वैश्विक मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर की चमक फीकी पड़ने से यूरो में सुधार देखने को मिला है। यूरोपीय कारोबारी घंटों में यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 1.1356 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर ट्रेडर्स के रुख में आए बदलाव ने डॉलर इंडेक्स पर दबाव बनाया है। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स के हालिया बयानों के बाद बाजार सहभागियों ने ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को थोड़ा कम आंका है, जिससे प्रमुख मुद्रा जोड़े को आवश्यक सहारा मिला।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर जॉन विलियम्स का रुख
अमेरिकी डॉलर में आई हालिया कमजोरी का सीधा संबंध न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स के उस बयान से है, जिसमें उन्होंने सितंबर में ब्याज दर वृद्धि के बाद आगे किसी जल्दबाजी से इनकार किया था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को अगली ब्याज दर वृद्धि तुरंत लागू करने की कोई तात्कालिक हड़बड़ी नहीं है। इस बयान के सामने आने के बाद निवेशकों ने आक्रामक नीतिगत सख्ती की उम्मीदों को घटा दिया। हालांकि, विलियम्स ने यह भी साफ किया कि नीतिगत सख्ती का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन करती है, तो इस वर्ष एक और ब्याज दर वृद्धि संभव है। इस संतुलित दृष्टिकोण ने बाजार में यह संदेश दिया कि दरें बढ़ सकती हैं, लेकिन उनकी रफ्तार पहले जितनी तेज नहीं होगी।
जर्मनी के मुद्रास्फीति आंकड़े तय करेंगे यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दिशा
यूरोपीय मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से जर्मनी के प्रारंभिक हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी के सितंबर महीने के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। यह डेटा 12:00 जीएमटी पर जारी होना निर्धारित है। बाजार के अनुमानों के मुताबिक, जर्मनी में वार्षिक आधार पर मुद्रास्फीति दर 3.1 प्रतिशत तक तेज हो सकती है, जो अगस्त के अंतिम आंकड़ों में 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मासिक आधार पर भी कीमतों का दबाव 0.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले महीने यह वृद्धि 0.2 प्रतिशत रही थी। मुद्रास्फीति के इन आंकड़ों का सीधा असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के आने वाले नीतिगत फैसलों और ब्याज दर अनुमानों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
यूरो बनाम डॉलर के तकनीकी स्तर और बाजार की स्थिति
तकनीकी चार्ट पर यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर के लिए शुरुआती प्रतिरोध 20 दिवसीय ईएमए पर 1.1464 के स्तर पर स्थित है। यदि दैनिक आधार पर मुद्रा जोड़ा इस स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहता है, तो इसे समग्र ट्रेंड के बदलाव के बजाय एक सुधारात्मक रिकवरी के तौर पर देखा जाएगा। दूसरी तरफ, यदि इस मुद्रा जोड़े में 29 सितंबर के निचले स्तर 1.1312 से नीचे कोई निर्णायक गिरावट आती है, तो बिकवाली का एक नया दौर शुरू हो सकता है। मौजूदा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़े का भाव 1.13 के आसपास चल रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.14 से 0.26 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 23 पर पहुंच गया है जो ओवरसोल्ड स्थिति दर्शाता है, जबकि एमएसीडी -0.01 पर मंदड़िया रुख दिखा रहा है। पिवट पॉइंट 1.14 पर है, जहां पहला और दूसरा समर्थन स्तर 1.13 के पास है।
वैश्विक मुद्राओं और अन्य परिसंपत्तियों की चाल
बुधवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर साबित हुआ, जिसमें ब्रिटिश पाउंड के सामने डॉलर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर एशियाई सत्र में 0.6950 के करीब दो महीने के निचले स्तर पर रहा, क्योंकि अगस्त के ऑस्ट्रेलियाई अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे और चीनी पीएमआई आंकड़ों से भी इसे सहारा नहीं मिला। वहीं, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन 157.00 के नीचे दबाव में रहा। बैंक ऑफ जापान की सख्ती की उम्मीदों और हस्तक्षेप के जोखिम ने कमजोर घरेलू फैक्टरी उत्पादन और खुदरा बिक्री के बावजूद येन को मजबूती दी। यूरोपीय सत्र में सोना 4,200 डॉलर के स्तर के करीब कंसोलिडेशन के दौर में रहा, जहां गिरती बॉन्ड यील्ड से इसे समर्थन मिला। दूसरी ओर, बिटकॉइन 83,000 डॉलर के करीब कंसोलिडेट कर रहा है क्योंकि निवेशक 85,000 डॉलर के स्तर से ऊपर टिकने में विफल रहने के बाद सतर्क हैं।
अमेरिकी पीसीई मूल्य सूचकांक पर टिकी बाजार की निगाहें
वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजर अब संयुक्त राज्य अमेरिका के ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस द्वारा जारी किए जाने वाले व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मूल्य सूचकांक के अगस्त आंकड़ों पर है। यह आंकड़ा 12:30 जीएमटी पर सार्वजनिक किया जाएगा। पीसीई मूल्य सूचकांक को फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना माना जाता है। इसी सूचकांक की दिशा तय करेगी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में अपनी मौद्रिक नीति को किस हद तक कड़ा या लचीला बनाए रखेगा। यदि यह डेटा मुद्रास्फीति में निरंतर वृद्धि दर्शाता है, तो डॉलर को फिर से बढ़त मिल सकती है, जिससे यूरो की मौजूदा बढ़त सीमित हो सकती है।



















