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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी जनता दल यूनाइटेड, वाराणसी में निशांत कुमार ने बनाई एनडीए रणनीतिभारत
1 नव॰ 2026, 7:59 pm (1 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी जनता दल यूनाइटेड, वाराणसी में निशांत कुमार ने बनाई एनडीए रणनीति

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन से उत्तर प्रदेश के लिए जनता दल यूनाइटेड की चुनावी रणनीति की शुरुआत की है। पार्टी एनडीए गठबंधन के तहत सीटें हासिल कर पूर्वांचल और अवध के जिलों में अपने सामाजिक आधार को मजबूत करना चाहती है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड भी अब पड़ोसी राज्य के चुनावी अखाड़े में सक्रिय हो गई है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी के प्रमुख चेहरे निशांत कुमार ने 1 नवंबर 2026 को वाराणसी में कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक कर चुनावी शंखनाद किया। इस सभा के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया कि उनकी पार्टी राज्य में अपने कैडर को लामबंद करते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के एक सक्रिय साझीदार के तौर पर मैदान में उतरेगी।

वाराणसी की बैठक और जमीनी संगठन को सक्रिय करने की योजना

निशांत कुमार ने रविवार को आयोजित बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के लंबे इंतजार को रेखांकित करते हुए कहा कि संवाद का यह सिलसिला अब नियमित रूप से जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने नेता नीतीश कुमार के विकास मॉडल और राजनीतिक विचारों को जन-जन तक ले जाएं, ताकि उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में विकास की गति को और तेज किया जा सके।

बैठक के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए एनडीए को और सशक्त करने पर जोर दिया। उनका मानना है कि जैसे-जैसे वर्ष 2027 का चुनाव करीब आ रहा है, पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी ऊर्जा के साथ जुटना होगा ताकि गठबंधन की सरकार बनाने के संकल्प को पूरा किया जा सके। इसके लिए पार्टी नेतृत्व बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगातार संगठनात्मक बैठकों का ताना-बाना बुन रहा है।

पूर्वांचल और अवध के सामाजिक समीकरणों पर पार्टी की नजर

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सियासत में जनता दल यूनाइटेड का दांव लगाना अचानक लिया गया फैसला नहीं है। इसके पीछे गहरा सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण काम कर रहा है। पूर्वांचल के प्रमुख जिलों जैसे वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशांबी, प्रयागराज और जौनपुर में कुर्मी समुदाय की आबादी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इसके अलावा अवध क्षेत्र के रोहनिया और बाराबंकी जैसे इलाकों में भी इस समाज की खासी मौजूदगी है।

नीतीश कुमार को इस समुदाय के भीतर एक प्रमुख और सर्वमान्य राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर देखा जाता रहा है। इसी प्रभाव को भुनाने के इरादे से पार्टी उत्तर प्रदेश के इस सामाजिक आधार को अपने साथ जोड़ना चाहती है। पहले नीतीश कुमार के दौर में भी इस तरह के प्रयास हुए थे, और अब उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी के नेतृत्व को कमान सौंपी गई है ताकि सीमावर्ती इलाकों में पार्टी के प्रभाव को चुनावी ताकत में बदला जा सके।

राष्ट्रीय विस्तार और सीट बंटवारे की रणनीति

बिहार के बाहर पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी चुनावी मौजूदगी दर्ज कराने के बाद अब पार्टी हिंदी पट्टी के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अपनी स्थायी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार की सत्ता में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चल रही पार्टी चाहती है कि इस रणनीतिक साझेदारी का विस्तार उत्तर प्रदेश में भी दिखे। आंतरिक रणनीतिकारों का मानना है कि वर्ष 2027 के चुनाव में गठबंधन के तहत पार्टी को कम से कम 8 से 10 से अधिक सीटें मिलनी चाहिए।

राज्य में करीब 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव की प्रारंभिक तैयारी का खाका भी तैयार किया जा रहा है, ताकि गठबंधन के भीतर बातचीत के दौरान पार्टी का दावा मजबूत बना रहे। उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में अपनी स्वतंत्र पहचान और अपना अलग वोट बैंक खड़ा करने के लिए पार्टी इस गठबंधन साझेदारी को बेहद अहम मान रही है।

एनडीए के भीतर नए समीकरण और भविष्य का रोडमैप

नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को संभालने वाले चेहरे के तौर पर देखे जा रहे निशांत कुमार का यह अभियान पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक प्रयोग की शुरुआत माना जा रहा है। वाराणसी से शुरुआत करने के बाद अब संगठन ने लखनऊ, बलिया, बाराबंकी और पूर्वांचल के अन्य प्रमुख जिलों में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने का पूरा कार्यक्रम तय किया है।

निशांत कुमार की सौम्य और विवादों से दूर रहने वाली कार्यशैली पूर्वांचल के युवा वर्ग और पटेल समुदाय के जागरूक मतदाताओं को जोड़ने का काम कर सकती है। हालांकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर पहले से मौजूद अपना दल (सोनेलाल) इसी पटेल वोट बैंक का प्रतिनिधित्व करता रहा है। ऐसे में जनता दल यूनाइटेड के पूर्वांचल में सीधे तौर पर उतरने से गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और कुर्मी राजनीति के प्रभाव को लेकर एक नया शक्ति संतुलन और खींचतान देखने को मिल सकती है।

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सवाल-जवाब

वाराणसी में जेडीयू की बैठक में निशांत कुमार ने क्या घोषणा की?
उन्होंने घोषणा की कि जनता दल यूनाइटेड उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करेगी और 2027 का विधानसभा चुनाव एनडीए के सहयोगी दल के रूप में लड़ेगी।
जेडीयू उत्तर प्रदेश के किन क्षेत्रों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है?
पार्टी पूर्वांचल के वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशांबी, प्रयागराज, जौनपुर और अवध के रोहनिया तथा बाराबंकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
जेडीयू 2027 के यूपी चुनाव में कितनी सीटों की मांग करने की तैयारी में है?
पार्टी एनडीए गठबंधन के तहत 8 से 10 से अधिक सीटों की उम्मीद कर रही है, जबकि वह करीब 60 सीटों पर अपनी प्रारंभिक तैयारी कर रही है।
वाराणसी के बाद पार्टी के अगले कार्यक्रम किन शहरों में प्रस्तावित हैं?
पार्टी ने लखनऊ, बलिया, बाराबंकी और पूर्वांचल के अन्य जिलों में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है।
एनडीए के भीतर जेडीयू की एंट्री से किस दल के साथ राजनीतिक टकराव की संभावना है?
एनडीए के भीतर पहले से पटेल वोट बैंक का प्रतिनिधित्व कर रहे अपना दल (सोनेलाल) के साथ सीटों और प्रभाव को लेकर खींचतान की संभावना बन सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·46 मिनट पहले

बिहार के बाहर अपनी जमीन तलाश रही जेडीयू के लिए पूर्वांचल में उतरना एक दाو तो है, पर क्या बीजेपी इन्हें आसानी से मनचाही सीटें दे देगी?

Ravikash Gupta@ravikash·46 मिनट पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही सवाल है! जब तक आर्थिक और राजनीतिक समीकरण नहीं बैठते, सीटों का बंटवारा आसान नहीं होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

वाराणसी से जेडीयू का इस तरह उतरना साफ संकेत है कि 2027 के चुनाव में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे पर पेंच फंस सकता है। अगर कुर्मी वोटों का समीकरण साधा गया, तो पूर्वांचल में खेल दिलचस्प होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन जी, बात सही है। वाराणसी में ऐसा जमावड़ा जुटाने से एनडीए के भीतर सीट के सौदेबाजी में दबाव तो बढ़ेगा ही।

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