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राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने वाले विपक्षी दल में शामिल नहीं होगी उद्धव ठाकरे की शिवसेनामहाराष्ट्र
9 अक्तू॰ 2026, 5:05 pm (2 घंटे पहले)· 0

राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने वाले विपक्षी दल में शामिल नहीं होगी उद्धव ठाकरे की शिवसेना

चुनाव सुधार और एसआईआर आंदोलन के तहत विपक्षी गठबंधन के नेता आज राष्ट्रपति से मिलेंगे, लेकिन अंतिम समय में मिले आमंत्रण के चलते उद्धव ठाकरे की पार्टी ने दूरी बना ली है।

चुनावी व्यवस्था और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे विपक्ष के साझा अभियान के बीच अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी विगत तीन दिनों से दिल्ली की सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार की रात विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करने तय समय पर पहुंचेगा, मगर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने इस साझा बैठक से पूरी तरह अलग रहने का निर्णय लिया है।

देर से आमंत्रण मिलने और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला

शिवसेना (यूबीटी) के इस कदम के पीछे अचानक मिला निमंत्रण मुख्य वजह बताया जा रहा है। पार्टी के अनुसार उन्हें बेहद अंतिम समय में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी दी गई, जिससे राजधानी पहुंचना व्यावहारिक नहीं रहा। इसके अलावा उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई में अपने सांसदों और क्षेत्रीय प्रभारियों के साथ पहले से तय संगठनात्मक बैठक कर रहे हैं। वहीं वरिष्ठ नेता संजय राउत भी दो दिवसीय यात्रा के तहत पुणे में मौजूद हैं, जिसके कारण पार्टी का कोई भी सांसद दिल्ली की इस संयुक्त बैठक का हिस्सा नहीं बन सका।

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विपक्ष की एकजुटता पर सत्ता पक्ष के तीखे सवाल

उद्धव गुट के इस फैसले पर सत्तारूढ़ दल ने तीखा हमला बोला है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता आशीष शेलार ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शेलार के मुताबिक, असंतुष्ट और पराजित राजनेता केवल प्रधानमंत्री और सरकार के विरोध के नाम पर एकजुट होने का दिखावा कर रहे हैं, जिसमें उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी।

गठबंधन के आंतरिक तालमेल पर सियासी बहस

आशीष शेलार ने विपक्षी दलों के पुराने अंतर्विरोधों की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि जब ममता बनर्जी अपनी बात रखती हैं तो कांग्रेस के लोग हंसी उड़ाते हैं, वहीं समाजवादी पार्टी कांग्रेस को उसकी राजनीतिक हैसियत याद दिलाने की बात करती है। अब महत्वपूर्ण मौके पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी दूरी बनाकर गठबंधन के आपसी तालमेल की कलई खोल दी है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एसआईआर के खिलाफ लड़ाई में विपक्षी एकता बिखरने लगी है या फिर यह केवल नेताओं की पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का नतीजा है।

दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रखेगा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

तय कार्यक्रम के अनुसार विपक्षी गठबंधन के दस प्रमुख नेता रात आठ बजे राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति सचिवालय ने शुक्रवार सुबह ही इस भेंट के समय की पुष्टि की थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की औपचारिक मांग करना है। राष्ट्रपति से मिलने जा रहे इस दस सदस्यीय दल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं।

सवाल-जवाब

शिवसेना (यूबीटी) राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में क्यों शामिल नहीं हुई?
पार्टी का कहना है कि उन्हें अंतिम समय में निमंत्रण मिला और उनके शीर्ष नेता मुंबई तथा पुणे में पूर्व निर्धारित बैठकों में व्यस्त थे।
विपक्षी प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कब मिलेगा?
यह दस सदस्यीय विपक्षी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार रात 8 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करेगा।
विपक्षी दल राष्ट्रपति से मिलकर क्या मांग रखने जा रहे हैं?
विपक्षी नेता चुनाव प्रक्रिया और एसआईआर के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे।
इस दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हैं?
इस दल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं।
बीजेपी नेता आशीष शेलार ने इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आशीष शेलार ने कहा कि महाविकास अघाड़ी और विपक्षी गठबंधन में सब ठीक नहीं है तथा यह असफल नेताओं का समूह है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·19 मिनट पहले

अचानक मिले आमंत्रण पर इतनी राजनीति क्यों हो रही है? जब पहले से मीटिंग तय थीं, तो इसमें हैरानी कैसी।

Ravikash Gupta@ravikash·36 मिनट पहले

अंतिम समय के बुलावा भेजने पर तो हमारे यहाँ भी लोग शादी या मीटिंग में जाना छोड़ देते हैं, फिर राजनीति में तो वैसे ही तनातनी रहती है।

Li Wei@li-wei·36 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है आपकी, पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति या गठबंधन की राजनीति में ऐसे 'अंतिम समय' के बहाने अक्सर बड़े संदेश दे जाते हैं!

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

अंतिम समय में आमंत्रण मिलने का बहाना बड़ा अजीब है। अगर साथ खड़े होने की नीयत हो, तो शेड्यूल अपने आप एडजस्ट हो जाता है, दूरी बनाने के लिए तो बस एक बहाना काफ़ी होता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·56 मिनट पहले

रोहन भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब मैं पिछले साल एक चुनावी रैली कवर कर रहा था, तब भी बड़े नेताओं के बीच ऐसा ही आखिरी वक्त का ड्रामा देखा था, जहाँ समय की कमी सिर्फ बहाना होती है।

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