मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने के लिए एक विशाल महात्वाकांक्षी योजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तान से विरार तक बनने जा रहा यह नया सी-लिंक प्रोजेक्ट अपनी विशालता और तकनीकी विशिष्टताओं के कारण देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई लगभग 55.12 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जो इसे मौजूदा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बेहद खास बनाती है। इस सी-लिंक के निर्माण के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र में सफर करना पहले की तुलना में बेहद सुगम और तेज हो जाएगा। वर्तमान समय में इस पूरी परियोजना के विभिन्न चरणों के तहत प्रशासनिक तैयारियां और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है।
जमीन अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा नेटवर्क
इस मेगा प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए वर्तमान में बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल लगभग 104.28 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता आंकी गई है, जिसमें से करीब 20.2 हेक्टेयर जमीन की पहचान उत्तान के आसपास के क्षेत्र में कर ली गई है। इस चिन्हित जमीन का मुख्य उपयोग उत्तान के लिए एक मजबूत कनेक्टर के निर्माण में किया जाएगा। एमएमआरडीए द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से कनेक्टर्स के निर्माण के लिए ही जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का यह पहला कनेक्टर सीधे शहर की मुख्य परिवहन व्यवस्था के साथ जुड़ेगा और आगे चलकर यह वर्सोवा भयंदर कोस्टल रोड से भी अपनी पहुंच बना लेगा, जिससे यातायात का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार होगा।
पुल और कनेक्टर्स की संरचना
उत्तान-विरार सी-लिंक प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 55.12 किलोमीटर है, जिसे बहुत ही सुनियोजित तरीके से विभाजित किया गया है। इसमें समंदर के ऊपर बनने वाला मुख्य ब्रिज लगभग 24.35 किलोमीटर लंबा होगा, जबकि विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले कनेक्टर्स की कुल लंबाई 30.77 किलोमीटर तय की गई है। इन कनेक्टर्स में से 9.32 किलोमीटर का हिस्सा विशेष रूप से उत्तान के लिए होगा, जबकि वसाई के लिए 2.5 किलोमीटर और विरार के लिए सबसे लंबा यानी 18.95 किलोमीटर का कनेक्टर तैयार किया जा रहा है। विरार में बनने वाला यह 18.95 किलोमीटर लंबा कनेक्टर सीधे तौर पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जाकर कनेक्ट होगा। यह सी-लिंक मौजूदा अटल सेतु से भी अधिक लंबाई वाला होगा, जो इसे क्षेत्र की सबसे बड़ी समुद्री परियोजनाओं में शामिल करता है।
समय की बचत और सिग्नल फ्री सफर
यह परियोजना जब पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी, तब यात्रियों को मरीन ड्राइव से लेकर विरार तक पूरी तरह सिग्नल फ्री रास्ता मिलेगा। अभी के समय में मरीन ड्राइव से विरार तक की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है, जिसे तय करने में यातायात की भीड़भाड़ के कारण 2 से 3 घंटे का लंबा समय लग जाता है। लेकिन इस आधुनिक सी-लिंक के चालू हो जाने के बाद इसी दूरी को महज 45 मिनट के भीतर ही तय किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त यह नया मार्ग वाधवान डीप सी पोर्ट से भी जोड़ा जाएगा। इस रास्ते के शुरू होने के बाद वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और भयंदर से विरार तक की दूरी मात्र 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
लागत, समय सीमा और रणनीतिक महत्व
इस विशाल उत्तान-विरार सी-लिंक को पूरी तरह से 6 लेन का बनाया जा रहा है, जो आधुनिक एक्सेस कंट्रोल और नेविगेशन प्रणालियों से लैस होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 58,754.71 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के पहले यानी फेज-1 को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पूरे मार्ग की शुरुआत साउथ टर्मिनल के पास भयंदर के उत्तान से होगी और फिर यह समंदर पर बने पुल के रास्ते वसाई क्रीक को पार करते हुए अंत में पालघर जिले के विरार में समाप्त होगा। इस कोस्टल सी-लिंक के पूरा होने से कोस्टल रिंग का दायरा पूरा हो जाएगा और नरीमन पॉइंट से विरार तक की यात्रा बेहद आसान हो जाएगी।
मुंबई में समुद्री पुलों का बढ़ता दायरा
मुंबई महानगर क्षेत्र में पहले से ही समंदर पर 2 बड़े पुल बने हुए हैं और वर्तमान में 2 अन्य नए प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है। इस प्रकार आने वाले समय में मुंबई के पास कुल 4 बड़े समुद्री ब्रिज होंगे। वर्तमान में सबसे लंबा ब्रिज अटल सेतु है, जो लगभग 21.8 किलोमीटर लंबा है और इसका 16.5 किलोमीटर हिस्सा समंदर के ऊपर स्थित है। यह अटल सेतु दक्षिण मुंबई के शिवरी को नवी मुंबई के न्हावा शेवा से जोड़ता है। इसके अलावा बांद्रा-वरली सी लिंक एक केबल आधारित पुल है जो 5.6 किलोमीटर की लंबाई के साथ बांद्रा को वरली से जोड़ता है। अब वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और उत्तान-विरार सी लिंक जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर भी काम जारी है, जो भविष्य के शहरी परिवहन की रूपरेखा तय करेंगे।
























