वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर व्यापक असर डाला है। यूरो के मुकाबले डॉलर में हालिया तेजी के बाद कारोबारी अब संयुक्त राज्य अमेरिका के ताजा मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार सहभागियों की नजर विशेष रूप से अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स यानी पीसीई प्राइस इंडेक्स पर टिकी है, जिसे नीतिगत फैसलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस रिपोर्ट के जारी होने से ठीक पहले प्रमुख मुद्राओं, सरकारी बॉन्ड यील्ड, सोने और डिजिटल संपत्तियों में संतुलित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
यूरो पर ब्याज दरों के अंतर का गहरा असर
यूरोपीय संघ की एकल मुद्रा यूरो अमेरिकी डॉलर के सामने लगातार दबाव का सामना कर रही है। यूरो और डॉलर की विनिमय दर गिरकर मध्य 2025 के निचले स्तर तक पहुंच गई है। इस कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के बीच नीतिगत सख्ती को लेकर बाजार में बना अंतर है। वित्तीय बाजारों में फेडरल रिजर्व द्वारा आगे भी ब्याज दरों को ऊंचा रखने या जरूरत पड़ने पर बढ़ोतरी करने की संभावनाओं को यूरो क्षेत्र की तुलना में ज्यादा आंका जा रहा है।
कॉमर्ज बैंक की विश्लेषक थू लान गुयेन के आकलन के मुताबिक यूरो बनाम डॉलर की गिरावट काफी हद तक फेडरल रिजर्व और ईसीबी के बीच दरों के अंतर को दर्शाती है। हालांकि उन्होंने यह भी इंगित किया कि ब्याज दरों के बुनियादी अंतर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर जरूरत से ज्यादा खिंचा हुआ प्रतीत होता है। यदि फेडरल रिजर्व आगे अतिरिक्त दर वृद्धि का ठोस संकेत देने में विफल रहता है, तो डॉलर में अब तक हुई बढ़त एक सीमित गिरावट या पुलबैक के प्रति संवेदनशील हो सकती है। थू लान गुयेन के अनुसार, यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी मौद्रिक सख्ती जारी रखने की इच्छा जताता है, तब डॉलर अपनी बढ़त को बरकरार रखने में सक्षम होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पृष्ठभूमि में मौजूदा डॉलर की मजबूती काफी नाजुक दिखती है, खासकर इसलिए क्योंकि यह यूरो क्षेत्र और अमेरिका के बीच ब्याज दर अंतर के विकास के मुकाबले पहले से ही जरूरत से ज्यादा फैली हुई नजर आती है।
आईएनजी और कॉमर्ज बैंक के नजरिए में बुनियादी फर्क
वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों के बीच डॉलर के भविष्य को लेकर दो भिन्न दृष्टिकोण सामने आए हैं। कॉमर्ज बैंक जहां डॉलर की हालिया मजबूती को संरचनात्मक रूप से कमजोर और फेडरल रिजर्व के नरम रुख के प्रति संवेदनशील मानता है, वहीं दूसरी तरफ आईएनजी का मानना है कि अमेरिकी लंबी अवधि की यील्ड का ऊंचा स्तर डॉलर को सहारा देता रहेगा। आईएनजी के अनुसार, यदि पीसीई आंकड़ों में महंगाई को लेकर सख्त अनुमान सामने आते हैं, तो डॉलर में होने वाली किसी भी अल्पकालिक गिरावट को सीमित रखा जा सकेगा।
बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि कोर पीसीई में महीने-दर-महीने 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, और इसे रोजगार के मजबूत आंकड़ों का समर्थन मिलता है, तो अक्टूबर में होने वाली संभावित दर वृद्धि की संभावना लगभग 20 आधार अंक तक बढ़ सकती है। जोखिम भावना में किसी भी स्थिरता से डॉलर की रैली की चमक थोड़ी फीकी जरूर हो सकती है, लेकिन नए आर्थिक आंकड़े निर्णायक भूमिका निभाएंगे। जब तक बाजार में अक्टूबर की फेड दर वृद्धि की संभावनाओं को दोबारा आंके जाने की गुंजाइश बनी हुई है, तब तक डॉलर की तेजी के चरम पर पहुंचने की घोषणा करना जल्दबाजी होगी।
अन्य वैश्विक मुद्राओं में हलचल: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन
अमेरिकी डॉलर के व्यापक प्रभाव के बीच अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.6950 के करीब दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। इस गिरावट की प्रमुख वजह ऑस्ट्रेलिया का अगस्त महीने का अंतर्निहित सीपीआई आंकड़ा रहा, जो बाजार के अनुमानों से कमजोर रहा। इस कमजोर मुद्रास्फीति आंकड़े ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की उम्मीदों पर पूरी तरह ठंडा पानी फेर दिया। इसके अलावा, चीन के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं मिल सका, भले ही उस समय अमेरिकी डॉलर की बढ़त थमी हुई थी।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के स्तर से नीचे बनी रही। जापान के कमजोर घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों के बावजूद जापानी येन को समर्थन मिला। बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे द्वारा भविष्य में दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को मजबूती दी। साथ ही, डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस जोड़ी को नीचे बनाए रखने में योगदान दिया।
सोने और बिटकॉइन की चाल पर ब्याज दरों की छाया
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार भी अमेरिकी ब्याज दरों और सरकारी बॉन्ड यील्ड के संकेतों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यूरोपीय कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में स्थिरता का रुख रहा और यह 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को मंगलवार को छुए गए दो महीने के उच्च स्तर से पीछे खींच लिया, जिससे पीली धातु को कुछ सहारा मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त नीतिगत रुख बने रहने की आशंकाओं ने सोने की बढ़त को सीमित रखा है, क्योंकि गैर-यील्ड वाली इस संपत्ति में नए दांव लगाने से पहले निवेशक प्रमुख अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
डिजिटल एसेट बाजार में बिटकॉइन लगभग 83,000 डॉलर के स्तर पर स्थिर होता दिखा। हफ्ते की शुरुआत में खरीदार बिटकॉइन को 85,000 डॉलर के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बंद कराने में नाकाम रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और इस सप्ताह जारी होने वाले कई अहम वृहद आर्थिक आंकड़ों के चलते क्रिप्टो बाजार के निवेशक फिलहाल पूरी तरह सतर्कता बरत रहे हैं।
पीसीई प्राइस इंडेक्स के जारी होने का समय
बाजार की निगाहें अब पूरी तरह से आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 12:30 जीएमटी पर अगस्त महीने के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स यानी पीसीई प्राइस इंडेक्स के आंकड़े जारी करेगा। वित्तीय विश्लेषक और ट्रेडर इस आंकड़े को बेहद बारीकी से ट्रैक करते हैं, क्योंकि पीसीई प्राइस इंडेक्स फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है। इस आंकड़े से मिलने वाले संकेत यह तय करने में मददगार साबित होंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाली बैठकों में मौद्रिक नीति को किस दिशा में ले जाएगा।



















