मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में साल 2028 में होने वाले भव्य सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को सुगमता से संभालने और सीमावर्ती राज्यों से सड़क संपर्क को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने उज्जैन और राजस्थान के झालावाड़ को जोड़ने वाले 160 किलोमीटर लंबे मेगा फोरलेन हाईवे प्रोजेक्ट के टेंडर को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल दो राज्यों के बीच की दूरी सिमट जाएगी, बल्कि मालवा और हाड़ौती क्षेत्र का सीधा जुड़ाव बहुचर्चित दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के साथ भी स्थापित हो जाएगा।
परियोजना की लागत और निर्माण की समयसीमा
इस पूरी मेगा फोरलेन परियोजना के निर्माण पर 2,721.72 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी। क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया ने इस बात की स्पष्ट जानकारी दी है कि केंद्रीय स्तर पर निविदा प्रक्रिया पूरी तरह से संपन्न हो चुकी है और बहुत जल्द संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) सौंप दिया जाएगा। कार्यादेश जारी होने के तत्काल बाद सड़क निर्माण का काम जमीनी स्तर पर शुरू हो जाएगा। निर्माण एजेंसियों को इस पूरे राजमार्ग कॉरिडोर को तैयार करने के लिए दो वर्ष की सख्त समयसीमा दी गई है, ताकि सिंहस्थ 2028 के शुरू होने से पहले इसे हर हाल में पूरी तरह से चालू किया जा सके। इसके अलावा, सड़क निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले पांच सालों तक इसके रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी भी इन्हीं एजेंसियों के कंधों पर होगी।
दो अलग-अलग चरणों में होगा काम
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस विशाल राजमार्ग परियोजना को सुचारू रूप से और समय पर पूरा करने के लिए इसे दो अलग-अलग चरणों में विभाजित किया है। पहले चरण के विस्तृत प्लान के अंतर्गत, मध्य प्रदेश के खिलचीपुरा गांव से लेकर आकली-काड़िया तक 86.5 किलोमीटर लंबे हिस्से को नई फोरलेन सड़क में तब्दील किया जाएगा। इस विशेष प्राथमिक खंड के निर्माण पर लगभग 1462 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा। वहीं, परियोजना के दूसरे चरण के तहत आकली-काड़िया से लेकर राजस्थान के झालावाड़ में स्थित एनएच-52 जंक्शन तक 72.76 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा। इस दूसरे हिस्से को पूरा करने में करीब 1259 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है।
सड़क सुरक्षा और आधुनिक फ्लाईओवर का निर्माण
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो इस 160 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी करीब 133 किलोमीटर, मध्य प्रदेश की सीमा के भीतर विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 27 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान की सीमा में बनेगा। इस नए निर्माण के साथ-साथ, उज्जैन नगर निगम सीमा से लेकर घोंसला तक जो 27 किलोमीटर का फोरलेन मार्ग पहले से मौजूद है, उसे भी पूरी तरह से नए सिरे से अपग्रेड किया जाएगा। यातायात को पूरी तरह से निर्बाध बनाने के लिए एनएचएआई ने इस पूरे कॉरिडोर पर छह बेहद आधुनिक फ्लाईओवर, कई बड़े और मजबूत पुल, और ठीक 115 वाहन अंडरपास बनाने का खाका तैयार किया है। विशेष रूप से आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के सामने एक नया फ्लाईओवर प्रस्तावित किया गया है, जो स्थानीय जाम से मुक्ति दिलाएगा।
आर्थिक विकास और पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
वर्तमान समय में उज्जैन से झालावाड़ का यह मार्ग कई स्थानों पर बेहद संकरा है, जिसके कारण यहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन इस नए फोरलेन और दर्जनों सुरक्षित कट पॉइंट तथा अंडरपास के बन जाने के बाद सड़क सुरक्षा के परिदृश्य में एक अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। यह नया मार्ग सिंहस्थ 2028 में हाड़ौती और राजस्थान के अन्य हिस्सों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख और सुरक्षित प्रवेश द्वार के रूप में काम करेगा। इसके अतिरिक्त, आगर, सुसनेर, घट्टिया, सोयत और उज्जैन के ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि उत्पादों और औद्योगिक माल को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचने का नया और तेज रास्ता मिलेगा। यह हाईवे आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय उद्योग तीनों ही क्षेत्रों को एक नई और तेज गति प्रदान करेगा।



















