मेघालय सरकार ने राज्य की समृद्ध पारंपरिक कलाओं, शिल्पकला और पैतृक हुनर को सहेजने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत राज्य भर में 11 गांवों की पहचान की गई है, जिन्हें पारंपरिक कला और दस्तकारी के केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय दस्तकारों के पारंपरिक कौशल को जीवित रखते हुए उनके लिए टिकाऊ आजीविका के साधन तैयार करना है।
शिलॉन्ग में आयोजित राज्य स्तरीय महोत्सव में घोषणा
मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने शिलॉन्ग स्थित यू सोसो थाम ऑडिटोरियम में आयोजित स्टेट लेवल लिविंग हेरिटेज आर्ट्स एंड क्राफ्ट विलेज फेस्टिवल में भाग लेने के बाद मंगलवार को इस योजना की घोषणा की। यह विशेष उत्सव जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि चिन्हित किए गए ये गांव पारंपरिक प्रथाओं को बचाने और आदिवासी ज्ञान व शिल्पकला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत मंच की भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने X पर लिखा कि सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए निरंतर प्रयासों और सरकारी मदद की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इन 11 कला एवं शिल्प गांवों के माध्यम से सरकार पारंपरिक तौर-तरीकों के संरक्षण के साथ-साथ कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर खड़े कर रही है।
विरासत संरक्षण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर
बदलते सामाजिक और आर्थिक माहौल में पारंपरिक कौशल को जिंदा रखने के लिए संस्थागत सहायता बहुत जरूरी हो गई है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह पूरी पहल तैयार की गई है, जो विरासत संरक्षण को सीधे तौर पर आर्थिक अवसरों से जोड़ती है। इससे स्थानीय कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर के दम पर सम्मानजनक कमाई करने का रास्ता मिलेगा, जिससे युवाओं का रुझान भी इन शिल्पों की ओर बना रहेगा।
स्वतंत्रता सेनानियों और संस्कृति संरक्षकों को श्रद्धांजलि
यू सोसो थाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों को भी नमन किया गया। इसके साथ ही उन सभी प्रमुख विभूतियों को याद किया गया जिन्होंने इलाके की कला, संस्कृति और परंपराओं को समृद्ध बनाने में अहम योगदान दिया है। मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि अपनी मूल जड़ों और विरासत का सम्मान करना बेहद जरूरी है, ताकि मेघालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित और सम्मानित बनी रहे।



















