मानसून की वापसी के तुरंत बाद मुंबई की आबोहवा में धूल और प्रदूषण का असर दिखने लगा है, जिसे देखते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से पैदा होने वाले कचरे पर कड़े कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। शहर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए निगम प्रशासन ने 12 अक्टूबर से मलबा या मिट्टी ढोने वाले वाहनों की डिजिटल निगरानी अनिवार्य कर दी है। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई भी वाहन बिना अधिकृत और चालू व्हीकल ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम यानी वीटीएमएस के निर्माण सामग्री या मलबा ले जाता पाया गया, तो उस पर प्रति ट्रिप 25,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम का प्राथमिक लक्ष्य खुले में मलबे की डंपिंग रोकना और उससे हवा में उड़ने वाली धूल पर तुरंत नियंत्रण पाना है।
अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण न कराने पर भी बराबर की कार्रवाई
प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई केवल सड़कों पर चलने वाले डंपर और ट्रकों तक ही सीमित नहीं रहेगी। जिन निर्माण स्थलों ने अब तक नागरिक निकाय के विशेष 'मुंबई डेब्रिस कंट्रोल एंड ट्रैकिंग सिस्टम' यानी एमडीसीटीएस पोर्टल पर अपना अनिवार्य पंजीकरण पूरा नहीं कराया है, उन पर भी समान रूप से 25,000 रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा। शहर की हवा को स्वच्छ और रहने योग्य बनाए रखने के उद्देश्य से सभी 26 म्युनिसिपल वार्डों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। इन सभी प्रशासनिक वार्डों में निर्माण स्थलों और संबंधित वाहनों की औचक जांच के लिए तुरंत प्रवर्तन अभियान शुरू करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे नियमों की अनदेखी करने वाले बिल्डरों और ठेकेदारों पर लगाम कसी जा सकेगी।
अपशिष्ट उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता में बड़ा अंतर
वित्तीय राजधानी मुंबई में कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जहां रोजाना 8,000 टन से अधिक निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट निकलता है। इसके विपरीत, दहिसर और शिलफाटा में संचालित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन मात्र 1,200 टन मलबा प्रोसेस करने की है। उत्पादन और प्रसंस्करण के इस भारी अंतर के चलते शहर के खाली भूखंडों, सड़कों के किनारों, प्राकृतिक नालों, खाड़ियों, मैंग्रोव जंगलों और जलाशयों के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मलबा फेंका जाता रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए 24 अगस्त को एमडीसीटीएस पोर्टल की शुरुआत की गई थी, जिससे कचरा उत्पन्न होने वाले स्रोत से लेकर अधिकृत निपटान स्थल तक की पूरी यात्रा को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सके।
डिजिटल ट्रैकिंग और अब तक हुए पंजीकरण का ब्योरा
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निकाय ने सभी निजी डेवलपर्स, ठेकेदारों और सरकारी निर्माण एजेंसियों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण और विस्तृत अपशिष्ट प्रबंधन योजना जमा करना अनिवार्य किया है। इसके अलावा मलबे की ढुलाई में शामिल प्रत्येक वाहन में जीपीएस आधारित वीटीएमएस उपकरण लगा होना आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वाहन केवल निर्धारित और स्वीकृत परिवहन मार्गों से ही गुजर रहे हैं। पोर्टल पर 24 अगस्त से 9 अक्टूबर के दौरान कुल 220 पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, कुल 109 पंजीकरण बिल्डरों और डेवलपर्स की ओर से किए गए, जबकि 44 पंजीकरण ट्रांसपोर्टरों द्वारा कराए गए। इसके अतिरिक्त 19 पंजीकरण बीएमसी के अपने ठेकेदारों के हैं, 17 मलबे और मिट्टी के बाहरी खरीदारों के हैं, 15 कॉर्पोरेट संस्थाओं के हैं और 4 पंजीकरण विभिन्न सरकारी एजेंसियों के हैं। इस अवधि में किसी भी आम नागरिक का कोई पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज नहीं हुआ है।























