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करौली के भुड़ारे बाजार में 10 रुपये वाले समोसे का जलवा, 15 सालों से स्वाद और कीमत बरकरारखानपान
31 अग॰ 2026, 1:30 pm (51 मिनट पहले)· 2

करौली के भुड़ारे बाजार में 10 रुपये वाले समोसे का जलवा, 15 सालों से स्वाद और कीमत बरकरार

करौली के भुड़ारे बाजार में बाबूलाल राठौर का 10 रुपये का समोसा पिछले 15 वर्षों से लोगों का पसंदीदा बना हुआ है। रोजाना सिर्फ 4 से 5 घंटे लगने वाले इस ठेले पर गरम-गरम समोसे खाने के लिए ग्राहकों की लंबी कतार लगती है।

करौली शहर के भुड़ारे बाजार में हर रोज एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है जहां गरम कड़ाही से समोसे उतरते ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ती है। महज 10 रुपये की सस्ती कीमत और बेमिसाल जायके के कारण बाबूलाल राठौर का यह साधारण-सा ठेला पूरे इलाके में मशहूर हो चुका है। महंगाई के मौजूदा दौर में जब खान-पान की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, तब भी यहां चटपटी हरी और लाल चटनी के साथ परोसा जाने वाला समोसा आज भी पुरानी कीमत पर ही मिल रहा है। पिछले 15 सालों से चल रहे इस ठेले की सबसे अनोखी बात यह है कि इसका स्वाद दिनभर नहीं, बल्कि रोजाना केवल चार से पांच घंटे के सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है।

15 सालों की परंपरा और 10 रुपये की किफायती कीमत

भुड़ारे बाजार में लगने वाला यह ठेला पिछले डेढ़ दशक से स्थानीय लोगों के लिए खान-पान का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। जहां बाजार की अन्य दुकानों पर समोसे के दाम वक्त के साथ बढ़ते चले गए, वहीं बाबूलाल राठौर ने अपने समोसे की कीमत आज भी 10 रुपये ही रखी है। कम दाम में उच्च गुणवत्ता वाला नाश्ता देने की वजह से सिर्फ करौली शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग विशेष रूप से यहां समोसा खाने आते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक, हर आयु वर्ग के लोग इस करारे समोसे के दीवाने हैं।

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स्वादिष्ट मसालों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का राज

इस खास समोसे को तैयार करने वाले विक्रेता बाबूलाल राठौर बताते हैं कि वे स्वाद और सेहत दोनों का ध्यान रखते हैं। समोसे तलने के लिए हमेशा रिफाइंड और सोयाबीन तेल का इस्तेमाल किया जाता है। बाबूलाल का मानना है कि समोसे के असली स्वाद की चाबी उसके आलू और पिसे हुए मसालों के संतुलन में छिपी होती है। इसी वजह से वे भरावन तैयार करने के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले आलू और खास तरह से पिसे मसालों का प्रयोग करते हैं। यही वजह है कि कड़ाही से निकलते ही यह समोसा ग्राहकों की पहली पसंद बन जाता है।

सीमित समय में लगता है ग्राहकों का मेला

बाबूलाल राठौर के समोसा ठेले का एक खास नियम है कि यह पूरा दिन नहीं खुलता। वे रोजाना शाम को लगभग चार से पांच घंटे के लिए ही अपना ठेला लगाते हैं। जैसे ही ठेला सजता है, वहां समोसा प्रेमियों की कतारें लग जाती हैं। ठेला लगाने की समयसीमा सीमित होने के कारण हर कोई जल्दी से जल्दी गरम समोसे का लुत्फ उठाना चाहता है। कड़ाही से समोसा निकलते ही कुछ ही मिनटों में बिक जाता है और दुकान पर लगातार ग्राहकों की चहल-पहल बनी रहती है।

स्थानीय ग्राहकों का भरोसा और पुरानी यादें

पिछले पांच से सात सालों से नियमित रूप से यहां समोसा खाने आ रहे स्थानीय निवासी नरेश जाटव का कहना है कि करौली शहर में ऐसा अनोखा स्वाद आसानी से कहीं और नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि यह समोसा न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि बच्चों को भी बहुत पसंद आता है और जेब पर भारी नहीं पड़ता। 15 वर्षों के लंबे सफर में भुड़ारे बाजार का यह छोटा-सा ठेला महज व्यापार का जरिया नहीं रहा, बल्कि करौली की संस्कृति और पुरानी यादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

सवाल-जवाब

करौली में यह प्रसिद्ध समोसे का ठेला कहाँ स्थित है?
यह समोसे का ठेला राजस्थान के करौली शहर स्थित भुड़ारे बाजार में लगता है।
इस ठेले पर समोसे की कीमत कितनी है?
यहाँ समोसा पिछले 15 सालों से मात्र 10 रुपये में हरी और लाल चटपटी चटनी के साथ मिलता है।
यह ठेला दिन में कितने घंटे के लिए खुलता है?
यह ठेला रोजाना केवल 4 से 5 घंटे ही खुलता है, जिस दौरान समोसा खाने वालों की भारी भीड़ रहती है।
समोसे की दुकान के विक्रेता कौन हैं?
इस प्रसिद्ध ठेले का संचालन बाबूलाल राठौर कर रहे हैं, जो पिछले 15 वर्षों से यह समोसे बना रहे हैं।
समोसे तैयार करने में किन प्रमुख सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
समोसे को रिफाइंड और सोयाबीन तेल में तला जाता है तथा भरावन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले आलू और पिसे मसालों का प्रयोग किया जाता है।
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