मणिपुर के कांगपोकपी जिले में तनाव उस वक्त बेकाबू हो गया जब पड़ोसी सेनापति जिले से कई दिनों से लापता दो नवयुवकों के शव बरामद किए गए। शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और रविवार रात को जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए पथराव किया, जिसके जवाब में जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस हिंसक टकराव में आंसू गैस का गोला लगने से एक प्रदर्शनकारी के सिर में गंभीर चोट आई, हालांकि अधिकारियों ने उसकी हालत स्थिर बताई है।
सड़कें अवरुद्ध और जलते टायरों के बीच बढ़ा तनाव
विरोध प्रदर्शन के दौरान गुस्साए लोगों ने कई महत्वपूर्ण सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थर और लकड़ी के लट्ठे डालकर आवागमन पूरी तरह रोक दिया। उपद्रवियों ने मुख्य रास्तों पर टायर जलाकर आगजनी की, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने मोर्चा संभाला और काफी मशक्कत के बाद कुछ अवरुद्ध रास्तों से मलबा हटाकर यातायात को आंशिक रूप से बहाल कराया। हिंसा प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
केले के बागान से बोरे में बरामद हुए शव
यह पूरा मामला दो युवकों के अचानक लापता होने से जुड़ा हुआ है। 21 वर्षीय टी चोंगलोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हांगसिंग 29 अक्टूबर को ताफौ कुकी गांव से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए थे। दोनों युवकों की तलाश के लिए चलाए गए सघन अभियान के दौरान रविवार सुबह सेनापति जिले के एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित केले के बागान में उनके शव मिले। दोनों शवों को बोरियों में बंद करके फेंका गया था। शवों की ऐसी दर्दनाक हालत देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने तत्काल हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी।
नेताओं ने की निंदा और जांच की मांग
इस नृशंस घटना पर मणिपुर की उप मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने कड़ा रोष जताया और जवाबदेही तय करने का आह्वान किया। किपगेन ने कहा कि युवकों की सुरक्षित वापसी की उम्मीदों से तलाशी शुरू हुई थी लेकिन इसका अंत बेहद दुखद रहा, इसलिए इस मामले की पूरी जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। वहीं उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो ने हत्याओं की भर्त्सना करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी असहमति या शिकायत के आधार पर मानव जीवन छीनने को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी तरफ नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (एनपीओ) ने शवों की बरामदगी की परिस्थितियों पर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है।
संगठनों की तीखी मांगें और अंतिम संस्कार पर गतिरोध
कांगपोकपी स्थित कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने इस घटना को लेकर तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। संगठन ने उप मुख्यमंत्री लोसी दिखो के इस्तीफे की मांग की है। इसके अतिरिक्त संगठन ने मांग उठाई है कि ताफौ कुकी गांव को सेनापति के पुलिस अधीक्षक के अधिकार क्षेत्र से हटाकर कांगपोकपी के पुलिस अधीक्षक के दायरे में लाया जाए। संगठन ने यह भी दो टूक घोषणा की है कि जब तक इस दोहरे हत्याकांड के जिम्मेदार आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक दोनों युवकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए गांव नहीं ले जाया जाएगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान जारी
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कांगपोकपी और सेनापति जिलों की सीमा पर सुरक्षाबलों ने चौकसी बढ़ा दी है। मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और असम राइफल्स की संयुक्त टुकड़ियां दोनों जिलों के सीमावर्ती इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य पुलिस बल, कोबरा, सीआरपीएफ, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के पूर्व में स्थित सामान्य क्षेत्र और एसपी रोड के आसपास गहन सर्च ऑपरेशन चलाया है ताकि शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।





















