लंबे समय से बाजार की चाल के उलट चल रहा माइक्रोन टेक्नोलॉजी (MU) का शेयर आखिरकार गिरावट के सामने झुक गया। 23 जून 2026 को इस चिप कंपनी के शेयर में 13.18% की तेज गिरावट दर्ज की गई और भाव 159.61 अंक टूट गया। खास बात यह है कि यह बड़ी गिरावट कंपनी की अर्निंग रिपोर्ट जारी होने से ठीक एक दिन पहले आई है। आइए समझते हैं कि शेयर क्यों फिसला और क्या इसमें जल्द वापसी की उम्मीद है।
हाल तक माइक्रोन उन गिनी-चुनी टेक कंपनियों में शामिल था, जो पूरे बाजार में चल रही गिरावट को मात दे रहा था। टेक सेक्टर में जहां ज्यादातर शेयर दबाव में थे, वहीं माइक्रोन हरे निशान में टिका हुआ था। लेकिन अब यह शेयर भी बड़े बाजार के रुझान के साथ बह गया।
अर्निंग से पहले क्यों टूटा शेयर
सोमवार, 22 जून 2026 को जब टेक शेयर नीचे की ओर जा रहे थे, तब भी माइक्रोन (MU) अच्छी बढ़त बना रहा था। इस अलग तरह की तेजी की एक बड़ी वजह कंपनी की 24 जून 2026 को आने वाली अर्निंग रिपोर्ट मानी जा रही थी। दूसरी ओर, पूरे बाजार में आई गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस समझौते पर दबाव इसलिए बढ़ा है क्योंकि इजरायल लेबनान पर हमले रोकने को तैयार नहीं दिख रहा।
अगर यह शांति समझौता सिरे नहीं चढ़ता, तो होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर बंद हो सकता है, जिससे दुनिया में एक और ऊर्जा संकट खड़ा होने का खतरा है।
SK हाइनिक्स के फैसले का असर
माइक्रोन (MU) के भाव में गिरावट की एक वजह प्रतिद्वंद्वी कंपनी SK हाइनिक्स का कदम भी हो सकता है। SK हाइनिक्स ने अपने संसाधन पारंपरिक DRAM की ओर मोड़ने के लिए HBM4 का उत्पादन धीमा कर दिया है। इस फैसले से AI मेमोरी बाजार को लेकर सवाल खड़े हो गए। निवेशकों ने इसे बाजार में जरूरत से ज्यादा सप्लाई के संकेत के तौर पर पढ़ा और मौके का फायदा उठाते हुए मुनाफावसूली कर ली।
माइक्रोन (MU) की यह ताजा गिरावट बड़े बाजार रुझान पर देर से आई प्रतिक्रिया भी हो सकती है। हो सकता है कि निवेशक अर्निंग रिपोर्ट में अच्छे नतीजों की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन SK हाइनिक्स के संसाधन मोड़ने के बाद उन्होंने बाहर निकलने का फैसला कर लिया।
क्या होगी जल्द वापसी
आज बाद में अर्निंग रिपोर्ट आने के बाद माइक्रोन (MU) के शेयर में रिकवरी देखने को मिल सकती है। एक मजबूत Q3 योजना और ऊंची आमदनी निवेशकों के भरोसे को नई ताकत दे सकती है। हालांकि, मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों से चुनौतियां बनी रह सकती हैं।













