ब्रिटिश पाउंड को इस हफ्ते सरकार के शीर्ष पर हुए तेज़ बदलाव से शुरुआती सहारा मिला, क्योंकि एंडी बर्नहैम औपचारिक रूप से लंदन स्थित 10 डाउनिंग स्ट्रीट में अपना कामकाज संभाल रहे हैं। कॉमर्ज़बैंक की विश्लेषक थू लान न्गुयेन के मुताबिक बाज़ार ने इस बदलाव को इस उम्मीद के साथ पढ़ा है कि बीते कुछ सालों से चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अब शायद थमने वाली है। हालांकि उनका साफ कहना है कि अगर ब्रिटेन की गहरी आर्थिक दिक्कतों पर काम नहीं हुआ, तो यह भरोसा ज़्यादा दिन नहीं टिकेगा।
नेतृत्व बदलते ही क्यों मज़बूत हुआ पाउंड
बर्नहैम ने सत्ता का जो हस्तांतरण पूरा किया है, वह हैरान करने वाले ढंग से शांत और सहज रहा। उनके पूर्ववर्ती ने महज़ पिछले महीने ही इस्तीफा दिया था, और उसके बाद इतनी जल्दी और बिना किसी बड़े टकराव के कमान बदल जाना अपने आप में एक संकेत माना जा रहा है। बाज़ार ने नेतृत्व में इस तेज़ बदलाव को शुरू में पाउंड की मज़बूती के रूप में इनाम दिया। न्गुयेन के अनुसार बाज़ार मानो यह दांव लगा रहा है कि बार-बार के घोटालों और राजनीतिक अस्थिरता का जो दौर हाल के वर्षों की पहचान बन गया था, वह अब खत्म होने की ओर है।
बर्नहैम के सामने दोहरी परीक्षा
असली सवाल यह है कि क्या बर्नहैम सचमुच ज़्यादा स्थिरता दे पाएंगे। न्गुयेन के शब्दों में,
"क्या बर्नहैम वाकई ज़्यादा स्थिरता दे पाएंगे, यह अभी देखना बाकी है।"उनके सामने चुनौती दोहरी है। एक तरफ उन्हें सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में जान फूंकनी है, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक वित्त यानी सरकारी खज़ाने को भी पटरी पर लाना है। और इन दोनों काम में वे पूरी तरह वित्तीय बाज़ारों के भरोसे पर निर्भर हैं, क्योंकि निवेशकों का यकीन ही उन्हें उधार जुटाने और अपनी योजनाएं चलाने की गुंजाइश देगा।
सुस्त ग्रोथ, भारी कर्ज़ और बढ़ती लागत
चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ब्रिटेन इस समय ठहरी हुई आर्थिक वृद्धि, ऊंचे कर्ज़ और बढ़ती लागत से जूझ रहा है। इस माहौल में अगर बर्नहैम इन दोनों में से किसी एक भी मोर्चे पर नाकाम रहते हैं, तो पाउंड को लेकर जो सकारात्मक भावना फिलहाल दिख रही है, वह तेज़ी से उलट सकती है। फिर भी कम से कम अल्पकाल में बाज़ार नई सरकार को संदेह का लाभ देने के मूड में है, यानी उन्हें खुद को साबित करने का थोड़ा वक्त मिलेगा।
कब तक टिकेगा 'बर्नहैम उत्साह'
विश्लेषक मानती हैं कि यह शुरुआती जोश, जिसे कुछ लोग 'बर्नहैम यूफोरिया' कह रहे हैं, कुछ समय तक बना रह सकता है। लेकिन इसमें एक बड़ा जोखिम भी छिपा है। जैसे-जैसे उनका कार्यकाल आगे बढ़ेगा, राजनीतिक और आर्थिक हकीकतें ज़्यादा साफ नज़र आने लगेंगी, और तब शुरुआती उत्साह की जगह एक तरह की गंभीरता और संयम ले सकता है। यानी हनीमून का दौर हमेशा नहीं चलेगा।
अभी कहां खड़ा है पाउंड
ताज़ा बाज़ार आंकड़ों के मुताबिक GBP/USD फिलहाल करीब 1.34 के आसपास कारोबार कर रहा है और पिछले बंद भाव से लगभग सपाट यानी 0.13% नीचे है। बीते 52 हफ्तों में यह जोड़ी 1.30 से 1.38 के दायरे में रही है। तकनीकी रूप से देखें तो RSI 54 पर है, जो न बहुत गरम और न बहुत ठंडा, यानी संतुलित स्थिति दिखाता है। कीमत बॉलिंजर बैंड के भीतर है और ADX महज़ 18 पर होना यह बता रहा है कि अभी कोई मज़बूत रुझान नहीं, बल्कि सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव चल रहा है। कुल मिलाकर तस्वीर यही है कि राजनीतिक स्थिरता ने पाउंड को थोड़ा सहारा ज़रूर दिया है, पर बाज़ार की असली परीक्षा आने वाले महीनों में आर्थिक नतीजों से होगी।



















