इंफाल स्थित सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) सभागार में 78वें सूचना एवं जनसंपर्क दिवस समारोह के दौरान आधिकारिक सूचना तंत्र को आधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ओइनम सुनील सिंह और आईपीआर सचिव नीता अराम्बम ने विभाग की कार्यप्रणाली को समय की मांग के अनुरूप ढालने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। बैठक में सरकारी सूचनाओं को बिना किसी देरी के मीडिया संस्थानों तक पहुंचाने, स्थानीय भाषा में संचार को फिर से सक्रिय करने और तेजी से उभरते डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक सुव्यवस्थित पंजीकरण नीति तैयार करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
सत्यापित सरकारी सूचनाओं का समय पर वितरण आवश्यक
समारोह के मुख्य अतिथि ओइनम सुनील सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि निदेशालय को अपनी व्यावसायिक दक्षताओं को लगातार मजबूत करना चाहिए। उनका कहना था कि जब सरकारी विभागों से सत्यापित और प्रामाणिक सूचनाएं बिना किसी विलंब के मीडिया तक पहुंचेंगी, तभी दैनिक समाचार पत्रों और अन्य संचार माध्यमों को समय पर जरूरी अपडेट मिल सकेंगे। इससे न केवल प्रशासनिक कदमों और जनहितैषी योजनाओं की कवरेज का दायरा बढ़ेगा, बल्कि नागरिकों को भी समय रहते सही और भरोसेमंद जानकारी प्राप्त हो सकेगी। त्वरित सूचना तंत्र की मदद से गलत सूचनाओं और अफवाहों पर भी समय रहते रोक लगाई जा सकती है।
मणिपुरी भाषा में संचार का दायरा बढ़ाने की अपील
प्रशासनिक संपर्क को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के लिए ओइनम सुनील सिंह ने मणिपुरी भाषा (मीतेइलोन) के व्यापक इस्तेमाल की पुरजोर वकालत की। उन्होंने याद दिलाया कि निदेशालय के पास पहले इस भाषा में नियमित रूप से समाचार और विज्ञप्तियां जारी करने की एक सुदृढ़ व्यवस्था मौजूद थी। मणिपुर के सभी 36 समुदायों के बीच आपसी संपर्क और साझा बातचीत के एक प्रमुख माध्यम के रूप में मणिपुरी भाषा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सरकारी प्रचार-प्रसार में इसका दायरा बढ़ाया जाता है, तो इससे न केवल स्थानीय भाषा का संरक्षण और संवर्धन होगा, बल्कि राज्य के आम नागरिकों के लिए सरकारी नीतियों को समझना भी कहीं अधिक सुगम हो जाएगा। उन्होंने डीआईपीआर के अधिकारियों से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विमर्श करने और मणिपुरी भाषा में समाचार वितरण की व्यवस्था को पुनः बहाल व विस्तारित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
डिजिटल मीडिया नीति और संस्थागत इतिहास की समीक्षा
इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए मीडिया सलाहकार ने एक समर्पित डिजिटल मीडिया नीति तैयार करने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने सुझाव दिया कि ऑनलाइन समाचार माध्यमों की लगातार बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए डीआईपीआर के अधीन डिजिटल मीडिया संगठनों के लिए एक औपचारिक पंजीकरण प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, जिससे जवाबदेही तय हो सके।
इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईपीआर सचिव नीता अराम्बम ने विभाग की दोहरी भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराना और जनता के साथ निरंतर जनसंपर्क बनाए रखना शामिल है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सूचनाएं पलक झपकते ही वैश्विक स्तर पर फैल जाती हैं, जिससे सही और भ्रामक दोनों तरह की सामग्री तुरंत लोगों तक पहुंच सकती है। ऐसी परिस्थिति में आधिकारिक संचार की सटीकता और जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, विशेषकर विभाग की नई वेबसाइट के माध्यम से। संस्थागत इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इस विभाग की स्थापना 1949 में हुई थी, जिसे 1974 में पूर्ण निदेशालय का दर्जा मिला। इसके बाद वर्ष 1975 में विभाग की गतिविधियों को विभिन्न जिला मुख्यालयों तक औपचारिक रूप से विस्तारित किया गया था।




















