अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर में खरीदारी का नया दौर देखने को मिला। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल को दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) पिछले कारोबारी सत्र की सुस्ती से उबरते हुए 102.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, यह सूचकांक 102.05 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर 101.83 के मुकाबले 0.22% की मजबूती दर्शाता है। निवेशक और ट्रेडर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति (FOMC) के मिनट्स जारी होने से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। यह मजबूती ऐसे समय में आई है जब सूचकांक सोमवार को अप्रैल 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर के काफी करीब पहुंच चुका था।
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक टकराव और कच्चे तेल में हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में डॉलर को सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में देखा जा रहा है। मध्य पूर्व से सामने आ रहे घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। यमन में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार से जुड़े सऊदी समर्थित बलों ने लाल सागर तट के रणनीतिक ठिकानों और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया है। इसके जवाब में ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें रियाद स्थित अरामको की एक रिफाइनरी भी शामिल है।
इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में भी बीते सप्ताह के दौरान हमलों की रफ्तार तेज हुई है। इन सैन्य टकरावों और तनावपूर्ण घटनाक्रमों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन मिला है, जिससे तेल की कीमतें अपने एक महीने के निचले स्तर से ऊपर आ गई हैं। ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी संभावित व्यवधान की आशंका ने निवेशकों को डॉलर जैसी मजबूत संपत्तियों में शरण लेने के लिए प्रेरित किया है।
अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और तकनीकी संकेतों की स्थिति
डॉलर इंडेक्स की इस तेजी को अमेरिकी बॉन्ड बाजार में आई उछाल से भी बड़ा समर्थन मिला है। हाल ही में वैश्विक फिक्स्ड इनकम बाजार में चली बिकवाली के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब टिकी हुई है। बॉन्ड प्रतिफल में आई नई तेजी ने ग्रीनबैक के लिए मांग को दोबारा जीवित कर दिया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले लगभग एक महीने से चल रहे इस अपट्रेंड में आने वाली किसी भी तकनीकी गिरावट को निवेशक खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
तकनीकी स्तरों पर नजर डालें तो डॉलर इंडेक्स 101.75 से 101.65 के ब्रेकआउट रेजिस्टेंस दायरे से ऊपर टिकने में कामयाब रहा है, जिसने पिछले सत्र में गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। इंडेक्स के 14-अवधि के रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) का स्तर 71.45 पर पहुंच गया था, जबकि लाइव आंकड़ों में यह 69 के आसपास बना हुआ है। यह आंकड़ा मजबूत खरीदारी दबाव की ओर इशारा करता है, हालांकि यह कुछ समय के लिए ओवरबॉट स्थिति भी दर्शाता है, जिससे अल्पावधि में एक सीमित तकनीकी करेक्शन या ठहराव देखने को मिल सकता है। दैनिक औसत वास्तविक रेंज (ATR) 0.47 है, जो मौजूदा अस्थिरता को रेखांकित करता है। दैनिक धुरी स्तर 102.01 पर स्थित है, जबकि इसके लिए निकटतम रेजिस्टेंस 102.11 और 102.17 हैं, तथा सपोर्ट स्तर 101.95 और 101.85 पर बने हुए हैं। 52 हफ्तों के दौरान डॉलर इंडेक्स का दायरा 95.55 से 102.54 के बीच रहा है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और सोने पर दबाव
डॉलर की मजबूती का सीधा असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी पर स्पष्ट देखा गया है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में नजर आया। USD/JPY बुधवार के एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के आसपास बना रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से आए नरम बयानों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण जापानी मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है। अब ट्रेडर्स 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज की बाधा पार होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) भी दबाव में रही और 0.7000 के स्तर से नीचे फिसल गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों के बावजूद सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा अपनी रिकवरी को बरकरार नहीं रख सकी। वहीं बुलियन मार्केट में सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। पिछले दिन 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से संभलने के बाद सोना एक बार फिर सीमित दायरे में आ गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और मजबूत डॉलर ने बिना ब्याज वाली इस पीली धातु की बढ़त पर ब्रेक लगा दिया है।
केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों पर टिकी निगाहें
वैश्विक मुद्रा बाजारों का ध्यान अब विभिन्न केंद्रीय बैंकों के नीतिगत कदमों पर लगा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के निर्णय की घोषणा करने जा रहा है। मौजूदा कैलेंडर वर्ष में अब तक ब्याज दरों को यथावत रखने के बाद ऐसी व्यापक उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक इस बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू कर सकता है। बाजार आम सहमति के अनुसार, आरबीआई अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.5% कर सकता है।
दूसरी तरफ यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यूरोजोन में महंगाई दर तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही है। सामान्य परिस्थितियों में इसका सीधा समाधान ब्याज दरें बढ़ाना होता, लेकिन बॉन्ड बाजार की हालिया सख्ती ने पहले ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर दिया है। ऐसे में ईसीबी को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के बीच संतुलन साधने के लिए एक बेहद जटिल दुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले सत्रों में नीतिगत मिनट्स और ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंकों के फैसले मुद्रा विनिमय दरों की दिशा तय करेंगे।




















