अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुस्ती का रुख देखने को मिला। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं में आई कमी ने घरेलू मुद्रा की बढ़त को थाम दिया है। दूसरी ओर, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की ताजा बैठक के विवरण जारी होने से पहले विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारी अमेरिकी नीतिगत रुख और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। मुद्रा विनिमय बाजार में यह जोड़ी 158.35 के आसपास मजबूती के साथ कारोबार कर रही है, जहां डॉलर को लगातार समर्थन मिलता नजर आ रहा है।
बैंक ऑफ जापान की दरों को लेकर घटती उम्मीदें
टोक्यो में नीति निर्माताओं का रुख इस समय यह दर्शाता है कि वे पूर्व में की गई दर वृद्धि के आर्थिक असर को समझने के लिए अतिरिक्त वक्त चाहते हैं। बैंक ऑफ जापान के बोर्ड सदस्य इस बात की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं कि पिछली बढ़ोतरी ने घरेलू वित्तीय स्थिति को किस तरह प्रभावित किया है। इसी कारण निकट भविष्य में अगली दर वृद्धि को लेकर जल्दबाजी से बचा जा रहा है।
ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप के आधार पर तय हो रहे बाजार अनुमानों से साफ संकेत मिलता है कि चालू महीने में ब्याज दर बढ़ने की संभावना घटकर लगभग 12% रह गई है। पिछले सप्ताह की शुरुआत में यह संभावना 40% तक आंकी जा रही थी। हालांकि, बाजार का यह भी अनुमान है कि यदि दिसंबर की आगामी बैठक को शामिल कर लिया जाए, तो दरों में बदलाव की संभावना उछलकर 90% के करीब पहुंच जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाजार अल्पावधि में नरमी और साल के अंत तक संभावित कड़े कदम का अनुमान लगा रहा है।
अमेरिकी रोजगार आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिका के आर्थिक मोर्चे पर तस्वीर कुछ अलग संकेत दे रही है। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा शुक्रवार को जारी श्रम बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में नॉनफार्म पेरोल में केवल 29K का इजाफा हुआ। यह संख्या अगस्त के 133K की तुलना में काफी कम है और बाजार द्वारा लगाए गए 90K के अनुमान से भी काफी कमजोर रही है। इसी के साथ बेरोजगारी दर भी अगस्त के 4.1% से बढ़कर सितंबर में 4.2% पर दर्ज की गई। कमजोर नौकरियों के इन आंकड़ों के बाद व्यापारियों ने चालू महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं पर अपने दांव कम कर दिए हैं।
इन आंकड़ों के बावजूद फेडरल रिजर्व के अधिकारी श्मिड ने नीतिगत मामले में सख्त और आक्रामक रुख प्रदर्शित किया है। उनके वक्तव्य को एफएक्सएस स्पीचट्रैकर स्कोर पर 8/10 का स्तर दिया गया, जो इसके 7.5/10 के ऐतिहासिक औसत से ऊपर है। श्मिड ने जोर देकर कहा कि मुद्रास्फीति लगातार परेशान करने वाली बनी हुई है और फेडरल रिजर्व को अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई मूल्य वृद्धि के सबसे बड़े चालकों में से एक बनकर उभरा है। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक की साख दांव पर लगी है और लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड में तेजी के बावजूद छोटी अवधि की दरों पर काम किया जाना बाकी है, जो यह दर्शाता है कि बॉन्ड बाजार की विपरीत परिस्थितियों के बीच भी नीतिगत सख्ती बरकरार रखी जा सकती है।
इसी बीच, एफएक्सएस फेड सेंटिमेंट इंडेक्स 0.34 अंक बढ़कर 137.91 के स्तर पर पहुंच गया। यह सूचकांक न्यूट्रल 100 के स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समग्र नीतिगत दृष्टिकोण अभी भी सख्त दायरे में है। मजबूत स्पीच स्कोर के साथ यह तेजी डॉलर को टिकाऊ मजबूती प्रदान कर रही है, क्योंकि बाजार लंबे समय तक सख्त मौद्रिक व्यवस्था बने रहने की संभावना मान रहा है।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख चार्ट स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो इस मुद्रा जोड़ी की रिकवरी पर निकट अवधि में दबाव बना हुआ है। चार्ट पर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए और ऊपरी बोलिंगर बैंड ऊपर की ओर प्रतिरोध पैदा कर रहे हैं, जिससे तेज उछाल सीमित हो रहा है। हालांकि, मौजूदा भाव मध्य बोलिंगर बैंड के ऊपर टिके रहने में सफल रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 56.27 के स्तर पर है, जो मध्यम रूप से सकारात्मक मोमेंटम दर्शाता है, लेकिन यह अभी तक दीर्घावधि औसत द्वारा तय मंदी के दबाव को पूरी तरह पार नहीं कर पाया है।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला बड़ा प्रतिरोध 159.55 पर 100-दिवसीय एसएमए के पास मौजूद है, जिसके बाद अगला रुकावट स्तर 159.80 के करीब ऊपरी बोलिंगर बैंड पर बनता है। गिरावट की स्थिति में तत्काल सहारा 156.90 पर स्थित मध्य बोलिंगर बैंड प्रदान कर रहा है। यदि 158.38 के हालिया धुरी बिंदु के नीचे बिकवाली का दबाव गहराता है, तो निचला बोलिंगर बैंड 154.00 के आसपास एक मजबूत सुरक्षात्मक आधार के रूप में काम कर सकता है।
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, इस समय यह जोड़ी 158.42 पर कारोबार कर रही है, जबकि इसका पिछला बंद 157.96 पर था, जो 0.29% की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच दर्ज है और वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर है। तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 57 पर है, जबकि एमएसीडी 0.14 पर सिग्नल रेखा -0.13 के मुकाबले 0.26 हिस्टोग्राम के साथ बुलिश रुझान दिखा रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 157.44, 50-दिवसीय ईएमए 158.00 और 200-दिवसीय ईएमए 157.75 पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर निकलने पर गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। दैनिक अस्थिरता एटीआर 1.25 पर है, जबकि मुख्य पिवट 158.32, पहला प्रतिरोध 158.61, दूसरा प्रतिरोध 158.80, पहला समर्थन 158.13 और दूसरा समर्थन 157.84 पर स्थित है।
जापानी मुद्रा के बुनियादी कारक और सुरक्षित निवेश की भूमिका
वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में जापानी येन सबसे अधिक खरीदी और बेची जाने वाली मुद्राओं में शामिल है। इसका वास्तविक मूल्य मोटे तौर पर जापानी अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों, जापान और अमेरिका के बॉन्ड प्रतिफल के अंतर तथा व्यापारियों के जोखिम दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
मुद्रा नियंत्रण बैंक ऑफ जापान के मुख्य दायित्वों में से एक है, इसलिए इसके कदम बाजार में काफी अहमियत रखते हैं। केंद्रीय बैंक ने अतीत में विनिमय बाजार में सीधे हस्तक्षेप कर येन के मूल्य को घटाने का प्रयास भी किया है, हालांकि मुख्य व्यापारिक साझेदारों के राजनीतिक दबाव के कारण यह कदम बार-बार नहीं उठाया जाता। 2013 से 2024 के दौरान बैंक ऑफ जापान की अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति ने येन को कमजोर किया, क्योंकि वैश्विक केंद्रीय बैंकों के साथ इसकी नीतिगत दूरी लगातार बढ़ती गई। हाल के समय में जब इस अति-उदार रुख को धीरे-धीरे वापस लिया जाने लगा, तब जाकर येन को कुछ सहारा मिला।
बीते एक दशक में अति-उदार व्यवस्था पर टिके रहने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य वैश्विक बैंकों के साथ अंतर काफी चौड़ा हो गया था। इसके चलते अमेरिका और जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल का फासला बढ़ गया, जिसने डॉलर को येन के मुकाबले मजबूत बनाए रखा। अब 2024 में इस नीति को छोड़ने के फैसले और अन्य बैंकों द्वारा दरों में कटौती से यह अंतर धीरे-धीरे सिमट रहा है। इसके साथ ही, वैश्विक अनिश्चितता या वित्तीय तनाव के दौर में जापानी येन को एक सुरक्षित निवेश का साधन माना जाता है। ऐसे समय में स्थिरता की तलाश में निवेशक जोखिम भरी मुद्राओं से पूंजी निकालकर येन की ओर रुख करते हैं।
वैश्विक बाजार और अन्य मुद्राओं की हलचल
एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर की मजबूती के साथ अन्य परिसंपत्तियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6900 के तीन महीने के निचले स्तर से उबरने के प्रयास में संघर्ष करता दिखा और 0.7000 के नीचे दबाव में रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने डॉलर में खरीदारी को बढ़ावा दिया है, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कुछ हद तक सहारा दिया है।
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उछाल के कारण सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी नरमी आई। सोना 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से आई पिछली तेजी को आगे नहीं बढ़ा सका और एक सीमित दायरे में सिमट गया।
इधर घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक बुधवार को भारतीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति का एलान करने जा रहा है। बाजार आम सहमति के अनुसार, केंद्रीय बैंक द्वारा इस साल की यथास्थिति को समाप्त करते हुए रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद है, जिससे यह 5.25% से बढ़कर 5.5% हो सकती है। वहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक मुद्रास्फीति के लक्ष्य से लगभग दोगुने स्तर पर पहुंचने के बावजूद जटिल स्थिति में फंसा है, जहां बॉन्ड बाजार की हलचल पहले से ही वित्तीय सख्ती ला रही है।




















