बुंदेलखंड क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने के उद्देश्य से बनाए जा रहे भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर की निर्माण गुणवत्ता पर इसके पूरा होने से पहले ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं। करीब 4290 करोड़ रुपये की भारी भरकम लागत से तैयार हो रहे इस फोरलेन नेशनल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा सागर जिले से होकर गुजरता है, जहां हाल ही में सड़क के धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। इतनी बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट का शुरुआती बारिश में ही यह हाल होने से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है और निर्माण कार्य की मजबूती संदेह के घेरे में आ गई है।
बीला के पास 50 फीट सड़क का हिस्सा धंसा
सबसे बड़ी लापरवाही सागर और मोहारी के बीच बीला इलाके के पास देखने को मिली है, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण हाईवे का करीब 50 फीट लंबा हिस्सा पूरी तरह से धंस गया। इसके अलावा, कई अन्य जगहों पर भी सड़क के किनारों से गिट्टी बाहर निकलने लगी है, जो इसके कमजोर आधार को दर्शाती है। सड़क में दरार आने और धंसने के बाद निर्माण एजेंसी ने आनन-फानन में मौके पर पहुंचकर मरम्मत का काम किया। हालांकि, इस 50 फीट धंसी हुई सड़क की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे इस प्रोजेक्ट की हकीकत सबके सामने आ गई है।
आंधी तूफान में गिर गया था साइन बोर्ड
इस हाईवे पर निर्माण से जुड़ी यह कोई पहली समस्या नहीं है। मानसून का सीजन शुरू होने से ठीक पहले आई आंधी और तूफान के दौरान इस फोरलेन पर लगा एक बड़ा साइन बोर्ड टूटकर बीच सड़क पर गिर गया था। उस घटना की वजह से हाईवे पर करीब 2 घंटे तक यातायात पूरी तरह से ठप रहा था और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब जब 4300 करोड़ रुपये की लागत वाली यह सड़क पहली बारिश का हल्का दबाव भी नहीं झेल पा रही है, तो भविष्य में इसके पूरी तरह से चालू होने पर क्या स्थिति होगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति
भोपाल से शुरू होकर कानपुर तक जाने वाले इस पूरे नेशनल हाईवे की कुल लंबाई लगभग 368 किलोमीटर है। वर्तमान में सागर के बहेरिया चौराहे से लेकर मोहनी तक करीब 42 किलोमीटर लंबे फोरलेन हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके आगे बड़ा मलहरा की दिशा में तेजी से काम चल रहा है, जहां साठिया घाटी के पास का कुछ काम अभी भी बचा हुआ है। इस हिस्से के पूरा होते ही एक बड़ा स्ट्रेच यातायात के लिए तैयार हो जाएगा।
एनएचएआई अधिकारी का स्पष्टीकरण
सड़क की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने इसे एक सामान्य बात बताया है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बारिश के मौसम में सड़क के किनारे कट जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनका कहना है कि ऐसा होने पर निर्माण एजेंसी द्वारा तुरंत सुधार कार्य कर दिया जाता है और आगे भी जहां सड़क कटेगी, उसे ठीक कर लिया जाएगा। उनके अनुसार, इस तरह की छोटी समस्याओं से मुख्य सड़क की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
व्यापार और कृषि के लिए अहम है यह कॉरिडोर
भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, छतरपुर और महोबा होते हुए कानपुर तक जाने वाला यह कॉरिडोर केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारा है। यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दो बड़े महानगरों को सीधे जोड़ेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार और कृषि क्षेत्र में तेजी से तरक्की होने की उम्मीद है। इस कनेक्टिविटी का पूरा फायदा उठाने के लिए हाईवे के किनारों पर नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं। लेकिन अगर सड़क की बुनियाद ही कमजोर रही, तो इन आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।




















