महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कांग्रेस पर राजनीतिक अवसरवादिता और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया संबोधन को सोशल मीडिया मंच पर साझा करते हुए उन्होंने विपक्षी दल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। चव्हाण ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा अपनी राजनीतिक सुविधा और स्वार्थ के अनुसार ही अपने तेवर और रुख बदलती रहती है, जो उसके पारंपरिक राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है।
सहयोगी दलों की सरकारों और चुनावी असफलताओं पर उठाए सवाल
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि कई राज्यों में बीते 40-40 वर्षों से कांग्रेस का अपना कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच सका है। ऐसे क्षेत्रों में केवल उनके गठबंधन सहयोगियों के नेतृत्व में ही सरकारें चलती रही हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है तो वे वोट चोरी का शोर मचाने लगते हैं, लेकिन दशकों से अपनी गिरती साख और जमीनी हकीकत पर पूरी तरह चुप्पी साध लेते हैं। अपनी टिप्पणी में उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का रवैया उल्टे चोर द्वारा कोतवाल को डांटने जैसा है।
पश्चिम बंगाल में अमित शाह का कांग्रेस पर प्रहार
इस पूरे राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस संबोधन से जुड़ी है, जो उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल की बैठक के दौरान दिया था। कोलकाता में पार्टी विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने देश के अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस की कमजोर होती राजनीतिक स्थिति का विस्तार से जिक्र किया था। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के कई बड़े हिस्सों में लंबे समय से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और उसका कोई मुख्यमंत्री तक नहीं बन पाया है।
अमित शाह ने कांग्रेस को चुनावी झटकों के बाद अपनी गलतियों का निष्पक्ष आत्ममंथन करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि जब से उन्होंने पार्टी की कमान संभाली है, तब से देश भर के मतदाताओं ने बार-बार चुनावों के माध्यम से कांग्रेस के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है।
विपक्षी गठबंधन की एकता और भविष्य पर तंज
अमित शाह ने विपक्षी मोर्चे ‘INDIA’ गठबंधन की वर्तमान स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में यह पूरा गठबंधन एक बार फिर आंतरिक दबावों के चलते बिखरने की कगार पर पहुंच गया है। इस बयान के जरिए उन्होंने न केवल कांग्रेस की रणनीतिक क्षमता बल्कि विपक्षी एकजुटता के दावों को भी कठघरे में खड़ा किया। रविंद्र चव्हाण द्वारा इस भाषण को आगे बढ़ाने के बाद दोनों राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग और अधिक तेज हो गई है।



















