मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से शुक्रवार को सुबह ओबीसी महासभा के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का मामला बेहद अहम है और राज्य सरकार ओबीसी के अधिकारों के संरक्षण के वास्ते पूरी तरह से कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एक न्यायसंगत और तर्कसंगत व्यवस्था कायम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी और तमाम ओबीसी संगठनों से बातचीत करके माननीय न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा गया था।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार इस संवेदनशील मामले को टालने के बजाय इसका एक स्थायी और समुचित हल निकालने के लिए काम कर रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की नीति और नीयत दोनों ही बिल्कुल स्पष्ट हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर आदरणीय न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का बिंदुवार अध्ययन किया जा चुका है और सर्वोच्च न्यायालय के सामने राज्य सरकार का पक्ष पूरी मजबूती से रखने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार शाम को मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में स्टेट ऑफ एम.पी. वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य मामले में एसएलपी दायर कर दी गई है।
प्रतिनिधिमंडलों ने सौंपा ज्ञापन
इस मुलाकात के दौरान विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मध्य प्रदेश में ओबीसी के सत्ताईस प्रतिशत आरक्षण पर उच्च न्यायालय के नौ अक्टूबर दो हजार छब्बीस के फैसले के संदर्भ में अद्यतन आंकड़ों के आधार पर एक संवैधानिक समाधान निकालने की मांग की गई, ताकि ओबीसी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जा सके। मुख्यमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडलों में दिल्ली से आई ओबीसी महासभा शामिल थी, जिसका नेतृत्व एडवोकेट वैभव सिंह और इंजीनियर महेंद्र सिंह लोधी ने किया। इसके अलावा ग्वालियर से आए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महासभा के संस्थापक विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज धाकड़ ने किया, जिन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपने-अपने तर्क और पक्ष रखे।





















