सहायता बहुत जरूरी हो गई है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह पूरी पहल तैयार की गई है, जो विरासत संरक्षण को सीधे तौर पर आर्थिक अवसरों से जोड़ती है। इससे स्थानीय कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर के दम पर सम्मानजनक कमाई करने का रास्ता मिलेगा, जिससे युवाओं का रुझान भी इन शिल्पों की ओर बना रहेगा।

स्वतंत्रता सेनानियों और संस्कृति संरक्षकों को श्रद्धांजलि

यू सोसो थाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों को भी नमन किया गया। इसके साथ ही उन सभी प्रमुख विभूतियों को याद किया गया जिन्होंने इलाके की कला, संस्कृति और परंपराओं को समृद्ध बनाने में अहम योगदान दिया है। मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि अपनी मूल जड़ों और विरासत का सम्मान करना बेहद जरूरी है, ताकि मेघालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित और सम्मानित बनी रहे।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

मेघालय सरकार ने कितने गांवों को इस पहल के लिए चुना है?
मेघालय सरकार ने पारंपरिक कला, शिल्प और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 11 गांवों की पहचान की है।
इस योजना की घोषणा किस कार्यक्रम में और कहां की गई?
इसकी घोषणा शिलॉन्ग के यू सोसो थाम ऑडिटोरियम में आयोजित स्टेट लेवल लिविंग हेरिटेज आर्ट्स एंड क्राफ्ट विलेज फेस्टिवल के दौरान की गई।
यह घोषणा किस विशेष दिवस के तहत आयोजित कार्यक्रम में हुई?
यह कार्यक्रम जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
इन गांवों को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य पारंपरिक प्रथाओं और स्वदेशी ज्ञान को संरक्षित करना तथा कारीगरों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp