FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में पैराग्वे ने जर्मनी जैसी दिग्गज टीम को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर डाला। नियमित 90 मिनट के खेल के बाद दोनों टीमें 1-1 गोल से बराबरी पर थीं, जिसके बाद मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां पैराग्वे की टीम ज्यादा शांत और सटीक साबित हुई।
यह नतीजा जर्मन फुटबॉल के लिए किसी झटके से कम नहीं है। जर्मनी के लिए यह 2014 विश्व कप खिताब जीतने के बाद पहला नॉकआउट मुकाबला था, यानी टीम को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नॉकआउट स्टेज में खेलने का मौका मिला था। लेकिन यह वापसी जश्न की जगह निराशा में बदल गई, क्योंकि टीम इसी मुकाबले में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई।
मैदान पर कैसा रहा मुकाबला
तय समय में मैच पूरी तरह संतुलित रहा। दोनों टीमों ने एक-एक गोल दागे और स्कोर 1-1 पर अटका रहा, जिससे मुकाबले को अतिरिक्त समय और फिर पेनल्टी शूटआउट तक जाना पड़ा। नॉकआउट राउंड होने की वजह से टाई होने की स्थिति में हार-जीत का फैसला जरूरी था, और आखिरकार यह फैसला स्पॉट किक्स पर टिका।
पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे भारी पड़ा
शूटआउट में पैराग्वे ने 4-3 के स्कोर से बाजी मारी। यह अंतर भले ही छोटा दिखे, लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर एक पूर्व चैंपियन टीम को पेनल्टी में मात देना पैराग्वे के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस जीत के साथ पैराग्वे ने खुद को टूर्नामेंट के अगले चरण के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर पेश कर दिया है।
जर्मनी के लिए ऐतिहासिक निराशा
जर्मनी की टीम के लिए यह हार दोहरी वजह से तकलीफदेह है। पहली वजह यह कि 2014 में विश्व कप जीतने के बाद यह उनका पहला नॉकआउट मुकाबला था, यानी टीम इतने सालों बाद फिर एक बार नॉकआउट फुटबॉल में उतरी थी। दूसरी वजह यह कि इस बहुप्रतीक्षित वापसी में टीम पहले ही मुकाबले में हारकर बाहर हो गई। इससे जर्मन फुटबॉल में एक बार फिर उन्हीं सवालों को हवा मिलेगी कि टीम बड़े नॉकआउट मुकाबलों में दबाव क्यों नहीं झेल पा रही।
राउंड ऑफ 32 का बड़ा दौर
यह मुकाबला उस दौर का हिस्सा था जिसमें राउंड ऑफ 32 के कई अहम मैच खेले जा रहे हैं। इसी चरण में नीदरलैंड्स और मोरक्को के बीच भी मुकाबला हो रहा है, जिस पर फुटबॉल प्रशंसकों की नजर टिकी हुई है। जर्मनी-पैराग्वे मैच के नतीजे ने इस राउंड को और रोमांचक बना दिया है, क्योंकि बड़ी टीमों के लिए भी आगे बढ़ना अब आसान नहीं दिख रहा।



















