भोपाल के पुराने शहर के सुल्तानिया रोड क्षेत्र में स्थित 2.7 एकड़ की अति कीमती वक्फ संपत्ति पर पिछले दो दशकों से चले आ रहे गैर-कानूनी कब्जे पर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। केंद्र सरकार के नए वक्फ प्रावधानों के प्रभाव में आने के बाद हुई इस व्यापक पड़ताल में यह बात सामने आई है कि वक्फ की जमीन पर बिना अनुमति के बाजार संचालित करके और अस्पताल परिसर खड़ा करके हर साल करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी। इस गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी और अनाधिकृत स्वामित्व जताने के मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ ही कब्जाधारियों के विरुद्ध 28.91 करोड़ रुपये का राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरआरसी) भी जारी कर दिया गया है।
20 साल से चल रही थी करोड़ों रुपये की अवैध वसूली
मामले के विस्तृत विवरण के अनुसार, भोपाल के इदारा यतीमखाना शाहजहानी और सुल्तानिया रोड इलाके में फैली 2.7 एकड़ जमीन पर दारुल शफकत समिति नामक एनजीओ के पदाधिकारियों का कब्जा था। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के स्पष्टीकरण के अनुसार, इस पूरे भूखंड से पिछले 20 सालों के दौरान प्रति वर्ष 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किराए के रूप में जुटाई जा रही थी। इस प्रकार दो दशकों में एकत्रित हुई कुल 28.91 करोड़ रुपये की मोटी रकम की भरपाई के लिए बोर्ड ने आधिकारिक वसूली नोटिस जारी किया है।
कब्जाधारियों ने वक्फ बोर्ड की स्पष्ट अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना ही इस जमीन पर सैकड़ों दुकानें खड़ी कर दी थीं। वर्ष 2004-05 से लेकर अब तक इस भूखंड से अर्जित की गई किसी भी प्रकार की किराया आय या व्यय का ब्योरा वक्फ बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण बोर्ड को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
फर्जी शपथ पत्र और नगर निगम की अनुमति से अस्पताल का निर्माण
इस बड़े पैमाने की अनियमितता में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि दारुल शफकत समिति के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान और अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासनिक निकायों को गुमराह करके वक्फ भूमि पर निर्माण कार्य पूरे किए। समिति ने भोपाल नगर निगम में आवेदन करते समय स्वयं को इस 2.7 एकड़ वक्फ संपत्ति का असली और एकमात्र मालिक घोषित कर दिया। फर्जी घोषणा पत्रों और झूठे शपथ पत्रों को आधार बनाकर उन्होंने नगर निगम से भवन निर्माण का नक्शा पास करा लिया और भूखंड पर एक अस्पताल की इमारत खड़ी कर दी।
इतना ही नहीं, जिन निजी चिकित्सकों और संचालकों को यह अस्पताल भवन किराए पर सौंपा गया था, उनके साथ निष्पादित किए गए अनुबंधों और शपथ पत्रों में भी दारुल शफकत समिति ने स्वयं को जमीन का कानूनी स्वामी ही दर्शाया। इस पूरे घटनाक्रम में वक्फ बोर्ड से न तो कोई पूर्व स्वीकृति ली गई थी और न ही किसी प्रकार का प्रशासनिक दस्तावेज प्राप्त किया गया था।
1961 से गजट में दर्ज वक्फ संपत्ति का सच
अभिलेखीय साक्ष्यों से यह बात पूरी तरह से प्रमाणित होती है कि भोपाल की सुल्तानिया रोड स्थित यह 2.7 एकड़ भूमि वर्ष 1961 से ही मध्य प्रदेश शासन के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में वक्फ संपत्ति के रूप में विधिवत अधिसूचित और दर्ज है। वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, दारुल शफकत सोसाइटी को इस बड़े भूखंड के केवल एक अत्यंत सीमित भाग में सामाजिक और धर्मार्थ गतिविधियां संचालित करने की सशर्त अनुमति प्रदान की गई थी।
हालांकि, संस्था के प्रबंधन ने इस सीमित अनुमति का अनुचित लाभ उठाते हुए पूरी 2.7 एकड़ भूमि पर अपना संपूर्ण मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया। 1961 के गजट नोटिफिकेशन के आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद समिति ने वक्फ बोर्ड के अधिकारों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और पूरी संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
इज्तिमा बाजार और 20 वर्षों का व्यावसायिक खेल
इस जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र इज्तिमा बाजार था, जो पिछले 20 वर्षों से लगातार नियमों की अनदेखी करके संचालित किया जा रहा था। इस बाजार के तहत हर साल सैकड़ों अस्थायी और स्थायी दुकानों को किराए पर दिया जाता था। इन दुकानों से प्राप्त होने वाले विशाल राजस्व को वक्फ बोर्ड के खातों में जमा कराने के बजाय समिति के पदाधिकारियों द्वारा अवैध रूप से निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा।
हर साल औसतन 2 करोड़ रुपये से अधिक की इस निरंतर किराए की आय से 20 वर्षों के भीतर 28.91 करोड़ रुपये का बड़ा कोष तैयार हुआ। वक्फ बोर्ड ने अब इस पूरी राशि को अनधिकृत आय मानते हुए इसे सरकारी राजस्व की भांति वसूलने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उम्मीद पोर्टल की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
इस बहुचर्चित अवैध कब्जे और वित्तीय धोखाधड़ी का पर्दाफाश केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए उम्मीद (UMID) पोर्टल के माध्यम से संभव हुआ। नए वक्फ दिशानिर्देशों के तहत उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कुल 14,591 वक्फ संपत्तियों की डिजिटल जांच और भौतिक सत्यापन का कार्य तीव्र गति से चल रहा था। इसी गहन ऑडिट और दस्तावेजी मिलान प्रक्रिया के दौरान सुल्तानिया रोड स्थित इस जमीन के कागजों में भारी विसंगतियां और लंबे समय से चल रही वित्तीय अनियमितता पकड़ में आई।
पोर्टल पर उपलब्ध डेटा और 1961 के गजट रिकॉर्ड्स का मिलान करने पर यह स्पष्ट हो गया कि दारुल शफकत समिति के पास अस्पताल और व्यावसायिक बाजार चलाने का कोई वैध प्रशासनिक आधार नहीं था, जिसके बाद बोर्ड ने त्वरित और सख्त कानूनी कदम उठाए।
शाहजहानाबाद थाने में एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के निर्देश पर भोपाल के शाहजहानाबाद थाना पुलिस ने दारुल शफकत सोसाइटी के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान और अन्य संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और धारा 316(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है, जो धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित हैं।
एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ वक्फ बोर्ड ने 28.91 करोड़ रुपये की बकाया राशि की त्वरित और प्रभावी वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रिवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट (आरआरसी) भी सक्षम राजस्व प्राधिकारी को भेज दिया है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि अदालत में चली लंबी कानूनी लड़ाई में वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला आने के पश्चात ही यह निर्णायक कार्रवाई संभव हो सकी है।
राजनीतिक रसूख और वर्तमान जांच की स्थिति
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम में कब्जाधारियों के राजनीतिक संपर्कों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ की अति मूल्यवान संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से काबिज लोग प्रभावशाली राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं, तथा भोपाल की इस 2.7 एकड़ जमीन पर कब्जा जमाने वाले मुख्य आरोपियों का संबंध कांग्रेस पार्टी से है। राजनीतिक संरक्षण के बल पर ही इतने लंबे समय तक नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जाती रहीं।
फिलहाल शाहजहानाबाद थाना पुलिस ने दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामले की विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस दस्तावेजों की जब्ती, बैंक खातों की जांच और आरोपियों की भूमिका की सघन जांच कर रही है ताकि इस दो दशक पुराने अवैध कब्जे और धोखाधड़ी के मामले में आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।





















